भाग- ९
छमिया- तो फिर पहले एक लाख रुपये मेरे एकाउंट में जमा करा सकते हो ? आज की तारीख में ?
मुंशीजी- इसका मतलब तुम मान गयी. आज मैं बहुत खुश हूँ. मेरे कदम जमीन पर नहीं पड़ रहे हैं. मैं तो पहले ही समझ गया था कि तुम्हारा और मेरा किसी पुराने जन्म का मेल है, बिछुड गए होंगे इसलिए इस जन्म में मिल रहे हैं. मैं अभी एक लाख रुपये तुम्हारे एकाउंट में जमा करने कि व्यवस्था करता हूँ, लेकिन फिर आज की रात सुहागरात होगी
छमिया- अगर तुम अपने वादे पर खरे उतारते हो तो मेरी तरफ से तुम्हें निराशा हाथ नहीं लगेगी. तुम्हें मालूम ही है, मैं भले ही मुंह से भौंकती रहती हूँ लेकिन हूँ तो दिल की साफ़. जो डील करूंगी सच्ची करूंगी, और हाँ,तुम भी अपने वादे से मत मुकरना , मेरे भाई –बहनों का भविष्य तुम्हारे हाथ है, उन्हें किसी अच्छे स्कूल में पढाने कि जिम्मेदारी तुम्हारी है.
मुंशीजी- ठीक है, इसकी व्यवस्था भी कल कर दी जायेगी.बढ़िया बोर्डिंग स्कूल में उनका दाखिला करा देता हूँ, उसने खर्चे और फीस आदि का इंतजाम भी करवा देता हूँ, लेकिन मुझे सिर्फ तुम्हारा तन ही नहीं मन भी चाहिए. सिर्फ मांस के लोथड़े के साथ खिलवाड करना मुझे पसंद नहीं, मेरी इच्छा है कि तुम मेरी दुल्हन की तरह रहो. मैं तुम्हारा ख़याल रखूँ और तुम मेरा ख़याल रखो.
छमिया-क्या तुम्हें लगता है कि यह सब इतना आसान है ? कोई किसीको बदन तो सौंप सकता है मगर मन और आत्मा के समर्पण के लिए तो कुछ समय चाहिए, बिना वक्त दिए यह संभव नहीं, अगर कोई दावा करे तो झूठा होगा. पहले मुझे समझाइये कि सेक्स क्या है ? प्यार क्या है ? इसे कैसे किया जाता है ? कैसे असुरक्षित सेक्स से तकलीफें होती हैं , कैसे नहीं होतीं ? जब तक मुझे विस्तार से नहीं बताओगे तब तक किसी दिल लेने कि बात वृथा है .
मुंशीजी समझ गए कि पहले उसको समझाना होगा, उसके मन में सेक्स को लेकर जो डर और भ्रान्तियां हैं उनको निकालना होगा , वरना वह तो यही समझेगी कि चुम्बन लेने से गर्भवती हो जाते हैं, जैसा कि वह इससे पहले सोच रहीए थी. उसने छमिया के सुर्ख लाल गालों पर एक चुम्बन जड़ते हुए मीठे शब्दों में कहा-
-तुम्हें डरने या घबराने कि कोई जरूरत नहीं है, मैं तुम्हारा प्यार चाहता हूँ, मैं मोहब्बत करने में विश्वाश रखता हूँ, बलात्कार करने में नहीं, जब तुम्हें ऐसा लगने लगे कि मैं तुम्हें चाहता हूँ और तुम्हारे तन –मन पर मेरा हक है, तभी तुम जिस्म समर्पित करना, उसी पहले नहीं, मैं तुम्हें यकीन दिलाता हूँ कि कभी तुम्हारे साथ जोर जबर्दस्तई नहीं के जायेगी, मैं तुम्हें इसके बारे में विस्तार से समझाउंगा, लेकिन हर रात तुम्हें मेरे साथ बितानी होगी. मैं इतना ही कह सकता हूँ कि जब तुम कहोगी तभी तुम्हारे साथ प्रणय क्रीडा करूँगा, बोलो मंजूर है ?
छमिया- ठीक है, मुझे मंजूर है , मगर हर रात तुम मेरे एक सवाल का जवाब दोगे ?
मुंशीजी- ठीक है, जितना मैंने सीखा है, और जितनी मेरी क्षमता है, मैं जरूर उतना बताने कि कोशिश करूँगा , म्साथ ही यह भी ध्यान रहे कि मेरे साथ धोखा बाजी नहीं चलेगी, जब मैं लाखों रुपये किसी कि जिंदगी बनाने में खर्च कर सकता हूँ तो उसे बर्बाद करने के लिए किसी भी हद से गुजर सकता हूँ.
छमिया- आज कह दिया सो कह दिया, आइन्दा मत कहना, मैं ऐ जो भी कह दिया सो कह दिया. छमिया अपनी जुबान कटवा सकती है लेकिन जुबान गिरा नहीं सकती, मैं अपना कुंवारा जिस्म अगर इस दुनिया में क्सीको समर्पित करुँगी तो वो तुम हो, तुम्हारे अलावा मेरे इस बदन से कोई स्पर्श बी ही नहीं कर सकता, चाहे मेरी जान ही क्यों ना चली जाए.
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Tuesday, January 19, 2010
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