Monday, September 14, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-52

सलीम जानता था की यह सब सिर्फ़ नशे के कारण ही नहीं हो रहा बलिक नशे की आड़ भी ली जा रही है... वह सबा और फरहा के इतने आजाद ख्यालों से खुश कम और भयभीत ज्यादा था, उसको इस आज़ाद्खायाली से साजिस की बू आ रही थी... मगर यह भी सच्चाई थी की सलीम इस समय पूरी तरह से नशे की गिरफ्त में था, आमतौर पर वह एक क्वार्टर तक ही पिया करता था , और आज तो उसने सारी सीमायें ही तोड़ डालीं, दो पव्वा निगलकर भी वह पूरे होशो हवास में होने का दावा कर रहा था, फरहा बाथरूम गयी थी, अब पलंग पर सिर्फ़ सबा और सलीम मौजूद थे...सलीम भावुक हो रहा था... उसकी पकड़ में सबा जैसी चंचल और तितली जैसी लड़की का खूबसूरत जिस्म था... यह एहसास करते ही वह और भी कामुक हो उठता था... वह उसके यौव्नान्गों को स्पर्श करना चाहता था लेकिन झिझक रहा था... पहले तो सबा मुस्कराती रही, इन्तजार करती रही , फ़िर जब असली जड़ उसकी समझ में आई तो कहने लगी-
-यह कितना सुखद इत्तेफाक है जीजू, तुम और हम अकेले हैं, शराब और जवानी से सराबोर हैं... फ़िर भी दोनों खामोश हैं, साली तो आधी घरवाली होती है... फ़िर ये शर्मो हया कैसी , ये झिझक कैसी ? औपचारिकता के इस बंधन को तोड़ना होगा... वरना फ़िर ऐसी सुहानी रात कभी नसीब हो न हो ...
सलीम- मजबूरी की बेडियों ने मुझे जकड रखा है...तुम्हारी बहन से मैं मोहब्बत करता हूँ... मैं उस पर अपनी जान भी न्यौच्चावर कर सकता हूँ... अगर वह मुझे और तुहें आपत्तिजनक अवस्था में देखेगी तो क्या सोचेगी, क्या बीतेगी उस पर ? वह मेरे साथ जीवन निर्वाह करना चाहती है... मेरा भरोसा टूट जाएगा...
उसकी बात सुनकर सबा इतनी जोर से हंसी, जैसे उसने किसी नादाँ बच्चे के मुख से कोई बात सुनली हो... बोली-
- कौन सी दुनिया में हैं आप ? ये पहले वाला युग नहीं है... अगर मैं और तुम मिलकर खुशी के कुछ क्षण बिता सकते हैं तो इसमे फरहा को क्या एतराज हो सकता है... तुम्हें भी सुख हासिल होगा और मुझे भी संतुष्टि मिल जायेगी, दीदी को भी यह संतोष होगा की उसकी वजह से हम इन सुनहरे क्षणों को भोग पाये... यह कोई अनहोनी नहीं बल्कि एक सामान्य सी बात है... जिसका आजकल प्रचलन है....
सलीम- मैंने नहीं सोचा था , ज़माना इतना आगे बढ़ गया है... मुझे सचमुच हैरत है...
सबा- इसमे हैरत की कोई बात नहीं है... अब ज़माना शोर्ट कट अपनाने लगा है... मैं समझाती हूँ... देखो , किसी भी तरह से तुम अकेली दीदी के भरोसे तो रहने वाले हो नहीं... बाहर किसी न किसी लड़की से सम्बन्ध बनाओगे ही चाहे टेस्ट बदलने के लिए हो या किसी और वजह से... सही है या ग़लत ? ऐसे में अगर मेरी दीदी अपने सामने ही तुम्हारा टेस्ट बदल डाले तो इसमे बुराई क्या है , इससे तुम दोनों में प्यार बढेगा, एक दूसरे के प्रति समर्पण की भावना बढेगी...जो कुछ रहेगा , आईने की तरह साफ़ रहेगा...
सलीम- वाह , मान गए सबा... भले ही तुम उम्र में छोटी हो मगर तुम्हारा जवाब नहीं है...बहुत अच्छी तरह से समझाना जानती हो तुम...
फरहा क्या कहती, कातिल मुस्कान बिखेरने लगी... सलीम ने उसकी कड़क गोलाइयों को स्पर्श कर दिया, अब वह अपने असली तेवर दिखने में जुटा था... उसके मन में अभिलाषाओं का तूफ़ान उठने लगा, उसे अथाह सुख की अनुभूति हो रही थी, वह फरहा के कपड़े उठाने लगा, उसके सुख होठों को चूमने लगा... सबा व्याकुल होने लगी... उसका नग्न शरीर देखकर सलीम के होश गम होने लगे, बेहद सुंदर थी सबा... सलीम ने तारीफ़ की...
- तुम तो स्वर्ग से आई हुई अप्सरा लग रही हो... तुम्हारा कोई जवाब नहीं है...
सबा- मैंने कहा था न घायल हो जाओगे मेरा हुस्न देखकर...
सलीम- सिर्फ़ घायल नहीं , तुम तो कत्ल कर चुकी हो पहले वाले सलीम का, अब मैं एक नया सलीम हूँ... तुम्हारे जिस्म और हुस्न का मुरीद...
सबा- रहने दीजिये, इतनी तारीफ़ ठीक नहीं है... वो सुन रही होगी तो क्या सोचेगी...
सलीम- उसके सामने कहूँगा तो प्यार बढेगा , पारदर्शिता बढेगी, समर्पण की भावना बढेगी...
सबा- टीचर हो इसलिए हाजिरजवाब हो, मुझे ऐसे ही लोग पसंद हैं...
सलीम- बहुत कम उम्र में ही बहुत ज्यादा स्वाद चख चुकी हो, ऐसा लगता है...
सबा- दूध के धुले तुम भी नहीं हो... पहले गाँव में शादी , फ़िर मेरी दीदी को फंसाया और अब मेरी जवानी का रस चखने के लिए तैयार हो... क्या भूल पाओगे मुझे ?
सलीम- हरगिज नहीं ... सम्भव ही नहीं है... लेकिन तुम्हारे लिए तो यह सब खेल है, मौज मस्ती है...

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