- क्या हो रहा है , किसको दुनिया से हटाने का प्लान बनाया है ? आज तो बिजली नहीं डायरेक्ट क़यामत बरपाने का काम कर रही हो। सच दीप्ति, तुम तो तुम्हारी दीदी से बी ही खूबसूरत लगती हो।
दीप्ति- रहने भी दो क्झूथी तारीफ़, सब जानते हैं हम। आज जब दीदी यहाँ नहीं है, इसलिए तुम ये मीठी-मीठी बातें बना रही हो वरना उनके सामने तो भीगी बिल्ली बन जाते हो, एक बोल तक नहीं फूटता . देखते तक नहीं।
मजनूँ- अच्छा जी , ये शिकायत है ? तब तो ठीक है, आज से हम सिर्फ़ और सिर्फ़ तुमको ही देखा करेंगे... विदेश में कोई यार दोस्त बनाया की नहीं ? सूना है बहुत खुलापन है वहां ?
दीप्ति- दोस्त तो बहुत सारे थे मगर अपनापन कहाँ , अपना तो अपना ही होता है। तुम ठहरे अपने।
मजनूँ- ठीक कहती हो यार , मैंने कभी ध्यान ही नहीं दिया. गलती मेरी है , अब इस गलती में सुधार कर लूँगा।
और इसके बाद तो मजनूँ ने बाकायदा दीप्ति को अपने बाहुपाश में जकड लिया और उसके होठों पर एक चुम्बन जड़ दिया, हतप्रभ रह गयी दीप्ति। उसे अपने आपको छुडाने का असफल प्रयास किया मगर यह नाकाफी साबित हुआ। दीप्ति कसमसाने लगी , अपने आपको छुडाने की गुहार लगाने लगी-
- मुझे छोड़ दो प्लीज, कोई देखेगा तो क्या कहेगा।
मजनूँ- कोई कुछ नहीं कह पायेगा। आज की रात यहाँ पर सिर्फ़ हम और तुम हियो रहेंगे, अब जब तक तुम्हारी दीदी अस्पताल में है तब तक हम जीजा साली मौज मनाएंगे।
दीप्ति - दीदी बहुत खतरनाक है , जब उसे पता चलेगा की तुमने मेरा चुम्बन लिया था तो वह तुम पर और मुझ पर शक करने लगेगी। जानते हो क्या होगा इसका अंजाम ?
मजनूँ- तुम सिर्फ़ चुम्बन की बात करती हो । अब वह सब होगा जो तुम्हारी दीदी और हम किया करते थे।
दीप्ति- छि... शर्म नहीं आती तुम्हें?
मजनूँ- इसमे शर्माने की कौन सी बात है, मैं तो तुम्हारा अपना ही हूँ ना... अपना दोस्त समझो मुझे ।
दीप्ति- मुझे बहुत डर लग रहा है। तुम्हारी आंखों में लाल- लाल डोरे दिखाई दे रहे हैं। कहीं शराब पीकर तो नहीं आए ? मुझे कुछ इसी तरह का डाउट हो रहा है।
मजनूँ- जब तुम जैसा मयखाना सामने हो तो नकली माय से कौन हाथ लगायेगा।
दीप्ति- इसीलिए लोगों ने मजनूँ नाम रखा है तुम्हारा , मजनूँ जैसी बातें जो करते हो।
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