Monday, June 7, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-३१

बड़ी तारीफ कर रही थी , उसके चेहरे पर आश्चर्य के भाव थे. वह कह रही थी-
- वाह शिल्पा, तुम्हारा जिस्म बेहद सुन्दर है , और गाथा हुआ भी . ऐसा लगता है जैसे तुम किसी फिल्म में काम करने वाली हीरोइन हो . सच कहो फिल्मों में काम तो नहीं करतीं शायद तुम जैसी खूबसूरत तो फ़िल्मी दुनिया में भी कोई नहीं होगी , हर अंग आँखों को लुभा रहा है, मेरी तो आँखें हटने का नाम ही नहीं ले रहीं. जी करता है बस देखती रहूँ.
शिल्पा- सिर्फ देखती ही रहोगी या कुछ करोगे भी , आगे भी बहुत कुछ बाकी है. उसे भी तो जानो .
- हाँ, -हाँ अब बिना जाने यहाँ से थोड़े ही जानू दूंगी . मैंने भी अभी तक शादी नहीं की है. मेरे पास सब कुछ होते हुए भी कुछ कमी से थी. अब तुम मिली हो तो यह कमी भी काफी हद तक पूरी होती दिखाई देती है . मै तुम्हें देखने मात्र से और स्पर्श मात्र से ही इतनी उत्तेजित हो चुकी हूँ कि बता नहीं सकती. यह कुछ अलग सा एहसास है. ऐसी मदहोशी ऐसे ही नहीं हो जाती, कुछ खास है तुम्हारे में, कुछ क्या बहुत खास है . मुझे भी इस बेहतरीन फिगर का राज बताओ यार , मै भी जाना चाहूंगी , तुम्हारे जैसी सेक्सी दिखना चाहूंगी .
शिल्पा- जानना चाहती हो ? तो सुनो , मेरी सुंदरता का राज सेक्स है, मै खूब इंजॉय करती हूँ, फर्क इतना सा है कि पुरुषों के साथ नहीं बल्कि अपनी बहनों यानि महिलाओं के साथ मुझे आनंद मिलता है. मै खुद भी सुख भोगती हूँ और अपनी सहेलियों को भी सुख -संतुष्टि के समुन्दर में गोते लगवाती हूँ. इसी कारण कोई तनाव मुझ पर हावी नहीं हो पाटा, चिंता कितनी ही बड़ी क्यों न हो , उसकी दम में ही हवा निकल जाती है. चाहे जो हो मै मस्त रहती हूँ, सुबह नियमित रूप से वर्जित करती हूँ और जो भी मर्जी होती है, वही खाती हूँ, रात को शराब का मजा भी चख लेती हूँ और सिगरेट बस तभी पीती हूँ जबकि मुझे शराब पीनी होती है.
- वैरी गुड यार , बहुत दिलचस्प बातें करती हो . चलो मै एक-एक लार्ज पैग और तैयार करती हूँ. अगर ऐसी बात है तो हम दोनों की खूब जमेगी यार . खूब पियेंगे , खायेंगे मौज करेंगे , बस मुझे शारीरिक सम्बन्ध को लेकर ही परेशानी है,सोचती हूँ कि कहीं से कोई गंभीर बीमारी ना हो जाए, यह अप्राकृतिक है . मै हमेशा अपने लेखों में इसके खिलाफ ही लिखती आयी हूँ. वैसे मैंने आज तक इसका प्रत्यक्ष अनुभव नहीं किया है. और ना ही ऐसा कोई सबूत मेरे पास है जिससे ऐसा लगे कि इस तरह के रिश्ते सेहत के लिए खतरनाक हैं.
शिल्प- मै ज्यादा कुछ नहीं जानती , बस आज ये सिद्ध कर दूंगी कि ऐसे रिश्तों से आनंद कितना आता है डॉक्टर या वैज्ञानिक तो मै भी नहीं हूँ जो ये बता सकूं कि ऐसे सम्बन्ध कितने और क्यों खतरनाक होते हैं.
कम्मो - वाह.. बहुत अच्छा जवाब दिया. फिर क्या बोला उसने ?
शिल्पा- बोलने की फुर्सत किसे थी और सूनने का भी समय नहीं नहीं था. वह तो काम करने का वक्त था . 'काम 'करने का वक्त. सिर्फ और सिर्फ काम में ध्यान था. मैंने शिल्पा के शरीर पर हलकी सी मालिस करने के बाद उसे भीगी तौलिया से पौंछ दिया , बहुत बढ़िया तरीका से . इसके बाद मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया. वह नग्न होने में थोड़ी सी असुविधा महसूस कर रही थी. वह थोड़ी सी मोटी थी इसलिए शायद असहज हो रही थी , मगर जब शराब ने अपना असर दिखाना शुरू किया तो वह भी मान गयी . मैंने उसके यौवन द्वार पर न्हात से दे दी. वह कराहने लगी . उछलने लगी. मुझे भी आनंद आने लगा. मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने सीने पर रख दिया. वह इशारा समझ चुकी थी . उसकी समझ में आ गया था कि उसे क्या करना है , और फिर जल्द ही उसने कार्रवाई करनी भी शुरू करदी , यह बहुत अलग एहसास था. कुछ समय के बाद जब मैंने भी उसके यौवन उभारों का सहलाना चालु किया तो वह खुशी से लगभग चीख पडी. मैंने उसे पूछा -
-कहो अब कैसा महसूस कर रही हो , दुःख लग रहा है कि सुख ?
- जो मजा आ रहा है , बस पूछो मत. चुपचाप कार्रवाई पर अड़ी रहो, मेरे ख़याल से अब हमें जब तक बात नहीं करनी चाहिए तब तक कि हम सुख के सागर में पूरी तरह डूब ना जाएँ . क्या ऐसा संभव है ?
शिल्पा- इस नीली छतरी के नीचे सब कुछ हो सकता है.
-तुम तो ढोंगी , बंगाली बाबाओं की भाषा बोल रही हो .
शिल्पा- कभी उनके चक्कर में ना पढ़ना , वे लोग बाबागीरी के चक्कर में गर्भवती बना डालते हैं. कितनी ही अपनी इज्जत लुटा बैठी हैं, और तो और बाद में ब्लेकमेल करते हैं वो अलग. मजबूर में कोई उनकी शिकायत भी नहीं करना चाहती है.













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