- यह तुम क्या कहती हो शिल्पा। मैं प्यार करने लगा हूँ तुमसे । इस कंपनी को अपनी ही समझिए । अगर सेक्सनहीं तो आलिंगन ही सही, कम से कम मुझे चुम्बन का तो परमीशन दीजिए ,
| आमतौर पर लोगों की मानसिकता होती है कि आलिंगन यानी फोर सेक्स से कहीं अधिक आनंददायक संभोग होता है। लेकिन जानती हो , अब यह विचारधारा बदल रही है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक लोग अब संभोग् से ज्यादा चुंबन और आलिंगन को महत्व देने लगे हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक 50 फीसदी से ज्यादा लोगों का मानना है कि वह यौन संबंधों की बजाय वे चुंबन और आलिंगन को तवज्जो देते हैं। यह बात एक सर्वेक्षण में सामने आई है। एक सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि एक सफल संबंध में प्रतिबद्धता, सहचर्य और हंसी-मजाक के बाद यौन संबंधों की बारी आती है।सर्वेक्षण में यह भी जानने की कोशिश की गई कि पुरुषों व महिलाओं को सेक्स किस स्थान पर पसंद है। इसमें पाया गया कि पुरुष बेडरूम के बजाय सोफे पर चुंबन व संभोग में खुशी महसूस करते हैं। जबकि महिलाओं को बेडरूम में ज्यादा आनंद आता है। सर्वेक्षण के मुताबिक 60 महिलाओं में पचास प्रतिशत से अधिक का कंडोम के इस्तेमाल पर ज्यादा अच्छा लगता है। महिलाओं का कहना है कि कंडोम के इस्तेमाल से यह तनाव नहीं होता, कि कहीं गर्भधारण न हो जाए। लिहाजा पूरा ध्यान प्रेम करने में रहता है।इसीलिए कहता हूँ कि इससे न तो तुम्हें नुक्सान होगा और न मुझे ही , मिल जुलकर प्यार कर लेते हैं। शिल्पा- प्लीज सर, मुझे माफ कीजिये , प्यार- व्यार के चक्कर में मत उल्झाइये , मुझे बहुत डर लगता है। - देखो ,मैं वासना का पुजारी नहीं , प्रेम का साधक हूँ। तुम आराम से इधर बैठो , मैं समझाता हूँ , ध्यान से सुनो बदलते जमाने में आपसी संबंध के मायने और उसे जताने के तरीके भी बदलते गए हैं। इससे सेक्स संबंध भी अछूता नहीं रहा है। कई लोग ऐसे होते हैं जो सेक्स संबंधों को लंबे समय के रूप में देखता है तो कोई क्षणिक दैहिक सुख के रूप में। इस संदर्भ में कई दार्शनिकों ने अलग-अलग मत रखे हैं। किसी के अनुसार काम क्रिया से चरम सुख की प्राप्ति होती है तो कोई इसको नरक का द्वार मानता है। बहरहाल, सेक्स संबंध एक शाश्वत क्रिया है जिससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। हां इतना जरूर है कि किसी भी क्रिया की अति हानिकारक होती है। आधुनिक विशेषज्ञों की मानें तो काम क्रिया का मनोवैज्ञानिक तौर पर सकारात्मक असर पड़ता है। खासकर यह उस वक्त और भी प्रभावी सिद्ध होता है जब खुले दिमाग या बिना किसी अतिरिक्त दबाव के किया जाए । मनोविज्ञानियों ने काम क्रिया को दो भागों में विभाजित करके देखा है। पहले भाग में ऐसे सेक्स संबंध को रखा है जिसमें दैहिक सुख प्रधान है। जबकि दूसरे भाग में कमिटेड सेक्स संबंध को रखा गया है, जो न केवल दीर्घकाल के लिए होता है वरन प्रेममयी भी होता है। तो क्या यह माना जाए कि प्रेमपुर्ण संबंध सिर्फ दैहिक सुख के लिए बनाए गए संबंध से बेहतर होता है? कई शोधों से इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि सौहार्दपूर्ण माहौल में किया गया सेक्स स्वास्थ और सुखमय जीवन के लिए महत्वपुर्ण होता है इसलिए तो मैं कहता हूँ । समझने की कोशिश करो , मैं एक ऐसा रिश्ता कायम करना चाहता हूँ जो हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो जाए। शिल्पा- लेकिन जिस रिश्ते से मुझे खुशी का अनुभव ही नहीं होता हो, ऐसे रिश्ते का क्या अर्थ है ? -ओफ्फोह , तुम नहीं समझोगी। मैंने कितने उदाहरण दिए हैं।क्या मैं ये सोच लूं और मान लूं कि मैंने किसी पत्थर दिल से दिल लगाकर बहुत बड़ी भूल कर दी है ? और यह भी कि मैं इस दुनिया का सबसे अभागा हूँ, बड़े-बड़े घर, बड़ी कंपनी, बड़ी -बड़ी गाडियां ,बड़ा बेंक बैलेंस होने के बावजूद मेरे पास कुछ नहीं है । आह .... शिल्पा- ये क्या कह रहे हैं आप ? मेरी समझ में ये नहीं आता कि आपको मेरे जिस्म में क्या दिखाई देता है ? मैं एक सामान्य , बल्कि सामान्य से भी कम सुन्दर हूँ। मेरे पास आपको देने के लिए है ही क्या ? आप बेवजह दुखी होते हैं ? -तुम क्या जानो शिल्पा, कि तुम क्या हो । हीरा अपनी परख खुद नहीं कर् ता , जौहरी उसकी कीमत जानता है, |
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