शिल्पा- हाँ कम्मो , मै तुमसे बहुत प्रेम करने लगी हूँ मेरी जान. प्रेम के सम्बन्ध में मैंने सुना है कि प्रेम किसी एक व्यक्ति से हमारे संबंधों का नाम नहीं है, यह एक दृष्टिकोण है, एक चारित्रिक रुझान है जो किसी व्यक्ति के साथ-साथ पूरी दुनिया से हमारे संबंधों को अभिव्यक्त करता है। वह केवल एक लक्ष्य और उसके साथ के संबंधों का नाम नहीं है। यदि एक व्यक्ति केवल दूसरे एक व्यक्ति से प्रेम करता है और अन्य सभी व्यक्तियों में उसकी रुचि नहीं है, तो उसका प्रेम, प्रेम न होकर उसके अहं का विस्तार मात्र है। फिर भी ज्यादातर लोग यही समझते हैं कि प्रेम एक 'लक्ष्य' है न कि एक 'क्षमता'।
वे समझते हैं कि भूल भी करते हैं कि यदि वे केवल अपने 'प्रेमी' या 'प्रेमिका' से ही प्रेम करते हैं, तो यह उनके प्रेम की गहराई का प्रतीक है। इसका मतलब है कि वे प्रेम को एक गतिविधि के रूप में, 'आत्मा की एक शक्ति' के रूप में नहीं देखते।
उन्हें लगता है कि एक 'प्रेमी' या 'प्रेमिका' होने का अर्थ है 'प्रेम' को पा लेना। यह बिलकुल वैसी ही बात है, जैसे कोई व्यक्ति चित्रकारी करना चाहता है और समझे कि उसे केवल एक प्रेरक विषय की जरूरत है, जिसके मिल जाने पर वह स्वत: ही बढ़िया चित्रकारी कर लेगा। अगर मैं किसी एक व्यक्ति से सचमुच प्रेम करता हूँ तो मैं सभी व्यक्तियों से प्रेम करता हूँ। किसी से 'मैं तुम्हें प्यार करने का सच्चा अर्थ' यह है कि 'मैं उसके माध्यम से पूरी दुनिया और पूरी जिंदगी से प्यार करता हूँ।
कम्मो- वाह , कहने वाले ने बहुत बढ़िया बात कहदी है , मजा आ गया. यह तो एकदम अलग सी परिभाषा है .
यह धारणा भी कितनी गलत है कि जोड़े स्वर्ग में तय होते हैं। 'रहस्य' और 'मनोविज्ञान' को जो जानते हैं वे तो शायद ऐसा नहीं कहेंगे। शादी के बारे में आमतौर पर कहा जाता हो कि यह एक ऐसा लड्डू है जिसे खाने वाला भी पछताता है और न खाने वाला भी। समझदार व्यक्ति ऐसी बेवकूफी भरी कहावत पर शायद ही विश्वास करें।
किसी भी व्यक्ति में किसी भी व्यक्ति के प्रति छह माह में प्यार जगाया जा सकता है। इसका यह मतलब हुआ कि प्यार होता नहीं किया जाता है।
कुछ डॉ. अपने शोध के आधार पर कहते हैं कि प्यार एक बीमारी है और इस बीमारी का इलाज है सिर्फ सेक्स। यदि प्रेम के इजहार का मौका नहीं मिलता तो बीमारी और बढ़ जाती है, हो सकता है कि वे गुस्सा, अवसाद या किसी अन्य मानसिक रोग से ग्रस्त हो जाएँ। इसे 'लव सिकनेस' कहते हैं।
मीरा ने कृष्ण से प्रेम किया था किसी गलत वजह से नहीं। पवित्र प्रेम के बारे में सोचने वाले सही हैं। प्यार और विश्वास किसी भी दंपति के जीवन का आधार है। दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं होता।
खैर यह तो बात प्यार के इजहार से जुड़ी है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इजहार कर ही दिया तो फिर नया खेल शुरू होता है जो कुछ दिन तक तो अच्छे अहसास के साथ चलता है, लेकिन फिर धीरे-धीरे उसमें टेंशन पैदा होने लगता है।
बेवफाई का डर भीतर ही भीतर सालता रहता है। यदि प्यार में बेवफाई का सामना करना पड़े तो फिर दिल के दौरे की संभावना बढ़ सकती है बशर्ते कि आप अपने प्रेमी या प्रेमिका से कितने जुड़े हैं यह इस पर तय होता है।
तमाम शोध और तमाम बेवकूफी भरे वाक्य प्यार की ताकत को झुठला नहीं सकते और ना ही उसे सेक्स से जोड़ सकते हैं। सेक्स आपके जीवन का अहम हिस्सा हो सकता है, लेकिन प्यार का स्थान उससे कहीं ऊँचा है। मीरा ने कृष्ण से प्रेम किया था किसी गलत वजह से नहीं। पवित्र प्रेम के बारे में सोचने वाले सही हैं। प्यार और विश्वास किसी भी दंपति के जीवन का आधार है। दांपत्य जीवन में प्यार का मतलब सिर्फ सेक्स से नहीं होता. और इससे यह सिद्ध होता है कि हमारा प्यार कभी कम नहीं होगा क्योंकि हमने सच्चा प्यार किया है .
शिल्पा- हाँ, इसमें कोई दो राय नहीं है . बिलकुल सत्य बात है . अब तुम भी मेरे इस गणित को समझ गयी हो . पहले शायद तुम्हें कुछ हिचक होगी मगर अब जान गयी ना कि हमारी दोस्ती की नीव कितनी मजबूत है .
Wednesday, June 2, 2010
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