Saturday, January 23, 2010

भाग-१२
छमिया- मुझे कुछ प्रेम के टिप्स चाहिए, आप तो खेले खाए खिलाड़ी हो, बहुत दुनिया देखी है. मैं सब कुछ जांउगी, उसके बाद तुम्हें इस अमृत रस का स्वाद चखने को मिलेगा.
मुंशीजी-इतना तडपना भी ठीक नहीं है, क्यों मुझे परेशान कर रही हो, मैं तरस रहा हूँ तुम्हारे यौवन का मजा लेने के लिए. साथ में तुम्हें भी इतनी खुशी दूंगा कि फूली नहीं समाओगी.
छमिया- मेरे लिए तो अभी जिंदगी पडी है , मुंशीजी. तुम अपनी बात कहो. तुम्हारी जीभ ही लार दाल रही है तो पहले मुझे उन रास्तों से वाकिफ कराओ जिन पर चलकर मुझे मंजिल तक पहुचना है.
मुंशीजी- जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा, मैं जो कहता हूँ वही करता हूँ या यूं समझिए कि बस उतना ही कहता हूँ जितना कि मैं कर सकता हूँ. मैं तुम्हें प्यार करने के तरीके जरूर सिखाऊँगा , कुछ प्रेम कहानियाँ भी सुनाउंगा और अपने नौभावों से भी अवगत कराऊंगा . ठीक है ? बोलो सबसे पहले क्या जानना चाहोगी ?
छमिया- तुम्हारा सबसे पहला प्रेम कौन था ? क्या वह अब भी मुलाक़ात करती है , क्या तुमने उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाये थे ?
मुंशीजी- उससे प्यार था या नहीं लेकिन इतना बताता हूँ कि मैंने एक अधेड औरत के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाये थे, या ये समझो कि उसने मुझे इसके लिए तैयार कर लिए था. मैं तो कुछ भी जानता ही नहीं था, इस सबसे अनजान था , लेकिन उसने मेरी जिस्मानी भूख को बढाने और फिर उसे शांत करने का काम किया. उसके बड़े- बड़े तीन बच्चे थे, वह ओर रंग कि खूबसूरत और थोड़ी सी मोटी महिला थी, जब वह हँसती तो उसके गालों में गड्ढे पड़ जाया करते थे, जिसने भी उसको हँसते हुए देख लिया वह उसका दीवाना हुए बिना नहीं रहता था, मुझे लगता है कि ज्यादातर कम उम्र की लड़कियों के साथ उम्रदराज पुरुष पहले जिस्मानी सम्बन्ध बना डालते हैं और कम उम्र की हसीं लडकियां हम जैसों के चक्कर में आ जाती हैं और अपना कुंवारापन समर्पित कर देटी हैं, यह इस तरह का चक्रव्यूह है .
छमिया- तो उस महिला के साथ तुमने शारीरिक सम्बन्ध कब बनाए ?
मुंशीजी- यह बहुत जल्दी हो गया था, वह महिला अचानक मुझे जजूस की दूकान पर मिल गयी, हलकी सी जान पहचान हुयी और जैसा कि मैंने बताया उसकी मनमोहक मुस्कान मेरा दिल ले गयी, बातों ही बातों में उसने मुझे घर चलने का ऑफर दे दिया. वे दो थीं, मैंने भी हाँ कहदी. गर्मियों का समय था , वह मुझे अपने किराए के छोटे से घर में ले गयी. वहाँ पर कोई भी मौजूद नहीं था, उसने मुझे बताया कि उसके बच्चे छुट्टियों में कहीं बाहर गए हुए हैं, उसका पति भी कहीं बाहर गया था,उन्होंने अपना खुद का घर बनाने के लिए एक प्लाट खरीदी थी, वह उसी के सिलसिले में बेचनी वाले से मिलने गया था. उस महिला ने मुझे ठंडा शरबत पिलाया और झुककर जब गिलास उठाने लगी तो उसका पल्लू सरक गया. मुझे उसके यौवन के उभार नजर आने लगे थे, मेरा दिल डोलने लगा , मैंने उसकी ख़ूबसूरती की तारीफ़ की तो वह मेरे पास बैठ गयी और उसने अपने खुले बालों को जब एक झटका दिया तो वे काली नागिन कि तरह बल खाने लगे. उसकी आँखें कंजी थीं, बिलकुल बिल्ली की तरह . जब उसने मुझे सर से पाँव तक घूरकर देखा तो मैं सहम गया. मैंने घर जाने की इजाजत माँगी तो उसने आराम करने का सुझाव दिया,जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार भी कर लिया. आखिरकार मैं लेट गया तो वह मेरे सर में तेल डालकर मालिस करने लगी , कुछ ही देर में मेरी सोने की इच्छा जागृत होने लगी लेकिन मैं आखी ऐसा कैसे कर सकता था. मैंने कांपते हाथों से उसके यौवन कि गोलाइयों को दबाना शुरू कर दिया.

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