Saturday, September 19, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग -56

नाश्ता करने के बाद खाना खाने की बारी आयी, तीनों ने एक साथ खाना लिया... वे खूब खुश हुए... तीनों अब एक ही परिवार की तरह रह रहे थे... मन में आशाएं थीं, उमंगें थीं और भविष्य के लिए नई - नई योजनायें भी... सलीम अपने प्यार पर खुश भी था और भ्रमित भी... उसे थकान का अनुभव हो रहा था... सबा और फरहा उसे अकेला छोड़कर चली गयीं... वह शाम पाँच बजे तक सोता रहा... इसके बाद फरहा को किसी ख़ास काम का बहाना बनाकर वह लाक लगाकर चला गया... जाते -जाते वह दो दिन तक नहीं आने की बात कहकर भी गया था... फरहा ने एकाध बार तो उसे टोका , और फ़िर वह नहीं माना तो जल्दी से जल्दी आने की कहकर वह चुप हो गयी, वह सलीम को यह बताना चाहती थी की वह उससे बहुत प्यार करती है, उसके बिना ज्यादा दिनों तक जीवित नहीं रह सकती... उसकी आंखों के आंसू भी काफी कुछ बयान कर रहे थे... सलीम के दिल में जुदाई का गम था लेकिन उसे अपने मिशन के लिए भी निकलना जरूरी था... इसी कारण वह उन दोनों से विदा हो गया... वह अपने दोस्त राजू के पास फ़िर से पहुचा, उसे अपनी नई दुविधा बताई और आख़िरी बार मदद की अपील करते हुए बोला-
- मैं बहुत बड़ी मुश्किल का सामना कर रहा हूँ... तुम्हें मेरी मदद करनी चाहिए...
राजू- तेरे लिए मैं अपनी जान भी दे सकता हूँ सलीम... मैं हर तरह से तेरे साथ हूँ... मगर मैं क्या करुँ ? क्या कहूं तुम्हें... समझाता भी खूब हूँ... अब तो यही कहूँगा की इस बवाल से जितना जल्दी हो सके, बाहर निकल जाओ... पहले अकेली तुम्हारी महबूबा थी , अब उसकी बहन भी आ गयी है... सब गोलमाल लग रहा है...
सलीम- हाँ यार , ये सब हाल है तभी तो मैं तेरे पास आया हूँ.... तू ही कर सकता है मेरी हेल्प...
राजू तैयार होकर उसके साथ जब बार पहुचा तो ९ बज चुके थे... महफ़िल भी खूब सज चुकी थी... सजी- धजी बार गर्ल अप्सरा की तरह लग रही थीं... सलीम का दुखी दिल कुछ हद तक संभालने लगा... मन भावन गाने चल रहे थे, सलीम का भी थिरकने का मन करने लगा...वे दोनों व्हिस्की का पैग पीने लगे... जब सलीम ने उस दिन वाली वेटर को तलब किया तो पता चला की वह छूती पर थी... अब उसे नई दुनिया बनानी थी... उसने एक अधेड़ उम्र की वेटर को बुलाया उसे सौ का नोट देकर बोला-
- बाहर नहीं आती- जाती हो क्या ?
वेटर- अब इस उम्र में कौन बाहर लेकर जाता है ... एक जामाना था, तब तो रोजा आना -जाना होता था... आपको चाहिए क्या पटखा ? एकदम नया माल है... मोडल है... दिखने में भूख भाग जाती है...
सलीम- क्या कोई फ्रेश माल नहीं मिलता क्या ? कोई कोलेज गर्ल वगैरह ,, घरगुती माल...
वेटर- हाँ, क्यों नहीं सभी तरह का माल मिल जाता है... भाभियाँ भी मिल जाती हैं... भरोसे वाली ... एक बार सेटिंग हो गयी तो वे लोग पैसे भी नहीं लेती हैं... अपने घर पर ही सैटिंग करा लेती हैं, इस तरह लोज का भाडा भी बच जाता है... सस्ती भी होती हैं... तीन हजार तक में टनाटन भाभी मिल जायेगी...
सलीम- अच्छा , ऐसी बात है... तो फ़िर मोडल के क्या रेत हैं , और कोलेज गर्ल के भी बताना ?
वेटर- जैसा माल लोगे , वैसे दाम लगेंगे... दस हजार बीस हजार ... रहने खाने का खर्चा तुम्हारा होगा... बड़ी मोडल छोटे- मोटे होटल में नहीं ठहर पाती, उसके लिए फाइव स्टार होटल चाहिए... और वहाँ पर हर चीज मंहगी होती ही है... पीना भी, खाना भी... सब कुछ मालोम ही होगा आपको... बताना अपना फर्ज है... देखोगे फोटो ?
राजू- मैंने सुना है तुम लोग जो फोटो एल्बम अपने पास रखते हो , वह ग्राहकों को गुमराह करने वाली होती है... यानी तस्बीर किसी और की होती है और लड़की कोई और भेजी जाती है, सच है क्या ?
वेटर- किसने बताया आपको... आप पसंद तो करिए , पेमेंट मत दीजिये ... अगर पसंद की गयी लड़की ही आपको मिले तो पैसे देना वरना एक पैसा मत देना... मैं जो भी काम करती हूँ वो भरोसे का करती हूँ... नहीं तो आज आओगे कल नहीं आओगे... हम सेवा अच्छी देते हैं...भले ही हजार रुपये ज्यादा देंगे मगर जब आपको मजा आयेगा तो पैसे अखरेंगे नहीं... हमारी सर्विस बिल्कुल सुरक्षित होती है... पुलिस को हर महीने हफ्ता दिया जाता है...
सलीम- ठीक है, पैसे की कोई बात नहीं है... मैं देखना चाहूँगा आपकी एल्बम....
























सलीम- यार दिल कुछ और कहता है, दिमाग कुछ और कहता है... तू एक बार मेरे साथ होटल चल... मैं अन्तिम बार एक काल गर्ल की बुकिंग करवाता हूँ... भले ही वह बार वाली फरहा को किसी और नाम से संबोधित कर रही है मगर बता तो फरहा का फोटो ही रही है ना...
राजू- ठीक है... मैं तुम्हारा कहना मानूंगा... जरूर मानूंगा...मैं चलता हूँ मगर मेरा और तुम्हारा यह आख़िरी नाटक होना चाहिए ... इसके बाद मैं तुहें यह सब छोड़ने की सलाह दूंगा...

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