शिल्पा- अरे कुछ नहीं, वह भले ही ज्यादा पढ़ी-लिखी थी, बहुत दौलत -शौहरत वाली थी मगर थी एक नंबर की उस्ताद, ये कुछ ऐसे लोग होते हैं जो दिन में समाज के सामने अपने कुछ छवि दिखाते हैं और समाज के बाद कुछ और. किसी ने सफेद्पोश शब्द का इस्तेमाल ऐसे ही लोगों के लिए किया है.
कम्मो- हां, ये बात तो है., उसके बाद क्या-क्या हुआ ?
शिल्पा- वही , जो होना चाहिए था. शराब पीते-पीते ही हम लोगों ने खूब इंजॉय किया. उसने सुख भोगते हुए कहा-
-वह री शिल्पा. अब तक कहाँ थी मेरी बहन ? मै तो बेताब थी तुम जैसी हसीना से मिलने के लिए , तुमने मेरे विचार के साथ-साथ मेरी चोईस भी बदल डाली है. अब जो मजा आया है, उसका क्या बखान करू, तुम तो सहेली भी हो और सजाना भी. दोनों काम बखूबी कर सकती हो.
शिल्पा- मै अपना हाथ, जगन्नाथ वाले सिद्धांत पर भरोसा करती हूँ , जो खेल मै तुम्हारे साथ खेल रही हूँ, इसमें बिना किसी मर्द की सहायता के बड़े आराम से हम कामसुख की प्राप्ति कर सकती हैं. नित नए तरीके अपनाकर इस खेल को और भी ज्यादा मजेदार और प्रभावी बनाया जा सकता है.
- अच्छा , और भी ज्यादा? क्यों मेरी उत्सुकता बढ़ा रही हो यार ?
शिल्पा- सिर्फ उत्सुकता बढाने तक ही सीमित नहीं हूँ, मैंने सोच लिया है कि हर टिप्स सिखाऊँगी तुम्हें .
No comments:
Post a Comment