छमिया न तीर मारते हुए कहा-
- अब कुछ अन्दर की बात भी तो बताओ, तुमने तो कामशास्त्र पढ़ा हुआ है, कुछ बताओ सफल सेक्स के बारे में , इस दौरान होने वाली तकलीफों के बारे में , ज़रा समझूं तो सही ।
मुंशीजी- लोगों को यह समझाया जाता है कि सेक्सुअल डिजायर रखना शेमफुल, वल्गर या कोई अपराध है। जो अपनी सेक्सुअल डिजायर को जान-बूझकर दबाते और छुपाते हैं, वे आदर के पात्र होते हैं। ऐसे में अगर कोई जवान लड़का किसी खूबसूरत लड़की को देखकर फैंटेसी में खो जाए, तो उसे अपराधबोध होता है। खुद महिला सेक्स की इच्छा जाहिर करने में अपने आप को अपराधी मान लेती है। कुछ केसेस में अगर कोई महिला सेक्स की इच्छा जाहिर करे, तो उसका पति उसे गलत समझता है। यही नहीं, वह उसकी वफादारी पर भी शक करने लगता है। ऐसे एटिट्यूड से कोई थेरपिस्ट ही आपको मुक्ति दिला सकता है।
दिक्कत यह है कि हमारे यहां ऐसे पाखंडी लोगों की भरमार है, जो एडवर्टाइजमेंट के जरिए अपने आपको सेक्स स्पेशलिस्ट बताते हैं। ज्यादातर ऐसे लोग अनक्वॉलिफाइड होते हैं। किसी भी प्रॉपर मेडिकल डिग्री के बिना वे मिथ्स फैलाते रहते हैं। मस्टरबेशन हानिकारक है और नाइटफॉल बीमारी है जैसी बातें उन्हीं लोगों ने फैलाई है। सबसे बड़ी प्रॉब्लम तो यह है कि क्वॉलिफाइड मेडिकल प्रैक्टिसनर को कानून अपना विज्ञापन करने की अनुमति ही नहीं देता। इस बात से साबित होता है कि अपने सेक्स क्लिनिक के एड करने वाले लोग धोखेबाज होते हैं। फिर क्वॉलिफाइड सेक्स थेरेपिस्ट की कमी समस्या को और गंभीर बना रही है। नहीं जानते कि कब कंसल्ट करना है कई बार लोगों को यह क्लीयर ही नहीं होता कि कंसल्ट कब किया जाए। जब भी महिलाओं को जनन अंगों से संबंधी कोई समस्या होती है, तो वे किसी गायनी के पास जाना बेहतर समझती हैं। हालांकि कई बार सेक्सुअल प्रॉब्लम्स इमोशनल, साइकॉलजिकल और रिलेशनल होती हैं, जो किसी गायनी की एक्सपर्टीज के तहत नहीं आतीं। क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट या कंसलटेंट का साइकॉलजी बैकग्राउंड होता है, जिनमें मेडिकल नॉलेज की कमी होती है। कई बार महिलाओं और पुरुषों में सेक्स में अपने या अपने पार्टनर के रोल को लेकर एटिट्यूड समस्या रहती है। जैसे कि पहल किसे करनी चाहिए, सही तरीका क्या है, फोरप्ले के लिए उचित समय कितना होना चाहिए, इंटरकोर्स की सही फ्रीक्वेंसी क्या होनी चाहिए, कहां परफॉर्म करना चाहिए या एक्टिव पार्टनर किसे होना चाहिए वगैरह। अगर यह सही प्रॉस्पेक्टिव में नहीं किया जाए, तो बहुत हानिकारक हो सकता है। परफॉर्म न कर पाना अगर कोई पुरुष सेक्स के दौरान अपने पार्टनर के साथ परफॉर्म नहीं कर पाए, तो इस समस्या की डीटेल में जांच करवानी चाहिए। महिला को ऑर्गेज्म बहुत संतुष्टि देता है। सेक्स के दौरान अपने पार्टनर के साथ एक्टिव पार्टिसिपेशन के बावजूद अगर महिला ऑर्गेज्म तक न पहुंचे, तो सेक्स थेरेपिस्ट की सलाह लेनी चाहिए , शादी से पहले भी बहुत से लोग सेक्स रिलेशन रखते हैं। उनके संबंध अलग-अलग लेवल पर होते हैं, मगर वे थेरेपिस्ट से मिलने में झिझक महसूस करते हैं। लेकिन अनियंत्रित मन आपके काम को प्रभावित कर सकता है। अगर बार बार सेक्स का खयाल काम से आपका ध्यान हटा दे, तो सेक्स थेरेपिस्ट की मदद की जरूरत समझिए ,अगर तुम बिना झिझक , बिना संकोच और बिना दहशत के मेरे साथ सम्बन्ध बनाती हो तो हम दोनों सफल काम क्रीडा को अंजाम दे सकते हैं।
छमिया- तो क्या सारे डॉक्टर फर्जी होते हैं ?
मुंशीजी- ये मैंने कब कहा ? ऐसा नहीं है। अच्छे और काबिल भी मौजूद हैं, उन्हीके पास जाना चाहिए।
छमिया- तुम्हें इतना ज्ञान कैसे हो गया ? क्या दिन भर इसीकी स्टडी करते रहते हो ?
मुंशीजी- अच्छा जी, कुछ कहो तो मुसीबत और ना कहो तो मुसीबत ?
Tuesday, February 2, 2010
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