सलीम की इस सच्ची मगर भोली बात ने सबा को खूब हंसाया ... वह खुश होकर सलीम से लिपटने की कोशिश करने लगी... उसके दिल में इस समय लड्डू फूट रहे थे, लेकिन फरहा ने उसको टोक दिया... वह कह रही थी-
- ये ठीक नहीं है... तुम दूर-दूर से ही अपने हुस्न के जलवे दिखा सकती हो... मैं लिपटने की इजाजत नहीं दूंगी...
सबा- अब यह जानने के बाद बी ही की ये मेरे होने वाले जीजू हैं, मुझसे तुम ऐसी उम्मीद कैसे रख सकती हो ?
फरहा- हाँ, हाँ, मैं भूल गयी थी... सलीम के मन में तो अब लड्डू फूटने लगे होंगे... देखो जीभ लार दाल रही है...
सलीम- वो तो स्वाभाविक ही है... मैं जवान हूँ... तुम दोनों खूबसूरत हो... तुम्हारे इतने करीब आने पर प्यार का महसूस होना बहुत जरूरी है... अगर ऐसा नहीं हुआ तो तुम्ही मेरी मर्दानगी पर शक करने लगोगी ...
फरहा ने उसके कंधे पर अपना सर रख दिया... सलीम उसके बालों में कंघी करने लगा ... सबा पैग तैयार कर रही थी... वे तीनों इस वक्त पर पलंग पर बैठे हुए थे... सबा ने पैग देकर फ़िल्म देखने की इच्छा व्यक्त की... सलीम के होठों पर रहस्यमयी मुस्कान उभर आयी... उसने एक सीडी की तरफ़ इशारा कर दिया... जब सबा ने उस सीडी को चलाया तो गजब हो गया... उन तीनों के दिलो दिमाग में आग लगने लगी... बेहद भयंकर द्रश्य थे... एक हिन्दुस्तानी मर्द दो -दो विदेशी महिलाओं को संतुष्ट कर रहा था... यह फ़िल्म इतनी कामुक थी की सबा ने जोरदार आह भरनी शुरू करदी , वह अपने ही हाथों अपनी गोलाइयों को दबाने के लिए मजबूर हो गयी... वह बोली-
- आप तो बड़े छुपे रुस्तम निकले ... अब समझ में आया जीजू की जवानी और जिंदादिली का राज ...
फरहा- यह तो कुछ भी नहीं है मेरी जान ... अभी तो महज शुरुआत है, आगे -आगे देखती जाओ अपने जीजू को... इन्हें कम मत समझो ... ये माने हुए कामगुरु हैं... अगर इनके साथ कुछ दिनों तक रहोगी तो तुम्हारी समझ में बहुत कुछ आ जाएगा... रंगीले रतन हैं तेरे जीजू...
सबा- अच्छा जी... बहुत कुछ अनुभव हो गया है आपको.... बहुत याराना लगता है...
फरहा- तुमसे क्या छिपाना है , जब इनके साथ पूरा जीवन बिताना है... अगर मैं तुमसे कुछ छिपाउन्गी तो बुरा लगेगा तुमको... यह ठीक नहीं रहेगा... जाओ अब ... एक सिगरेट तो सुलगाओ... मूड चेंज करते हैं... अगर तुमको फ़िल्म पसंद नहीं है तो दूसरी सीडी चला देते हैं...मुझे लगता है की तुम्हें जोश नहीं आ रहा है ...
सलीम- तुम किस तरह की फ़िल्म पसंद करती हो ? मुझे लगता है इस तरह की फ़िल्म तुम्हारे लिए नई नहीं है ?
सबा- ठीक समझा आपने ... इंटरनेट पर मैं इससे भी अच्छी- अच्छी फ़िल्म देखती रहती हूँ... आजकल यूं ट्यूब पर सभी तरह की फिल्में मौजूद हैं... कहीं ढूँढने की जरूरत भी नहीं पड़ती ... मगर बीअर पीने के बाद मैंने कभी अश्लील फ़िल्म नहीं देखि... वो भी दो बीअर ख़त्म होने को हैं... मन बहक सा रहा है...
सलीम- मैं हूँ ना.... तुम्हें फ़िक्र करने की जरूरत नहीं है... फरहा भी हेल्प करेगी तुम्हें....
फरहा- हाँ, टेंशन क्यों लेती है... जी भरके मस्ते कर... ये जिन्दगी बार- बार नहीं आती... जिन्दगी अगर मिल भी गयी तो ये कमबख्त जवानी तो एक ही बार आती है ना...
सबा- मुझे डर इस बात का है की मैं बहक गयी तो क्या होगा ? मन में हलचल सी हो रही है...
फरहा- तो क्या हुआ ? तेरे जीजू हैं न... ये किस दिन काम आयेंगे... तुझे मजा चाहिए ना मिल जायेगा...
सलीम - ये क्या कह रही हो फरहा... ये तुम्हारी बहन है... अगर इसको कोई कष्ट आया तो मदद कौन करेगा ?
सलीम- लेकिन सबा सोचेगी की मैं अच्छा आदमी नहीं हूँ... मुझसे नाराज हो जायेगी...
फरहा- तो मना लेना... क्या फर्क पड़ता है... अगर यह नाराज होती है तो प्यार से इसे खुश नहीं कर सकते...
सलीम- मुझे इस उलझन में दाल रही हो... कहीं ऐसा तो नहीं मेरी परिक्षा लेने के लिए ये सब कहा जा रहा है ?
सबा- तुम भी ना जीजू , कभी-कभी बहुत बोर करते हो... चलो बहुत हो गया अब मैं तुम्हें पीने नहीं दूंगी... तुम्हारी जुबान भी लड़खडाने लगी है और दिमाग भी हिल गया है... मैं जानती हूँ सब... ताकत नहीं सहने की...
सलीम सिर्फ़ मुस्करा कर रह गया... उसे मालूम था की कुछ अनिष्ट होने वाला है... ठीक तभी फरहा वहाँ से बाथरूम में खिसक गयी... अब वहाँ पर सबा और सलीम ही रह गए थे... सबा उसकी तरफ़ ऐसे देख रही थी जैसे वह उसे खा जायेगी... सलीम ने बेझिझक सबा को अपनी बांहों में कैद कर लिया... अब वह प्यार के आगोश में खोने की तैयारी करने लगे...
Monday, September 14, 2009
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