Tuesday, September 14, 2010

लवगुरु, भाग-३८


डोली - आपकी नजर में इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?
मुंशीजी- पश्चिमी सभ्यता, जो खुलेपन और स्वतंत्रता की मांग को सर्वोपरि मानती है, जब यही स्वतंत्रता और खुलापन अपनी सीमा मे ज्यादा होती है तब अराजकता फैल जाती है और उसी अराजकता में यह बीमारी फैलने लगती है.
जब से टीवी और इंटरनेट का उपयोग बढ़ा है तब से पुरुषों में वासना अपनी सीमा से कहीं अधिक बढ़ गई है.
हालांकि यह भी पश्चिमी सभ्यता की देन है.
मदिरा का नशा ऐसा होता है कि कई पुरुष इसके नशे में उत्तेजित होकर अपनी बच्ची,बहन या रिश्तेदार को ही वासना शांत करने का साधन समझ बैठते हैं.
बलात्कार क्यों होता है, कैसे होता है , किन परिस्थितियों में होता है यह सब उस महिला या लड़की के लिए कुछ मायने नहीं रखते जिसके साथ यह होता है. क्योंकि ऐसी स्थिति में उस पीड़िता के लिए जीवन कष्टों की गठरी बन जाती है. पहले तो उसका शारीरिक बलात्कार होता है और फिर हर डगर पर उसका मानसिक बलात्कार अपनों द्वारा होता ही रहता है.
चाहे हम कितने भी शब्द लिखें लेकिन सच्चाई यही है कि बलात्कार पीड़िता के दर्द को दर्शाना संभव नहीं है .
डोली- जी, बलात्कार के बाद यह सबसे पहली पीड़ा होती है. क्योंकि जब कोई जानवर अपनी पूरी ताकत से किसी की इज्जत लूटता है तो उस दर्द की पीड़ा मात्र से ही पीड़िता कई दिनों तक परेशान रहती है. और यह दर्द नाबालिग और कम आयु की लड़कियों में तो और भी ज्यादा होती है जिनके कोमल अंगों को यह जानवर नोच खाते हैं.
अक्सर सामूहिक बलात्कार के बाद पीड़िता को एड्स और गर्भ जैसी समस्या होने का खतरा बना रहता है. सामूहिक बलात्कार, जो आजकल कुछ ज्यादा ही हो रहे हैं उसमें पीडिता का शरीर कभी-कभी तो इतना थक जाता है कि उससे मृत्यु भी हो जाती है. हालांकि ऐसे समय में पीड़िता को जल्द ही अगर चिकित्सकीय मदद मिल जाए तो हालात काबू में किए जा सकते हैं.
बलात्कार तो शरीर का होता है फिर मन को कैसी पीड़ा? लेकिन यह वह दर्द होता है जो हर दर्द से बढ़ कर होता है.
मानसिक अवसाद और अंधेरे में पीड़िता इस कदर गुम हो जाती है कि उसे अपने अस्तित्व का ख्याल ही नहीं रहता. हर समय मन उस डरावने समय को याद करता है और दिमाग पागलपन की तरफ खिंचता चला जाता है.
जिस चीज से मन सबसे ज्यादा दुखी होता है वह है इतना सब होने के बाद समाज का रवैया. एक ऐसी लड़की जिसकी इज्जत लुट चुकी हो उसे समाज अधिकतर बुरी निगाहों से देखता है खासकर निम्न और मध्यम वर्ग में तो अगर किसी के साथ बलात्कार या रेप हुआ हो तो उसे अछूत से कम नहीं माना जाता.

सबसे ज्यादा दोष तो समाज का है जो बार-बार पीड़िता के अहम और उसके सम्मान का बलात्कार करता है. समाज इस चीज में पीड़िता की ही गलती देखता है, उसे हर जगह नीच भावना से देखता है. ऐसी स्थिति में लड़की का स्कूल, दफ्तर आदि जाना तो मानो पाप हो जाता है जहां हर दूसरी नजर उन्हें रंडी, वेश्या या कलमुंही की नजर से देखती है.

ऐसे में मानसिक पीड़ा और अवसाद होना सामान्य है. इसका परिणाम यह होता है कि एक हंसती-खेलती लड़की गुमनामी के साए में या तो गुम हो जाती है या आत्म हत्या कर लेती है.

किसी पीड़िता को सबसे अधिक दुखद स्थिति का सामना तब करना पड़ता है जब कि उसे ऐसे लोग मिल जाते हैं जो उसे अपना सबसे आसान शिकार समझते हैं. इसी कड़ी में यह भी देखा गया है कि सहानुभूति की आड़ में उनका सबसे ज्यादा शोषण हुआ है.


अक्सर देखा जाता है कि इन मामलों में शिकारी या आरोपी कोई जान-पहचान का ही होता है तो ऐसे में माता-पिता को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि कहीं कोई उनकी बच्चियों पर गलत नजर तो नहीं रखता. इसके साथ लड़कियों को भी ज्यादा खुलेपन से परहेज करना चाहिए. साथ ही बचाव के लिए आप अपने साथ लाल मिर्च की पुड़ियां भी रख सकती हैं यह सबसे बेहतरीन उपाय होता है. बंद गलियों और अंधेरी-सुनसान रास्तों के इस्तेमाल से बचें. अगर जरुरी न हो तो रात को सफर करने से परहेज करें. ऑटो के स्थान पर रात के समय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग बेहतर होता है क्योंकि ऐसे अपराधों में इनकी भूमिका हमेशा से संदेह वाली रही हैं.

समाज का यह नजरिया की बलात्कार के बाद लडकी की इज्जत नहीं रहती गलत है. बल्कि इसे एक अपराध की तरह देखना चाहिए जैसे कि आप चोरी या दुर्घटना को देखते हैं. परिवार को भी इसे इसी रूप में देखना चाहिए. बलात्कारी को समाज के सामने लाना चाहिए और इंसाफ की आवाज को बुलंद करना चाहिए. समाज को पीड़िता के प्रति उदार रवैया अपनाना चाहिए क्योंकि भावनात्मक सहानुभूति किसी की जिंदगी बना सकती है.


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