Friday, September 3, 2010

लवगुरु, भाग-२८

डोली- बहुत पहुंचे हुए हैं लवगुरु, तभी तो यह छोटा सा शहर भी अब अन्तर राष्ट्रीय स्तर पर फेमस हो चूका है .
मुंशीजी- हाँ, मैं भी उनसे मिलकर अपने जीवन में काफी चेंज महसूस कर रहा हूँ , तुमसे मिलकर उन सभी बातों को प्रयोग करने की कोशिश कर रहा हूँ , उन्होंने भी बताया था कि कई बार लोगों को लगता है अब चुंबन में क्‍या रखा है? इसी लिए वो इसकी गहराई समझ नहीं पाते। चुंबन के समय सबसे अहम होता है कि हम अपने पार्टनर को किस तरह पकड़े हुए हैं। या फिर चुंबन के समय सामने वाले की प्रतिक्रिया क्‍या होती है। होठ से होंठ मिलाकर चुंबन का असीम अनुभव प्राप्‍त करने के लिए आप अपने पार्टनर को अपनी बाहों में भर लें। उसे जरा भी ढीला न छोड़ें। साथ ही किस के दौरान सबसे पहले पार्टनर के बालों में अपने हाथ ले जाएं, वहां से पीठ पर और फिर कमर तक सहलाते हुए ले जाएं।
इससे आपकी पार्टनर आपके काफी करीब महसूस करेगी। बेहतर होगा कि लिप किस के दौरान चेहरे के किसी अन्‍य भाग पर किस मत करें। उससे सेक्‍स अनुभव कम होता है। लिप किस भी पंद्रह मिनट से ज्‍यादा नहीं होन चाहिए, वरना उबाऊ हो सकता है।
होठों के बाद दूसरा टार्गेट गर्दन के पीछे का हिस्‍सा होना चाहिए। उससे महिलाओं को बेहतरीन अनुभूति होती है। धीरे-धीरे गर्दन के चारों ओर और फिर कंधे पर। अच्‍छा होगा यदि आप सबसे अंत में गाल पर किस करें। किस के दौरान अगर अपने पार्टनर की छाती पर और फिर कमर के हिस्‍से पर मसाज करते हैं, तो संभोग के लिए उत्‍तेजना बढ़ती है।
मुंशीजी- तब तो महिलाओं पर भी यही बात लागू होती होगी ?
लवगुरु- हाँ , बिलकुल. काम क्रीडा के दौरान चुंबन उन महिलाओं के लिए सहायक साबित होता है, जिन्‍हें चरम सीमा तक पहुंचने में काफी देर लगती है।
सबसे पहले निडर बनना होगा। आप अपने पार्टनर को यह अहसास दिलाना पड़ता है कि हम चाहते क्या है ,
अपने पार्टनर के साथ ज्‍यादा से ज्‍यादा समय बिताएं और उसके सामने अपने प्‍यार का इज़हार करें।
जब आपको लगने लगे कि वो आपकी ओर आकर्षित हो रही है, तो उसे अपनी बाहों में भरने की कोशिश करें। या फिर खुद लिपट जाएं।
जब पार्टनर हमारे करीब आए, तो प्‍यार में जरा भी कंजूसी नहीं करनी चाहिए । यदि हमको उसकी कोई बात अच्‍छी लगती है, तो तारीफ जरूर करनी चाहहिये
यदि पार्टनर काम क्रीडा की शुरुआत नहीं करता है, या फिर वो किसी बात से परेशान है, तो उससे ऐसी बातें करें, कि वो अपनी सारी परेशानियां भूल कर आपके करीब आ जाए।
पार्टनर को फोर प्रणय मौका दें। चुंबन व धीरे-धीरे मसाज से उसे पूरी तरह आगोश में ले लें।
.इस बात का इंतजार मत करें करें वो काम क्रीडा की शुरुआत करे। यदि हम शुरुआत करेंगे , तो उसे और भी ज्‍यादा अच्‍छा लगेगा।
मुंशीजी- तो गुरुवार काम क्रीडा के दौरान कंडोम भी जरूरी होता है ?
लवगुरु- क्रीडा के दौरान कंडोम का इस्‍तेमाल प्‍यार को कई गुना बढ़ा देता है , इससे सुरक्षा भी बनी रहती है. अनचाहा गर्भ ही नहीं , अगर दोनों में से किसी साठी को किसी तरह का कोई यौन रोग है तो उससे बचने के लिए भी कंडोम काम करता है. अगर अच्छा कंडोम होगा तो वह आनंद बढाने में भी मददगार हो जाता है.
डोली का बदन आग की भट्टी की तरह दहक रहा था. मुंशीजी उस तपिश को अच्छी तरह से जान रहे थे, मगर लवगुरु की हिदायत के मुताबिक़ वे डोली को पहले अच्छी तरह से 'तैयार ' कर लेना चाहते थे . वे प्लानिंग के तहत सब कुछ कर रहे थे. डोली भी भलीभांति जानती थी , मगर उसका अनुमान था कि मुंशीजी एक बार की प्रणय क्रीडा में ही चारों खाने चित्त हो जायेंगे और उनके सिर से इश्क का भूत उतर जाएगा . इसलिए वह जल्दी से खुश करके फिर आराम से नींद लेना चाहती थी, वह पिछले दो दिन और रातों से ठीक तरह से सो नहीं पाई थी. कई धनी ग्राहक जों मिल गए थे , और अपने ग्राहकों को वह देवता की तरह मानती थी, उनको हर तरह से संतुष्ट करना चाहती थी.
आखिरकार मुंशीजी का पुरूष जाग उठा. लवगुरु की बातें याद आते ही उन्हें कंडोम का ध्यान आ गया था. इसके लिए वे वेटर को बुलाने के लिए घंटी बजाने हे वाले थे कि उनकी उलझन को डोली ने तुरंत पहचान लिया और उन्हें एक अदद कंडोम पेश किया. अब वे सुहागरात मनाने के लिए तैयार थे.











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