रात भर जाग-जागकर उसने जो डायलोग याद किये थे, वह उनको एक ही झटके में भूल गया। जैसे ही वह चन्दा के कमरे के सामने पहुंचा उसकी तो जैसे सिट्टी पिट्टी ही गुमहो गई। उसकी जुबान हलक में ही फंसकर रह गई। यह बड़ी अजीब विडंबना है कि जब कोई नया-नया प्यार करता है तो अपने चाहने वाले को ठीक से बता ही नहीं पता। सही तरीके से इजहार न करने के कारण लाखों लोग अपने चाहने वालों को अपना जीवन साथी नहीं पाते। चन्दा आराम से लेट रही थी और अजय उसके कमरे के बाहर अपने होठ काट रहा था। हिम्मत जुटाकर आखिरकार उसने आहिस्ता से दरवाजा खटखटाया । कुछ पलों के बाद दरवाजे पर चन्दा आकर खडीहो गयी। अजय का मूड खुश हो गया। उसने अभिवादन किया और चन्दा भी मुस्कराते हिये रास्ता छोड़कर अलग हट गयी। चन्दा से उसे आदर के साथ बिठाया और खुद फ्रेश होने चली गयी। यह कैसी हालत हो गए थी उसकी। कहाँ तो अपने प्रेमी के आने पर सोलह सिंगार किये जाते हैं, सज धजकर उसके सामने जाया जाता है , मगर यहाँ कहानी उलटी ही थी। चंदा सोकर जागते ही उसके सामने उपस्थित हूई थी ताकि अजय उसका बिना मेकप किया चेहरा देखे और फिर उससे नफरत करने लगे। वह चाहती थी कि अजय खुद ही उससे दूर हट जाए , क्योंकि उसके प्यार को ठुकराकर वह अजय का दिल नहीं दुखाना चाहती थी और उसके प्यार को स्वीकार कर वह अजय के माता पिता कि बुराई नहीं लेना चाहती थी। चन्दा अपने जीवन के सबसे उलझे हुए और बुरे दौर से गुजर रही थी । वह चाहकर भी अजय को अपना नहीं सकती थी, जबकि अजय जैसा प्रेमी हर किसीको नसीब नहीं होता। न जाने कितने पुन्य किये होंगे तब जाकर उसे अजय जैसा सुन्दर , सुशील, समझदार और टूटकर चाहने वाला सच्चा प्रेमी मिला था।जीवन में कभी -कभी ऐसे पल भी आते हैं जब मंजिल हमारे सामने होती है और हम एक कदम भी नहीं बढ़ा पाते, और फिर हम मंजिल से इतनी दूर धकेल दिए जाते हैं कि बाकी कि पूरी जिन्दगी उसे पाने के लिए तरसते रहते हैं, छटपटाते रहते हैं। अगर चन्दा को भी अजय नहीं मिला तो क्या वह उसे जीवन कि अंतिम सांस तक भूल पाएगी। इन्ह्नी ख्यालों में खोयी चन्दा अपने किचन में चाय बना रही थी, उसके साथ सूखे पत्ते से काँप रहे थे, बेखयाली में उसने चाय कि पत्ती कि जगह पिसा हुआ नमक दाल दिया। और जब चाय तैयार हूई तो वह दो प्याले लेकर हाजिर हूई। एक प्याला उसने अजय कि तरफ बढ़ा दिया और खांसकर बातचीत कि शुरुआत करते हुए बोली-
-कलाकार स्टेज पर ही अच्छे दीखते हैं, आम जीवन में नहीं , मेरी सूरत देखकर आपको हैरत हो रही होगी। क्योंकि नौटंकी कि बात अलग है। वहां पर सिंगार करके रहना पड़ता है, बड़ी चमक-दमक होती है। उस भूल भुलैया में कलाकारों पर न जाने कितने लोग फ़िदा हो जाते हैं, न जाने कितने युवा दिल दे बैठते हैं। अब एक कलाकार एक हजार लोगों के साथ तो जीवन नहीं बिता सकती। समय ख़त्म होने पर वह अपने घर चली जाती है और सब कुछ भूल जाती है। मेरी असलियत जानते हो, शायद नहीं। मैं ५० साल से ऊपर कि हूँ। अगर बैल ब्याहेगा नहीं तो क्या बूढा भी नहीं होगा । भले ही हमारी शादी नहीं हूई मगर हड्डियाँ तो बूढी हो चुकी हैं। आप खूबसूरत हैं, नौजवान हैं, आप पर तो सकदों लडकिय जकां छिड़कती होंगी, आपने उनमे से कोई पसंद नहीं की ?
अजय- पसंद का मामला ऐसा है कि प्यार किया नहीं जाता, यह हो जाता है । और जिससे हो जाए उसकी उम्र नहीं देखता। आप कितने साल की हैं , कहाँ की रहने वाली हैं, किस जाती या धर्म की हैं, इससे मुझे कोई लेना देना नहीं हैं। मैं बस इतना जानता हूँ कि प्यार इस सबसे बड़ा होता है। सबसे ऊपर होता है। मैं त्युम्हें अपनी बना चुका हूँ। सुन्दरता मेरी आँखों में हैं , इनमे झांककर देखो, तुम्हें अपना ही प्रतिबिम्ब दिखाई देगा । ध्यान से देखना वह कितना सुन्दर प्रतिबिम्ब है। स्वर्ग कि परियां भी उसके आगे फेल हैं।
चन्दा- तुम भावुक हो रहे हो, वरना पत्थर को हीरा समझने कि गलती नहीं करते।
Friday, March 19, 2010
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