Sunday, March 21, 2010

भाग-40

जो मैंने चाहा वो मुझे नहीं मिला। मैं मंजिल के करीब तो पहुँची लेकिन मंजिल तक नहीं पहुँच पाई। मैंने जीवन में जिसको चाहा वह कंधा मारकर निकल गया। मेरे अभावों के उडनदस्ते उन्हे कभी पकड़ नहीं पाए, यह कैसी भूल भुलैया है, यह कैसी विडंबना है ? यह कैसा जुल्म है जो हर बार सिर्फ मुझ पर ही ढाया जाता है, जबकि मैं पूरी तरह से निर्दोष हूँ, आज तक मैंने कभी किसीका दिल भी नहीं दुखाया। चींटी तक को तकलीफ नहीं दी, आज जबकि तुम मुझे प्यार दे रहे हो, इतना सम्मान दे रहे हो, यह सम्मान नहीं तो और क्या है ? मैं तुम्हारे चरणों की धूल, और तुम आकाश पर खिलते हुए सबसे हसीं फूल हो। मेरा तुम्हारा कोई मेल नहीं है। इसके बावजूद अगर तुम मुझे जिंदगी भर अपनाने की बात करते हो तो यह गर्व और गौरव की बात है । यह सच है की मैं भी तुम्हारा बहुत आदर करती हूँ। अगर तुम मुझसे उम्र में छोटे हो तो मुझे कोई एतराज नहीं है। अगर तुम मुझसे बड़े भी होते तब मेरे लिए कोई खास बात नहीं होती। क्योंकि मैं भी तुम्हारे जैसे विचार रखती हूँ। मैं भी इस बात को मानती हूँ की मोहब्बत में उम्र जाती, धर्म , स्थान आदि नहीं देखे जाते।मैंने विनीता की एक कविता पढ़ी थी , जिसमे था की प्रेम एक अनुभूति है शाश्वत रिश्तों के मर्म की सुर्ख जोड़े में लिपटे गर्व की विरक्ति से उपजे दर्द की प्रेम अनुभूति है। प्रेम एक रिश्ता है दिलों के इकरार का ममत्व के दुलार का मानवता की पुकार का प्रेम एक रिश्ता है। प्रेम दिखता है किसी मासूम-सी मुस्कान में नवविवाहिता की माँग में वीरों की आन-बान में प्रेम दिखता है। प्रेम की अनुगूँज है दिल के झंकृ‍त तारों में बागों में बहारों में फागुन की मस्त फुहारों में प्रेम की अनुगूँज है। मैं भी इस धर्म यानी प्रेम के धर्म को श्रेष्ठ मानती हूँ. लेकिन हालात ऐसे हो चुके हैं की मैं कुछ खास नहीं कर पाउंगी .
अजय- सब कुछ कहते हुए भी कुछ कहने को तैयार नहीं हो। मैं सिर्फ तुम्हारी कला का ही कद्रदान नहीं हूँ बल्कि तुम्हें अपनी जीवन संगिनी बनाना चाहता हूँ, तुम मेरे दिल में बस चुकी हो मेरी आत्मा पर अधिकार जमा चुकी हो , अब ऐसा नहीं हो सकता की तुम्हें भूला जा सके। ये संभव ही नहीं है। बात बहुत आगे निकल चुकी है। अब मैं प्यार के इस दरिया में या तो डूब जाउंगा या फिर सबको डुबो दूंगा।
चन्दा- प्यार से सब कुछ नहीं होता। कुछ करना भी पड़ता है। जीवन में बहुत कुछ होता है प्यार के सिवाय। अगर हम कोई बिजनेस नहीं करेंगे तो खाने के लिए कहाँ से आएगा ? अगर हम कोई काम या नौकरी नहीं करेंगे तो घर की जरूरतें कैसे पूरी होंगी ? अब तुम ही ये कहो कि प्यार का यह भूत कहाँ तक उचित है? और वो भी इस उम्र में ? पहले तुम अपनी पढाई पूरी करो,। फिर अपने कैरियर पर ध्यान दो , उसके बाद हम कुछ सोचेंगे ।
अजय- मंजूर है मगर तब तक तुमने किसी और से शादी कर ली , या इस बीच तुम्हें कोई और पसंद आ गया तो मेरा क्या होगा ? अगर मैंने अपना कितना भी सुनहरा कैरियर बना लिया तो किस काम का ? आखिरकार मैं मेरा तो सब बेकार ही चला जाएगा न । तुम हो तो सब कुछ है , तुम नैन तो कुछ नहीं। मेरे लिए तो तुम्हीं सब कुछ हो। मैं मेहनत मजदूरी करके भी घर का खर्च चला सकता हूँ, मुझे न तो पिता की दौलत पर गर्व है , ना ही मुझे चाहिए। मुझे इस बात से भी मतलब नहीं की तुम नौटंकी की मालकिन हो तो तुम्हारे मेहनताने पर नजर रखूंगा। मैं अपने पैरों पर खडा होकर स्वाभिमान का जीवन जिऊँगा। तुम्हें भी हर खुशी दूँगा,। चाहे मेरे खून का कतरा -कतरा बिक जाए मगर मैं तुम्हें कभी कोई कमी नहीं छोडूंगा। यह मेरा वादा है।
चंदा- जब मैंने आज तक किसीको नहीं चाहा। अब तक मैंने किसी से शादी नहीं की तो अब क्या करूँगी। तुम निश्चिन्त रहो, भरोसा करो मेरी जुबान पर । अगर मैं किसी से शादी करुँगी तो
सिर्फ और सिर्फ तुमसे ,। तुम्हारे अलावा मैं अपने इस जिस्म को किसीको छूने भी नहीं दूंगी। आअज से और अभी से इस पर अधिकार समझो , लेकिन पढाई पूरी होने के बाद ही तुम इसको स्पर्श कर पाओगे।
चन्दा की बातों ने अजय के जिस्म में गर्मी सी भर दी , वह उससे लिपट गया और उसको अपनी बाहों में भरकर उसके गालों में चूमने लगा। इस वक्त चन्दा उसकी बांहों में कसमसा रही थी।







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