मोहब्बत , भाग-७४
मगर चाहकर भी कोई तरकीब निकल नहीं पा रही थी, मन में यही भाव उठते थे की अब वह जरूर किसी बड़ी उलझन में फंस गया है, उसे यह बात भी अच्छी तरह से पता थी की एक क़त्ल की सजा भी फांसी ही होती है और दो क़त्ल की सजा भी वही , इसलिए उसके मन में इच्छा जाग्रत हुई की क्यों न वह दूसरी बार भी स्वीटी के साथ मधुर शारीरिक सम्बन्ध बनाए , हो सकता है इस बार उसे अच्छा लगे और उसकी शिकायत प्रशंसा में बदल जाए, और अगर वह उसकी शिकायत भी दर्ज कराती है तो बाद में भी उतनी ही सजा होगी जितनी की अब होगी. तभी तो उसने दो पैग और तैयार किये , स्वीटी की तरफ गिलास बढाता हुआ बोला-
- आई एम् सोरी यार, मैं कुछ समझ नहीं पाया था, मेरी मति मारी गयी थी, चलो गम गलत करते हैं, थोड़ा सा इंजॉय करते हैं. शायद तुम्हें भी इसकी आवश्यकता है. ले लो.
स्वीटी- नहीं मैं अब नहीं पीना चाहती. मुझसे सहन नहीं हो पायेगा.
राज- उस रात तो तुम पैग पर पैग चढाये जा रही थीं, अब अचानक क्या हो गया, मुझे पिलाना सिखाकर तुम खुद क्यों पीना भूल रही हो. जब दांत थे तो चना नहीं और चने अब हैं तब दांत नहीं हैं. एक पैग ली लीजिए , अच्छा फील होगा.
स्वीटी- मैं कुछ भी समझ नहीं पा रही हूँ, मैं तुमसे क्यों बात कर रही हूँ, क्यों लड़ रही हूँ और लड़ने के बाद भी यहाँ पर रुकी क्यों हूँ, यह सब मेरी समझ से परे है.
राज- इसीलिए तो कहता हूँ, इसे पीलो , थोड़ी देर में ही मजा आने लगेगा .
कुछ समय तक तो स्वीटी राज की तरफ देखती , ठीक ऐसे जैसे की अजनबी की तरफ देख रही हो. फिर उसने हाथ में प्याला थाम लिया. यह राज की उम्मीद से परे था. उसे लगा की स्वीटी थक गयी है, पहली बार उसने शारीरिक सम्बन्ध बनाए हैं इसलिए हो सकता है की वह थक गयी हो और तभी इस तरह के बयान दे रही हो. उसने फैसला किया की वह उसे सिर्फ हंसायेगा, मौज मस्ती कराएगा और फिर उसको घर छोड़ आएगा. स्वीटी ने अगेन चीयर्स बोलने ने बाद पीना शुरू कर दिया. जब उसने पैग खत्म किया तो राज ने सिगरेट सुलगाकर उसके हाथ में दे दी . अब वह धुएं के छल्ले उड़ा रही थी, राज के मन में वही द्रश्य बार- बार उमड़-घुमड़ रहे थे जब उसने स्वीटी के होठों से होठ सटाकर एक दीर्घ चुम्बन लिया था तो वह कैसे कसमसा गयी थी , कितने जोश और जज्बात भरे क्षण थे वे, वह कितना खुश था. स्वीटी का नग्न जिस्म उसके दिलो-दिमाग पर बिजली सी गिरा रहे थे. वह उन क्षणों को बेकार समझ रहा था जो उसने अब तक स्वीटी के साथ नहीं बिताए ये. स्वीटी जब सांस लेती तो उसका सीना ऊपर नीचे होता था, राज की आँखों में वासना की चमक उभर उठती थी, वह आहिस्ता –आहिस्ता उन यौवन के उभारों को दबाने लगता था, उनको चूसने की कोशिश करने लगता था, बड़ा ही रोमांटिक मंजर था . राज के साथ-साथ खुद स्वीटी भी मदमस्त थी. हांलाकि उसे राज ने अपने कब्जे में कर रखा था मगर वह अपने आपको छुडाने का महज नाटक रही थी, वह सिर्फ मोहब्बत के पक्ष में ही नहीं थी बल्कि जिस्म की पूरी गर्मी को शांत करना चाहती थी. राज उस नई दुनिया से परिचित तो नहीं था लेकिन उसे वह जग सबसे न्यारा और प्यारा जरूर लग रहा था. स्वीटी का बदन बेहद खूबसूरत था, फिल्मों की कई बड़ी नायिकाएं भी इतना सुन्दर जिस्म नहीं रखती होंगी जितना की स्वीटी का था, राज का जिस्म मजबूत और मनमोहक था, ऐसा लगता जैसे उसने जिम में अथक परिश्रम करके उसे बनाया हो, यही एक कारण था की स्वीटी का दिल उस पर आ गया.
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