Wednesday, June 23, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-४५

शिल्पा की बात से कम्मो भी सहमत हो गयी. कुछ देर में ही वे गहरी नींद के आगोश में सो रही थीं.शिल्पा ने कम्मो को अपने बॉस के बारे में बातें बताई थीं. उसके अवचेतन में भी वही बातें घूमने लगीं. सपने में शिल्पा का बोस उसे काम क्रिया के बारे में जानकारी दे रहा था. बदलते जमाने में आपसी संबंध के मायने और उसे जताने के तरीके भी बदलते गए हैं। इससे सेक्‍स संबंध भी अछूता नहीं रहा है। कई लोग ऐसे होते हैं जो सेक्‍स संबंधों को लंबे समय के रूप में देखता है तो कोई क्षणिक दैहिक सुख के रूप में। कोई मानता है कि काम क्रिया से चरम सुख की प्राप्ति होती है तो कोई इसको नरक का द्वार मानता है। बहरहाल, सेक्‍स संबंध एक शाश्‍वत क्रिया है जिससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। हां इतना जरूर है कि किसी भी क्रिया की अति हानिकारक होती है। काम क्रिया का मनोवैज्ञानिक तौर पर सकारात्‍मक असर पड़ता है। खासकर यह उस वक्‍त और भी प्रभावी सिद्ध होता है जब खुले दिमाग या बिना किसी अतिरिक्‍त दबाव के किया जाए।जानकारों ने पहले भाग में ऐसे सेक्‍स संबंध को रखा है जिसमें दैहिक सुख प्रधान है। जबकि दूसरे भाग में कमिटेड सेक्‍स संबंध को रखा गया है, जो न केवल दीर्घकाल के लिए होता है वरन प्रेममयी भी होता है। तो क्‍या यह माना जाए कि प्रेमपुर्ण संबंध सिर्फ दैहिक सुख के लिए बनाए गए संबंध से बेहतर होता है? इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि सौहार्दपूर्ण माहौल में किया गया सेक्‍स स्‍वास्‍थ और सुखमय जीवन के लिए महत्‍वपुर्ण होता है। किसी भी तरह की वचनवद्धता से परे। इसका अर्थ यह हुआ कि सेक्‍स संबंध मे किसी भी तरह के वादे या समर्पण से बचना। इसका मतलब यह बिल्‍कुल नहीं है कि इस तरह के सेक्‍स संबंध के दौरान लापरवाही बरती जाए या इसमें एक दूसरे के ऊपर किसी तरह की जिम्‍मेदारी नहीं होती है। बल्कि इसको दूसरे नजरिए से देखना चाहिए। यौन संबंध के दौरान वर्तमान परिस्थिति का पूरा-पूरा ध्‍यान रखना होता है। जैसे आप किसी सार्वजनिक स्‍थान पर या ऐसे जगह पर जहां आप दोनों में से किसी के भी निजता के भंग होने का खतरा हो, वहां काम क्रिया नहीं करना चाहिए। इस संबंध में आप इस तरह के विचार से परे होते हैं कि आपका साथी आपके बारे में क्‍या सोच रहा है या आप अपने साथी के बारे में क्‍या विचार बना रहे हैं। इसके अलावा किसी भी तरह के भावनात्‍मक संबंधों से दूर आप सिर्फ और सिर्फ शारीरिक संतुष्टि को प्राथमिकता देते हैं।बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो अपरिचित लोगों के साथ यौन संबंध बनाने में रुचि लेते हैं। कई लोग इनलोगों के साथ सेक्‍स करने में रोमांच का अनुभव करते हैं क्‍योंकि जिन लोगों के साथ आप संबंध बना रहे हैं, जरूरी नहीं की वह आपको भविष्‍य में दोबारा मिले। हालांकि इसमें इंकार की गुंजाइश भी रहती है। जोखिम केजुअल सेक्‍स का एक भाग है। क्‍योंकि कई लोग इसके लिए सार्वजनिक स्‍थानों का चयन भी करते हैं या आपका साथी सीमा से बाहर जाने की कोशिश करता है। स्‍वाभाविक है कि ऐसे में थोड़ा खतरा तो रहता ही है।बहुत से बच्‍चों को शुरू से ही यह बात बताई जाती है कि नैमित्तिक यौन संबंध बुरा होता है। इससे उनके अंदर एक प्रकार का रोमांच पैदा होता है कि आखिर इसमें क्‍या होता है। परिणामस्‍वरूप केजुअल सेक्‍स के प्रति लोगों में रुचि बनी रहती है। किसी भी खतरे या भय के माहौल में मानव का तंत्रिका तंत्र सामान्‍य से ज्‍यादा सक्रिय हो जाता है। सांसों की गति तेज हो जाती है, रक्‍तचाप बढ़ जाता है। इसके फलस्‍वरूप शरीर में स्‍फूर्ति का संचार होता है। इन परिस्थितियों में हमारा शरीर सेक्‍स के लिए अनुकूल रहता है। जब आप प्‍यार में होते हैं तो उस दौरान (समर्पण) जैवरासायन सक्रिय हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार जोड़ों में इसका परिणाम आशा से ज्‍यादा सकारात्‍मक रहा है। इनका आगे कहना है कि दोनों लोग हर उस अवसर को भुनाने की कोशिश करते हैं, जिससे यह साबित हो सके की उनके बीच प्रेममयी माहौल है। साथ ही वे एक दूसरे के करीब आने की पूरी कोशिश करते हैं। इस दौरान सेक्‍स का अनुभव काफी रोमांचकारी रहता है। केजुअल सेक्‍स के दौरान जहां जोखिम और रहस्‍य दोनों की संभावना रहती है, वहीं प्रेममयी माहौल में किया गया सेक्‍स संबंध इन सब से ऊपर होता है। दूसरे शब्‍दों में यह कहा जा सकता है कि मधुर संबंध के बीच बनाया गया यौन संबंध अपेक्षाकृत ज्‍यादा संतोषप्रद होता है। इस तरह के संबंध में न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और भावनात्‍मक संबल भी प्राप्‍त होता है। दैहिक सुख के अलावा आत्मिक प्रसन्‍नता भी जीवन की गाड़ी को चलाने के लिए आवश्‍यक है। ऐसे माहौल में प्रेम सेक्‍स संबंधों को मजबूत बनाने में सहायक होता है।


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