Wednesday, January 20, 2010

भाग -10

भाग-१०
उसकी बातों से मुंशीजी को बड़ी तसल्ली हुई थी, दिल में आशाओं के फूल खिलने लगे, दरअसल छमिया ने अपनी बात इस अंदाज में कही थी कि उसको न मानने का सवाल ही नहीं उठता था. जब किसीको भरोसा हो जाता है तो फिर मन में शान्ति हो जाती है. ५० साल के ऊपर के मुंशीजी के जीवन में अब कुछ खास अभिलाषा नहीं थी, सिवाय इसके कि वे अब अपना आगे का समय चैन –सुकून के साथ गुजारें , और उन्होने जो दौलत कमाई थी उसमे से आधी तो अपने भाई को दे दें और आधी छमिया को. और वैसे भी उन्होंने अपने नाम तो बहुत कुछ जमा कर रखा था. उन्हें याद आने लगे वे दिन जब गाँव वालों को लूट –लूटकर धन संग्रह किया करते थे, उन्हें याद आने लगे वे क्षण जब उन्होंने लोगों के खेत , घर और प्लाट को बहुत कम रुपये में गिरवी रख लिया था. इस तरह लोगों का धन लूट-लूटकर उन्होंने करोड़ों की संपत्ति बना ली थी, उन्होंने छमिया से कहा-
-तुम्हारी बातों से मन खुश हो गया है, मैं अपनी खुशी का बखान नहीं कर सकता. मुझे तुम्हारी बातों पर यकीन है, तुम कोई भी सवाल करो , मैं तुम्हारे हर सवाल का जवाब दूंगा. मैन तुम्हारी बिना मर्जी के तुमसे कभी प्रेम नहीं करूँगा. एक बार मुझसे एक लड़के ने पूछा था-

लग गई है , जिसके कारण मेरा स्टडी में मन नहीं लगता है। पिछले कुछ दिनों से मुझे ब्लू फिल्म देखने की आदत सी लग गई है। जब तक दिन में एक या दो ब्लू फिल्म मैं देख न लूं , तब तक मुझे चैन नहीं आता है। मैं रोज़ इंटरनेट के जरिए एक या दो ब्लू फिल्म देखता हूं।

जब मैं स्टडी करने बैठता हूं , तो इस कारण मेरा मन उसमें बिल्कुल नहीं लगता है और मुझे नींद आने लगती है। मन आलस से भर जाता है और ब्लू फिल्म के दृश्य जहन में दौड़ने लगते हैं। इसके चलते मैं आजकल बहुत परेशान रहने लगा हूं। इस बुरी लत के कारण मेरा जीवन बर्बाद हो रहा है। मैं क्या करूं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। इस बुरी लत से कैसे पीछा छुटेगा और फिर मेरा मन पढ़ाई में लगने लगेगा ? मैं इस पर सुझाव चाहता हूं।
छमिया- फिर क्या कहा तुमने ? क्या तुम भी उसके समर्थन में थे ?
मुंशीजी- मैंने उसे बहुत समझाया , मगर माने तब न . आखिरकार कुछ दिनों बाद वह खुद ही सब कुछ समझ गया, आखिर जब जीवन बर्बाद होने लगा तो खुद ही अक्ल आ गयी.एक बार मैंने एक और युवक कि समस्या हल कर दी थी, उसने बताया था कि -

मेरी शादी दो साल पहले हुई थी। हम एक - दूसरे से बहुत प्यार करते थे। शुरू में हमारा वक्त बहुत अच्छा बीता। लेकिन बाद में कुछ लोगों ने मेरी बीवी को भड़का दिया। फिर हम दोनों में लड़ाई होने लगी।

किसी तरह मैंने उसे समझाया। हमारे बीच सुलह हो गई। उसके बाद मैं कुवैत आ गया। लेकिन मेरे आने के बाद उसका रवैया फिर बदल गया। बात - बात पर शिकायत। मैं उसे समझाता था , पर वह कुछ सुनने को तैयार नहीं होती थी। वह मुझसे तलाक चाहती थी। मेरे मना करने पर वह मुझे धमकी देने लगी।

दबाव में आकर मैंने फोन पर एक बार वह शब्द बोल दिया और वह मुझसे अलग हो गई। उसके बाद मैं बहुत परेशान रहने लगा। मेरी परेशानी को देखते हुए मेरे घर वालों ने मेरी दूसरी शादी करवा दी। लेकिन , मैं उसको नहीं भूल पाया। आज भी मैं उसको चाहता हूं। मैं उसे दोबारा लाना चहाता हूं। उसके बिना मैं मर जाऊंगा। क्या करूं , कुछ समझ में नहीं आ रहा।जानती हो मैंने उसे क्या बताया ?

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