Monday, February 22, 2010

भाग-13

किसीकी उम्र या शादी से हमें क्या लेना -देना ?मोहब्बत तो इस सबसे अलग होती है न, वह दायरे में कैद होने वाली नहीं, तुमने समुद्र को कभी किसी लिमिट में बंधते देखा है क्या ? । शायद आज तक कोई नहीं जान पाया की सागर की गहराई क्या है ? और फिर प्यार तो अनंत होता है। सागर से भी गहरा , उसको अगर जिस्म से तोलकर देखेंगे तो कैसे चलेगा ?
अहमद- हाँ, यार । कहता तो तू भी ठीक है । लेकिन मेरे यार मैं इतनी बड़ी बातों को नहीं जानता। मैं सिर्फ इतना जानता हूँ की तू मेरा यार है, मेरे भाई से भी ज्यादा अज़ीज़। मैं तुझे दुखी नहीं देख सकता।
अजय- इसका मतलब मैंने तुझे कन्वेंस कर चुका हूँ। जान गया हूँ की अब तू मेरी मदद करेगा, इसको ही प्यार की ताकत कहते हैं। प्यार में जादू होता है मेरे यार । इस शक्ति को मैं पहचान गया हूँ। अब तू किसी ऐसे व्यक्ति को तलाश जो मेरे दिल के जज्बातों को चंदाबाई के सामने बयान कर सके, मैं उसके बारे में क्या सोचता हूँ, उसे कितना याद करता हूँ, कितना चाहता हूँ। ये सब बातें विस्तार से उस तक पहचानी है। उसे यह यकीं दिलाना है की भले ही मेरी उम्र कम है , मगर मैं परिपक्व हूँ और महज बाल हठ न करके प्यार की बात कर रहा हूँ। मुझे उस तक यह बात पहचानी है की वो मुझ पर, मेरे प्यार पर , मेरे चरित्र पर और , और मेरी द्रढता पर विश्वास करे ।
अहमद- इसके लिए मैं कई लोगों को जानता हूँ, तेरा काम हो जाएगा । बातें बिलकुल गोपनीय रहेगी। मोहब्बत का पत्र लिखने के लिए कोई शायर ही सबसे उपयुक्त हो सकता है। एक मेरी खाला का लड़का है। उसकी ग़ज़लें बड़ी-बड़ी पत्रिकाओं में छपती हैं। मुझसे बड़ा है, मगर मेरी उसके साथ खूब छनती है। हम उसकी मदद से यह काम कर सकते हैं। वह बहुत सुलझा हुआ राइटर है। कहो तो चर्चा करू।
अजय- नेकी और पूछ-पूछ । फ़ौरन तैयार हो जाओ । बात चला डालो , तुम मेरा जिक्र न करना , चंदाबाई का भी नहीं , बस हालात और चरित्र ऐसे बता देना जिससे मेरे बारे में परफेक्ट मैसेज मिल जाए। हालात के बारे में ठीक से जानकारी मिल जाए, और पहले उससे एक प्रेम पत्र लिखवाकर लाओ , उर्दू शब्दों का इस्तेमाल ना के बराबर होना चाहिए , ताकि वह ठीक से समझ भी ले और यह भी जान ले की पत्र मैंने खुद लिखा है, क्योंकि भाड़े पर पत्र लिखवाने से उसके पास गलत सन्देश जा सकता है।
अहमद- बेफिक्र रह यार, खुल्ला खा, नंगा नहा , ऐसा ही होगा।
अजय की खुशी का ठिकाना नहीं रहा । जब दिल खुश हो तो सब काम भी ठीक ठाक बनते चले जाते हैं। कबड्डी के मैदान में भी उसकी टीम ने खूब धमाल मचाया । उन्हें पहला स्थान तो नहीं मिल पाया, दुसरे पर ही संतोष करना पड़ा, लेकिन उनकी चिर प्रतिद्वंद्वी और ताकतवर टीम के खूब छक्के छुडाये। उसे बुरी तरह से हराया । अजय तो सामने वाली टीम की दो बार झंडी भी उखाड लाया था, जबकि उसकी झंडी से कोई हाथ भी नहीं लगा पाया, आखिर उसकी देखभाल खुद अजय जो कर रहा था। अगले ही दिन अहमद भी अपनी खाला के लड़के से एक चिट्ठी लिखवा लाया । अजय पहले तसल्ली कर लेना चाहता था की वह उसकी भानाओं में ठीक तरह से रंग भर भी पायेगा की नहीं , इसलिए पहले अच्छी तरह मजमून को पढ़ लेना चाहता था। अहमद के भाई ने लिखा था-
-जान से प्यारी ...
मेरा बहुत सारा प्यार ,इससे पहले की आगे तुम कुछ पढ़ो , मैं आपसे यह वादा लेना चाहता हूँ की यह बात मेरे और तुम्हारे सिवा किसीको भी पता नहीं चल पाए, यह भी की इस पत्र को सिर्फ प्रेम पत्र मत समझना , यह मेरी जिंदगी और मौत का सवाल है, सोच समझकर जवाब देना, मेरा निवेदन यही है की मैंने तुम्हे देखकर ही यह जाना की हुस्न क्या होता है, जवानी क्या होती है ? अदाएं क्या होती हैं और प्यार के जज्बात क्या होते हैं, मैं हर समय तुम्हारे बारे में ही सोचता रहता हूँ, तुम्हारा चेहरा हर समय मेरी निगाहों के सामने घूमता रहता है, मैं इतना परेशां हो चुका था की समझ ही नहीं पा रहा था, यह सब क्या है ? मेरे सपनों में हमेशा तुम ही क्यों आती हो ? किताबों में तुम्हारा चेहरा ही क्यों नजर आता है , मैं अपने आपसे सवाल करता रहा , और फिर दिल कजाव्ब आया तो मैं हैरत में था, ठीक उतनी ही हैरत में जितना की इस वक्त तुम इन अल्फाजों को पढकर हो। तुम यह सोच सकती हो की यह बचपन की भावुकता है, ऐसा सोचने का अधिकार तुम्हें है। मगर सच इससे दूर है। सच्चाई यही है की मुझे , जी हाँ, मुझे तुमसे प्यार हो गया है , जी नहीं सकता तुम्हारे बिना, मुझे तुम्हारे प्यार का सहारा चाहिए।








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