जब घर आया तो हवेली के दरवाजे पर अजय को अपनी माँ दिखाई दी, आमतौर पर हमेशा उसकी माँ के होठों पर एक सौम्य मुस्कान नृत्य करती रहती थी , लेकिन आज हाल कुछ अलग था. आँखों की पुतलियों में लाल-लाल डोरे तैर रहे थे. अजय को अनुमान लगातार देर नहीं लगी की दाल में कुछ काला जरूर है , साहस से काम लेना था इसलिए एक गाना गुनगुनाता हुआ आगे बढ़ने लगा, वह अपनी माँ को नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाना चाहता था . लेकिन माँ ने थोड़ा सा कडककर पूछा -
- कहाँ से आ रहे हो ?
अजय- चन्दाबाई के कमरे से . मिलना गया था उनसे.
माँ- कारण जान सकती हूँ ? क्यों गये थे वहाँ? जानते हो न , वहाँ जाना वर्जित है.
अजय- एक कलाकार से मिलने में क्या तकलीफ है ? दुनिया आती है उनका खेल देखने , आपने तो इनको जगह भी मुहैया करा रखी है, फिर क्या परेशानी है ? मुझे पहले कभी नहीं पता चला की चंदाबाई से हम नहीं मिल सकते .
माँ- ठीक है, तब मालूम नहीं था , मगर अब तो जान गए, सारी दुनिया को आने दो, तुम नहीं जाओगे , जैसा हम कहते हैं वैसा करो. हमें सूचना मिलती है की तुम अपनी राह से कुछ भटकते जा रहे हो, चंदाबाई से मिलने गयी तो अंदर से दरवाजा बंद क्यों किया ? तुम नहीं जानते इन नाचने गाने वालियों को ? जादूगर होती हैं, जादू सा चला देती हैं. आदमी को वश में कर लेती हैं, ना बच्चा देखती हजें, और ना बूढा. बूढा हो या जवान , मोए ह्त्या से काम . ये हाल होता है इनका. बड़ी बेरहम होती हैं, दौलत पाने के लिए कुछ भी कर सकती हैं. इन्होने कितने ही धनासेठो को कंगाल बना दिया है. कितने ही राजाओं को भिखारी बना चुकी हैं, तुम मेरे इकलौते बेटे हो और काफी समझदार भी. इसलिए
साफ़-साफ़ बात करना जरूरी हो गया है . वरना सर से पानी उतर जाएगा.अभी तुम्हारी उम्र ही कितनी है , मेरे ख़याल से अभी दूध के दांत भी नहीं उखड़े होंगे. और अभी से अकेले में मुलाक़ात करनी शुरू करदी. जानते हो न हमारी समाज में कितनी इज्जत है ? आज यह बात सिर्फ मुझ तक्ल आई है. कल ना जाने कितने लोगों तक सुनाई देगी. हम तो जी ते जी मर ही जायेंगे. किसको क्या जवाब देंगे ? शुक्र मानो अभी तक तुम्हारी बाबूजी कुछ नहीं जानते वरना प्रलय आ जाती अजय- मैंने कोई गुनाह नहीं किया, मैंने किसीके घर चोरी नहीं की. किसीका गला नहीं काटा , तो आपकी बेइज्जती कैसे हो जायेगी ? मैं भी आपसे सब कुछ साफ़-साफ़ बात कर लेना चाहता हूँ. ताकि आप किसी भ्रम में न रह पायें.
माँ- अच्छा . तो अब माँ से जुबान लड़ाई जा रही है. ये होता है बेटे का दायित्व ? इसलिए तुम्हें इतने नाजो अंदाज से पाला , ताकि बड़े होकर हमारे मुंह लग सको ?
अजय- ये बात नहीं है माँ. मैं माफी चाहता हूँ. आपका दिल नहीं दुखाना चाहता , लेकिन जो इस वक्त मेरे दिल में हो रहा है, वह आपको बताना चाहता हूँ. मैं नहीं चाहता की आप मुझे गलत समझें. इसलिए यह कहना चाहता हूँ की चंदाबाई बहुत अच्छी महिला है, मैं उससे प्रेम करने लगा हूँ और इसीका इजहार करने उनके पास गया था, मगर उन्होंने अस्वीकार कर दिया, मैं उनको मनाने की कोशिश कर रहा हूँ. चंदाबाई के साथ यह जीवन जीना चाहता हूँ .
माँ- ये क्या कह रहे होम बेटे , तुम्हारी माँ का कलेजा फट जायगा .ऐसा जुल्म न करो बेटे . ये तुम किस जुर्म की सजा दे रहे हो ? मुझसे कोई भूल तो नहीं हुई , जिसकी वजह से नाराज हो ? अरे वह बूढ़ी है . मुझसे भी भी बड़ी है उम्र में ? तुम्हारी दादी की उम्र की है, उससे शादी करने के बारे में तुम सोच भी कैसे सकते हो ?
अजय- मुझे माफ करदो माँ. मैं यह निश्चय कर चुका हूँ की शादी करूँगा तो सिर्फ चंदाबाई से , वरना किसीसे नहीं करूँगा.
माँ- अगर तुम कहोगे तो एक से बढ़कर एक लड़कियों की लाइन लग जायेगी. तुम्हारी बाबू जी ने बस ये जिक्र भर भी कर दिया ना की हम अपने बेटे का रिश्ते लेने की तैयारी कर रहे हैं तो सकड़ों ऑफर आने लगेंगे . यकीं नहीं आता तो कल ही देखलो. मैं कल ही तुम्हें दिखा देती हूँ, कई लड़कियां तो मेरी नजर में भी हैं. तुम्हारे चचेरे भाई के ससुर कितनेपैसे वाले हैं, अब तो विधायक भी बन गए हैं. उनकी पोती माला को देखा है तुमने , कितनी सुन्दर है, जब हँसती है तो गालों में गड्ढे पड़ते हैं. वे कबसे तैयार हैं. खूब दान दहेज भी देने को तैयार हैं. कल उन लोगों को बुलाऊँ क्या ?
Monday, March 29, 2010
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