कम्मो- अच्छा ऐसी बात है क्या ?शिल्पा खुद ही नेक और भली लड़की है , और जो लोग खुद अच्छे होते हैं , वे दूसरों को भी अपने जैसा ही भला समझते हैं. सच कहूँ तो मुझे अपने अंदर कोई खास बात नजर नहीं आती.
बोस- ऐसे मैं मानने वाला नहीं हूँ. कोई ऐसे ही किसीकी तारीफ़ नहीं करता . खासकर लड़कियां. लड़कियां तो बस अपनी प्रशंसा में ही मगन रहती हैं.
कम्मो- थेंक यू सर . आपने मेरी सराहना की , इसके लिए मैं आभारी हूँ. मैं जानना चाहती हूँ कि मुझे क्या काम करना होगा , और कबसे ज्वाइन करना है ?
बोस- मैंने कहा न, उसकी फ़िक्र मत करो. तुमने जिस पद के लिए एप्लाई किया है , उसी पर रखा जाएगा . पी आर मैनेजर का काम भी दिलचस्प होता है. मगर चुनौतीपूर्ण भी . तुम्हें मेरी सेक्रेटरी सब कुछ समझा देंगी . आज हम लोग बातें कर लेते हैं , बाद में शायद इतना समय नहीं मिल पायेगा. मैं चाहता हूँ कि आज ही हम लोग एक दूसरे को ठीक तरह से जान ले. बाई दबे , आज रात क्या कर रही हो ? क्या हम हम लोग कहीं कैंडल डिनर करें ?
कम्मो- माफ कीजिये , मैं इसमें किसी तरह की कोई दिलचस्पी नहीं रखती. आप चाहें तो मुझसे यहीं पर सवाल कर सकते हैं. मैं जवाब दूंगी . कोशिश करूंगी तुम्हें संतुष्ट करने के लिए .
बोस- संतुष्ट ? इतनी दूर से कैसे संतुष्ट कर पाओगी ? ज़रा और करीब आओ तो बात बनें.मुझे तुम ऊपर से सुखी और अंदर से दुखी दिखाई देती हो , यह गलत है . अगर मेरी मानो तो
खुश रहिए,खुशी बांटिए-आदमी के मस्तिष्क में हमेशा कमतर और बेहतर के मध्य ल़डाई चलती रहती है और जीवन की सभी प्राथमिकताएं इन्ही दोनों के द्वंद्व के मध्य निर्धारित होती है। खुशी सकारात्मकता की ओर बढ़ाती है। यदि हमें खुशी और संतोष का अनुभव नहीं हो रहा है तो इसका मतलब हम गलत दिशा में बढ़ रहे हैं। खुशी प्राप्त करने के लिए ही व्यक्ति अमीर बनना चाहता है, सम्मान प्राप्त करना चाहता है। अरस्तु ने खुशी को भावना से अधिक क्रिया माना है। "युडेमोनिया" एक अवस्था है जिसे मनुष्य न सिर्फ प्राप्त करना चाहता है बल्कि उसे स्थायी बनाए रखने की कोशिश भी करता है। खुशी आत्मा को निर्मल बनाती है। मुस्कुराते और खिलखिलाते हुए चेहरे हरेक युग की मानवजाति में बिल्कुल एक जैसे रहे है, फिर चाहे वजहें कितनी ही अलग क्यों न हो। |
एक जैव वैज्ञानिक ने अपनी पुस्तक में इस विचार को विस्तार से समझाने का प्रयास किया है। उन्होने इस भावना को समय के साथ जो़डते हुए इसे भूत, वर्तमान और भविष्य से प्रभावित बताया है। जो खुशी बीते हुए कल से जु़डी होती है, उसमे संतोष,गर्व और शाति का एहसास अधिक होता है। जो खुशी भविष्य से जु़डी होती है उसमें आशावाद,सकारात्मकता और विश्वास जैसी भावनाएं प्रबल होती है। वर्तमान से जु़डी खुशीयों को "सुख और संतुष्टि" दो भागों में बांटा जा सकता है। सुख क्षणिक होता है और शारिरिक होता है। संतोष द्वारा प्राप्त होने वाली खुशी में जु़डाव,बंधन,प्रवाह और आत्म-चेतना होती है और भावनाओं का एहसास भी लंबे समय तक बना रहता है। इस तरह हम खुशी के स्तर को वक्त के अनुसार माप सकते है।
कम्मो - ठीक है सर . मैं आइन्दा से हमेशा खुश रहने का प्रयास करूंगी . ऊपर से भी और अंदर से भी. मेरा वादा है.
बोस- ठीक है , एक आख़िरी सवाल और ? थोड़ा पर्सनल है, मगर जरूरी है .
कम्मो- पूछिए न सर ?
बोस- क्यों न हम लोग कहीं बाहर घूमने चलें. जहां तुम्हारी इच्छा करे . तब बातें करते हैं.
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