कहीं वह स्वार्थी तो नहीं हो गया ? अगर उसे वह चाहता है तो फिर उससे कोई उम्मीद क्यों करता है ? वह तो कलाकार है । उसकी अदाकारी से लाखों लोगों को सुख मिलता है। कितने ही लोग उसके डायलोग पर तालियाँ बजाते हैं। और ऐसे कितने ही लोग हैं जो उसके नृत्य के दीवाने हैं। फिर ऐसे में वह उस पर एकाधिकार क्यों जमाना चाहता है ? अजय का दिमाग बड़ी तेजी से काम कर रहा था । और वह सोच रहा था की जरूर उससे कोई गलती हुई है, या हो रही है । इस तरह की प्रतिभाओं से किसी एक व्यक्ति को ऐसी कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए । अगर इस तरह की परम्परा रही तो फिर कला का सम्मान नहीं अपमान कहलायेगा। उसने अपने मन को तोलना शुरू कर दिया,। उसने अपने फैसले पर फिर से गौर करनी शुरू कर दी। यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात थी जिस उम्र में पढ़ने के बारे में विचार होना चाहिए उसमे अजय प्यार मोहब्बत की व्याख्या कर रहा था, यह उम्र का बेहद इर नाजुक मोड था। ऐसे वक्त में दिमाग ने भी अजय को अकेला छोड़ दिया। दिल भी बेहाल था। कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे, क्या चन्दा को एक और चिट्ठी भिजवानी चाहिए । उसने एक बार फिर से अपने दोस्त अहमद की सेवा लेने का निर्णय कर लिया। अपने नौकर को भेजकर उसने तुरंत अहमद को बुलवाया। अहमद का चेहरा पीला पड़ा था। कारण पूछने पर बताने लगा-
-सब कुशल मंगल तो हैं ? तेरे थोपडे पर ये १२ क्यों बजे हैं ?
अहमद- बात दरअसल ये है की रात बहुत जोर का बुखार आया , पहले सर्दी लगी और फिर ऐसा बुखार की मेरा पूरा बदन ही तोड़ डाला। मैं तो सुबह ही तेरे पास आने वाला था लेकिन क्या करू, उठ ही नहीं पाया। यह बहुत खतरनाक होता है यार । तू सूना , कोई जवाब आया की नहीं ?
अजय- उसकी छोड़ , तू अपनी सुना। दवा ले ली है की नहीं ? तू बहुत ही आलसी है , इसलिए पूछ रहा हूँ, तू ठहर । मैं अभी अपने वैध को बुला लेता हूँ। किसी से मैसेज तो भिजवाना था। मैं आ जाता ।
अहमद- मैंने काढा पी लिया है, तू बिलकुल फ़िक्र न कर। मुझे चंदाबाई के बारे में बता।
अजय- अपने मौसी के लड़के को सारी बात सुनाकर एक चिट्ठी और लिखवा । मैं बहुत बेचैन हूँ, पढ़ने में जी नहीं लगता। हर जगह पर चन्दा ही चन्दा दिखाई देती है।खाना-पीना कुछ नहीं भाता । बस उसीसे मिलने की इच्छा रहती है। कभी-कभी तो ऐसा महसूस होता है जैसे अगर चन्दा नहीं मिली तो शायद मेरे प्राण ही निकल जायेंगे।
अहमद- चुप कर अहमद। ऐसा कुछ न बोल। यह अच्छी बात नहीं है। एक महिला दोस्त के लिए जान देने की बात करता है । हमारे बारे में ज़रा भी नहीं सोचता , कैसे जिऊँगा तेरे बिन ?
अजय- हाँ, यार । मुझे ध्यान है । सब ध्यान है । चिंता क्यों करता है , मैं जल्दी से मरने वाला नहीं हूँ। तुम लोगों को खूब दुःख देकर ही मारूंगा। इसी तरह तुम्हें चिट्ठियां लिखनी होंगी। ऐसे ही पापड बेलने होंगे । मैं क्या करू जब तुम्ही यह सब झेलना चाहते हो ?
अहमद- मंजूर है मेरे दोस्त ॥ खुदा तुझे सदा सलामत रखे। तेरे सारे गम मैं खुद उठाने को तैयार हूँ।
अजय ने उसे अपने गले से लगा लिया। उसका प्यार देखकर अजय भाव विभोर हो गया। दोनों की आँखों से आंसूं टपकने लगे। यह बहुत ही मार्मिक द्रश्य था। सच्चे दोस्तों का सच्चा मिलन था। भरे गले से रुंधी हुई आवाज में अजय ने कहा-
- मैं किस्मतवाला हूँ जो तुम जैसा अच्छा दोस्ती मिला। जब तुम मेरे साथ हो तो मुझे कौन हराने वाला है, कौन है जो मुझसे मेरी प्रेमिका को छीन सकता है ? चन्दा डर रही है। डर के मारे वह मेरा प्यार नहीं स्वीकार रही ?
अजय सोचने लगा और अहमद अपने मौसी के लड़के से पत्र लिखवाने चला गया। अजय के सामने चंदा का मुस्कराता हुआ चेहरा घूमने लगा, कितनी खूबसूरत है उसकी प्रेमिका। कितनी मीठी आवाज है, बिलकुल कोयल जैसी । अगर वह उसे नहीं मिली तो जीवन में कितना अधूरापन होगा ? और अगर चन्दा उसकी आबं जाती है तो जिंदगी कितनी सुन्दर , कितनी सुखद और कितनी आसान हो जायेगी ।
Tuesday, March 9, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment