Monday, June 14, 2010

प्यार से प्यारा , भाग-३६

कम्मो- तब तो खूब आनंद आएगा। क्या विदेश में ऐसा कोई खिलोना मौजूद है जो सेक्स सम्बन्ध जैसा सुख दे सकता है ? में नहीं मानती। मुझे लगता है ये सब किताबी बातें हैं, या फिर ब्लू फिल्म में दिखाई देती होंगी ।
शिल्पा- लेकिन कहीं भी दिखेंगी तो तभी न जब उनका अस्तित्व होगा। फिल्म का मतलब ये है कि अगर कुछ होगा , तभी न दिखाई देगा। बिना हुए कुछ नहीं दिखता ।
कम्मो- लेकिन कोई खिलौना इंसान जैसा सुख कैसे दे सकता है ?
शिल्पा- हाँ, सोच तो मई भी यही रही हूँ, अगर कहो तो उससे कहूँ कि हमारे लिए भी एसी एक मशीन बनादे , जिसकी मदद से हम मनचाहा सेक्स कर सकें। उससे इतना तो फायदा हो ही जाएगा कि जब भी जी चाहेगा तब मजा ले लिया करेंगे , और अगर ऐसा नहीं भी हुआ तो कम से कम एक बार तो पता चल ही जाएगा कि वह होता कैसा है , और उससे थोड़ा बहुत सुख मिलता भी है या नहीं ।
कम्मो- तुम्हारी उत्सुकता में समझ सकती हूँ। देखा जाए तो मुझे भी इसी तरह का एहसास हो रहा है । में भी जल्द
से जल्द उस मशीन से मजा लेने की इच्छुक हूँ। लेकिन यह पता नहीं कि शुभा ने वह मशीन अभी मंगवाई है कि नहीं । अगर तुम चाहो तो कल हम दोनों उनके यहाँ चल सकते हैं। वहां मुलाक़ात भी हो जायेगी और मालूमात भी।
कम्मो - में शुभा के साथ सम्बन्ध बनने के लिए बेताब हो रही हूँ । तुमने उसकी इतनी तारीफ़ की है कि मैंने अपने मन में उसकी एक खास छवि बना ली है। सोच रही हूँ कि अगर वह मिल जाए तो उसे ऐसे प्यार करूंगी , वैसे प्यार करूंगी , तुमने जो ग्रुप सेक्स का जिक्र किया था, उसको भी भोगने का अवसर मिल जाएगा । क्या शुभा इस आनंद से अवगत है ? क्या वह भी तुम्हारे साथ मजा ले चुकी है ?
शिल्पा- ग्रुप सेक्स की बात कर रही हो , समझ गयी । मैंने उसके साथ कई बार आनंद लिया है। असल में देखा जाए तो शुभा ने ही हमें इससे अवगत कराया कि ऐसे भी मजा लिया जा सकता है। हम कई लड़कियां मिलकर इसका सुख भोग सकती हैं। इससे आपस में प्रेम भी बढ़ता है और ज़रा टेस्ट भी चेंज हो जाता है, सबसे असली बात ये है कि इस बहाने हम कई सहेलिया मिल बैठती हैं। अगर किसीको कोई दिक्कत है तो उसका समाधान हो जाता है।
कम्मो- फिलहाल मेरी समस्या का तो समाधान करो मैं ग्रुप सेक्स का आनंद भोगना चाहती हूँ, यह सोचने मात्र से ही मेरे रोंगटे खड़े हो रहे हैं। जिस्म में ज्वाला सी दहक रही है। मन में लड्डू फूट रहे हैं। सोचती हूँ कि जम हम कई महिलायें वहाँ इकट्ठी होंगी तो कितना मजा आएगा। आह। अभी से मेरा ये हाल है तो उस वक्त ना जाने क्या होगा ?
शिल्पा- तुम्हारा उतावलापन मैं समझ सकती हूँ। ऐसा ही होता है जब दिल में इश्क की आग दहकने लगती है। मन बावला हो जाता है । आँखों के सामने बस एक ही चीज दिखाई देती है - वो है प्यार , प्यार और प्यार ।
कम्मो- सच ऐसा ही होता है । अब मुझे लड़कों से नफरत और हर लड़की से मोहब्बत होने का एहसास होने लगा है।
शिल्पा- जब तुमने इस तरह के इश्क का मजा चखा होगा तो तुम्हारी भी हालत ऐसी ही रही होगी ?
शिल्पा- मैं दुनिया से अलग थोड़े ही हूँ। सबकी हालत ऐसी ही होती है ।

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