और अब वह बोलते- बोलते हकलाने लगी थी, जीभ लड़खडाने लगी थी... सलीम समझ गया की वह पहले से ही खा- पीकर टुन्न है, इस कारण उसने भी जाम से जाम टकराना शुरू कर दिया...
सच और झूठ में जमीन -आसमान का अन्तर होता है , मगर दिखाई बहुत कम देता है... सलीम के साथ भी यही सब हो रहा था... उसे मोहब्बत और जिस्मफरोशी में कुछ ख़ास अन्तर नजर नहीं आ रहा था... आर्थिक रूप से वह बुरी तरह टूट चुका था... उसके पास इस समय कुछ भी नहीं बच्चा था, जितना था वह भी खर्च होता जा रहा था... उसका प्लस पॉइंट यही था की वह नौकरी के साथ -साथ बिजनेस भी करता था और इसी कारण उसकी आमदनी अच्छी खासी होती रहती थी...अगर यह आमदनी कम होती तो इतनी अय्याशी वह कभी नहीं कर पातास्वीटी अपनी अदाओं के जलवे बिखेरने में कोई कसरनहीं छोड़ रही थी... वह कामोत्तेजक बातें करती थी ताकि सलीम जल्दी से कामोत्तेजना के शिखर पर पंहुच जाए और फ़िर मंजल पर पहुचकर वह चैन की नींद सोये... उसे बात का भी इल्म था की वह एक या दो बार से ज्यादा सुख नहीं भोग पाता था...सलीम को स्वीटी ने बहुत सी ऐसी बातें बताई थीं जिससे वह उत्तेजक हो गया था , अपना रॉब गालिब करने के लिए उसने भी बताना शुरू किया-
- तुम सेक्स के बारे में कितना जानती हो ?
स्वीटी- हिसाब से देखा जाए तो मैं अभी तक स्टूडेंट ही हूँ... सीख रही हूँ... तुम कुछ डिटेल बता सकते हो...
सलीम-मैंने टीवी में एक डॉक्टर की वार्तालाप सुनी थी... मैं तुम्हें बताता हूँ...सेक्स जीवन की सांस के साथ उस समय से जुड जाता जब व्यक्ति बचपन से युवा उम्र में प्रवेश करता है... यही वह समय है जब व्यक्ति को इस विषय पर सही जानकारी मिलनी चाहिए ... सेक्स के बारे में लोगों में अनेक भ्रांतियां बनी हुई हैं... अगर सही ढंग से चिकित्सीय सलाह दी जाए तो सेक्स रोगों में कमी आ सकती है ....
स्वीटी - यह भी कोई ख़ास बात हुयी , सब जानते हैं इस बात को ... कुछ विशेष हो तो कहो ...
सालिम-परिवर्तन और सेक्स के बारे में कथा हूँ, हाई टेक्नोलोजी के चलते न सिर्फ इंटरनेट और मोबाइलका इस्तेमाल बढा है, बल्कि लोग पहले से ज्यादा एकदूसरे से चैटिंग के जरिए अपने दोस्त विदेशों तक में बना रहे है... इन सब के पीछे उन के दिल में छिपी यौन कामना ही ...लेकिन उन के बेसिक ज्ञान का स्तर लगभग शून्य होता है .... जिस की वजह से युवाओं का एक बडा वर्ग घीरे-घीरे मानसिक अवसाद का शिकार होता जा रहा है ...पिछले कुछ सालों में मानसिक चिकित्सकों के पास सेक्स के मामलों में काफी वृद्घि हुई है .... आश्चर्यजनक बात यह है कि लोगों में ही नहीं बल्कि कई डाक्टरों में भी यह भ्रांति है कि जिस पुरूष के अंग का साइज बडा होगा और जिस महिला के ब्रेस्ट बडे होंगे उन्ही के साथ अच्छा सेक्स .... यह बात पूरी तरह से गलत है, क्योंकि पुरूष के अंग का टौप ही संवेदनशील होता है और महिलाओं में अंग का बाहरी 1 इंच का हिस्सा ही संवेदनशील होता है ... सारी क्रियाएं इसी पर निर्भर होती है.....साइज का कोई महत्तव नहीं है....बाजार में मिलने वाली सेक्सवर्घक दवाएं, स्प्रे, इत्यादि किसी प्रकार का इफेक्ट नहीं करतीं और जब इफेक्ट नहीं करती हैं तो साइड इफेक्ट भी नहीं होता है... स्वपदोष, घातु, हस्तमैथुन आदि प्रकियाएं स्वाभाविक है, कोई रोग नहीं हैं। दौरा, हिस्टीरिया, डिप्रेशन आदि बीमारियों के लिए सेक्स एक उचित इलाज ये है की कई बार ऎसा देखा गया है कि यदि महिलाएं सेक्स क्रिया में संतुष्ट नहीं हैं तो अवसाद में घिर जाती हैं.... पुरूषों में 68 वर्ष की उम्र तक सेक्स क्रिया में कोई कमी नहीं है...यदि पति-पत्नी निरंतर क्रिया करते रहे हों तो पुरूषों में प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना बिलकुल कम हो जाती है.... कुछ लोगों का मानना है कि शराब सेक्स पावर बढाती है जबकि नशा ब्रेन सेक्स सेंटर को प्रभावित करता है और आप किसी लायक नहीं रह जाते ....
स्वीटी - मुझे हैरत होती है की इतना जाने के बावजूद भी तुम शराब पी लेते हो ...
सालिम- तुम ऐसे कह रही हो जैसे दूध पीने वाली शरीफ बच्ची हो..
स्वीटी-पीना मेरी मजबूरी है... इसके बिना मैं रह नहीं सकता... सच्चाई तो यही है... हाँ धीरे -धीरे कम जरूर कर सकता हूँ... फ़िर बाद में एक दिन ऐसा भी आएगा की इसे पूरी तरह त्याग भी दूंगा...
Sunday, September 20, 2009
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