मोहब्बत , भाग-६६
स्वीटी- मैं तो अब भी हंसकर ही तुम्हारे पास आयी थी लेकिन इस काले नाग को देखकर डर गयी हूँ, जान है तो जहां है वरना कुछ नहीं है. मुझे तो जान की पडी है.
राज- थोड़ी देर पहले तो बहुत बहादुर बनी फिरती थीं, कहती थीं की सारी दुनिया से टकरा जाओगी और अब देखते ही तुम्हारे पसीने छूट रहे हैं. मरने का डर दिखाने लगी हो. इसीके दम पर दुनिया से टकराने और उसे जीतने निकली थीं.
राज- तुम मुझे बहका रहे हो , मारना चाहते हो मुझे . मैं तुम्हारी बातों आने वाली नहीं हूँ, अगर जान बचेगी तो इश्क मोहब्बत की बातें होंगी , मुझे कायर कहलवाना पसंद है लेकिन मृत कहलवाना पसंद नहीं है. मुझे तो अब जाना है अपने घर . चलो हम लोग मूव करते हैं, प्लीज ... चलो ना ऐसे क्यों देखते हो मुझे ? मैं कह रही हूँ. चलो.,.
राज की आँखों में लाल डोरे तैर रहे थे, वासना की तेज आंधी ने उसको अपने आगओश में ले रखा था, वह इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं था, स्वीटी की बातें उस पर ज़रा भी प्रभाव नहीं दाल पाईं, उसने स्वीटी को कसकर पकड़ लिया और उस पर हावी होने की कोशिश करने लगा, वह स्वीटी के यौवन उभारों को आहिस्ता-आहिस्ता दबा रहा था, साथ ही एक हाथ से उसके यौवन द्वार पर भी दस्तक दे रहा था, उसे मालूम था की आज नहीं तो कभी नहीं,. कुछ दिन पहले भी उसके साथ यही तो हुआ था. पहले तो स्वीटी ने कामुक बातों से उसको कामोत्तेजित कर दिया, जब वह पूरी तरह गर्म हो गया तो उसे ध्जक्का दे दिया, राज आज बेवकूफ बन्ना नहीं चाहता था. आज उसने पक्का निर्णय कर लिया की चाहे जो हो जाए आज वह अपनी और स्वीटी की प्यास बुक्झाकर ही रहेगा, इसीलिए उसने स्वीटी पर चौतरफा हमले करने शुरू दियी, ताकि वार खाली न चला जाए. स्वीटी के होठों से होठ सताकत वह उसकी जीभ का रसपान करने लगा. उसका सख्त अंग स्वीटी के बदन से स्पर्श कर हंगामा मचा रहा था.स्वीटी अंदर से टूटने लगी, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की आखिर क्या करे, एक तरफ तो राज का सानिध्य पाने की बेचैनी थी और दूसरी तरफ एक अनजानी दहशत , की कहीं कुछ हो गया तो क्या होगा,. स्वीटी कोरी , करारी और कुंवारी लड़की थी, भले ही वह विचारों से मॉडर्न थी, उसके कई दोस्त भी थे मगर वह चरित्रहीन नहीं थी, उसने पहले कभी किसी लड़के के साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाए थे. वह बिलकुल अनछुई थी. उसने अपने आपको अभी तक ज़माने की रफ़्तार से सुरक्षित रखा था. राज ने जबसे उसके नग्न बदन को देखा तपो पगला गया था, वह स्वीटी के प्रत्येक अंग को चूम रहा था, स्वीटी की साँसें जोर –जोर से चल रही थीं, उनके बीच एक अजीब सी खामोशी चाई थी, बहुत देर के बाद राज ने खामोशी तोड़ते हुए कहा-
- वाह , मजा आ गया, तुम देखना तुम्हें ज़रा भी दुःख नहीं होगा, ज़रा भी तकलीफ नहीं होगी, सब कुछ ठीक हो जाएगा. तुम्हारी हर समस्या का समाधान हो जाएगा. बेवजह डरने से क्या फायदा है, आखिरकार एक न एक दिन तो ये सब करना ही होगा, अभी से सीख लोगी तो आगे के लिए अच्छा रहेगा वरना सुहागरात के दिन बहुत पछताओगी .
स्वीटी- तुम मेरी मजबूरी नहीं समझ रहे हो. मैं तुम्हारा यह हथियार देखकर बहुत दहशत में हूँ. वरना तो मैं खुद तुम्हारा साथ पाने के लिए तरस रही थी.
राज- इससे क्या डरना पगली , यह तो सिर्फ दिखावा है,जब सही वक्त आएगा तो इसका आकार अपने आप कम हो जाएगा. तुम्हें नहीं मालूम ?
स्वीटी- नहीं, मैंने पहले कभी नहीं सुना, ना कभी देखा . तुम वो पहले मर्द हो जिसके साथ मैं नग्न होकर प्रेमालाप कर रही हूँ.
राज- और मैं ? मैं क्या कृष्ण कन्हिया लगता हूँ, तुम वो पहली लड़की हो जो मेरियो जिंदगी में आई हो वरना तो मैं कभी क्सिसी लड़की के साथ दोस्ती करने से भी कतराता था, लेकिन तुम मेरी जिंदगी में आयीं तो ऐसी आयीं की मेरे विचार ही बदल गए, मेरा नजरिया ही बदल गया. सब कुछ नया –नया हो रहा है मेरी लाइफ में , तो फिर क्यों न एक यह काम भी नया हो जाए.
स्वीटी- मुझे कुछ अनजानी सी दहशत हो रही है,
राज – यह दहशत नहीं वहां है तुम्हारा. आ जाओ मेरी बांहों में, दूर क्यों हटाती हो, आ जाओ और मुझे अपने दिल के अरमान पूरे कर लेने दो, डूब जाने दो मुझे इस इश्क की गहराई में. डूब जाओ इस मस्ती के समुन्दर में.
Saturday, January 2, 2010
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