मेरा यकीं करो , ये बात मैं पूरे होशो-हवास में लिख रहा हूँ, मैं जानता हूँ प्यार कितना पवित्र होता है, साथ ही उन तकलीफों से भी अनजान नहीं जो प्यार निभाने में उठाने पड़ती हैं। मैंने हीर रांझा , लैला मजनू,शीरी -फरहाद रोमियो जूलियट आदि को अच्छी तरह से पढ़ा है, साथ ही आज के जमाने के लोगों के बारे में भी भली भाँती परिचित हूँ। तुम भी जानती हो, मैं भी जानता हूँ की तुम्हारा लैला -मजनू का मंचन देखकर पडौसी गाँव के सुनार की लड़की अपने प्रेमी के साथ भाग गयी थी, उसके प्रेमी ने उसको किस तरह बहला फुसलाकर लूटा, किस तरह उसे मुंबई ले गया और फिर वहाँ ले जाकर उसे गर्म गोश्त के सौदागरों के हाथों बेच डाला , उसके बाद कैसे उसको मुंबई से लाया गया, इससे मैं वाकिफ हूँ, वाकिफ तो अपने पडौसी गर्ग जी के लड़के से भी हूँ, जिसने प्यार की खातिर अपनी जान गंवादी और फिर आखिर में उसकी प्रेमिका ने भी आत्महत्या करली। मेरे लिखने का मतलब ये है की मैं वफ़ा और बेवफाई दोनों से ही अच्छी तरह से वाकिफ हूँ।हांलाकि मैं किसी भी सूरत में आत्महत्या करने के पक्ष में नहीं हूँ. इश्वर एक बार मानव जनम देता है , अगर उसको भी बेमकसद गँवा दिया जाये तो यह प्रकृति के साथ भी खिलवाड है, और इसको कभी माफ नहीं किया जा सकता। मगर इतना कहता हूँ की तुम्हारा प्यार पाने के लिए मैं किसी भी हद तक जा सक्क्ता हूँ, दीवारों, पहाड़ों , फौलादों , जेल के सीखचों , आंधी -तूफ़ान सबसे टकरा सकता हूँ, बड़े से बड़ी बगावत कर सकता हूँ मगर तुम्हें हासिल करके रहूँगा, हासिल करने का अर्थ ये नहीं की मैं तुम्हारे तन का पुजारी हूँ, मुझे तन के साथ -साथ तुम्हारी आत्मा और तुम्हारे दिल पर भी विजय पानी है, और मैं ऐसा कर सकता हूँ बशर्ते की तुम भी मेरा सहयोग करो। मेरा साथ दो। मैं तुम्हारे साथ जीना और तुम्हारे साथ मरने के सपने देखता हूँ, नहीं, नहीं। परेशान क्यों होती हो, मैं कोई जिद नहीं कर रहा , मुझे कोई जल्दबाजी भी नहीं है। शादी हम तभी करेंगे जब सब लोग इसके लिए राजी हो जायेंगे, और मेरी पढाई भी पूरी हो जायेगी, उससे पहले कुछ नहीं, लेकिन यार प्यार पर तो मेरा हक बनता है, मैं चाहता हूँ की तुम मेरी दोस्त बन जाओ , जिस तरह मुझे बच्चे की निगाह से देखती आयी हो , अब न देखो। अब मुझे अपने प्रेमी , अपने अजीज मित्र के रूप में देखो। मैं कोई जबरदस्ती भी नहीं थोपना चाहता। अगर मेरे अंदर तुम्हें कोई बुराई नजर आती हो तो मुझे इनकार कर सकती हो, लेकिन अगर तुमने ऐसा किया तो मेरा दिल टूट जाएगा । फिर मैं इस गाँव में कभी रह नहीं पाऊंगा, उस स्थिति में शायद मुझे बहुत दूर जाना पड़े, किसी ऐसी जगह पर जहां तुम्हारी याद मौजूद न हो। लेकिन तुम ही बताओ ऐसी कोई जगह इस संसार में हो सकती है क्या ? मुझे एक शेर याद आ रहा है - जाहिद शराब पीने दे , मस्जिद में बैठकर । या वो जगह बतादे जहाँ खुदा न हो। तो जिस तरह मालिक जग के कण-कण में मौजूद है , उसी तरह तुम भी मेरी रग -रग में बस चुकी हो। तुम्हारी खुशबू तमाम कायनात में फ़ैल चुकी है। वफ़ा की इस खुशबू को मैं कैसे नजरअंदाज कर पाऊंगा, फिर वही की जी नहीं पाउँगा तुम्हारे बिन। अब तुम सोच रही होंगी की लोग क्या कहेंगे ? मगर मैं कहता हूँ की मुझे उस सबसे कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग क्या कहेंगे , बस मेरे लिए तो यही महत्वपूर्ण है की तुम क्या कहोगी , मुझे डांट दोगी, कोई मजबूरी बताओगी , भडककर आग बबूला हो जाओगी, मेरा मजाक उदाओगी , या फिर मेरे घर पर मेरी शिकायत करके मुझे जलील करवाओगी, जो भी है मगर मेरा भरोसा यही है की तुम मेरे प्रेम-प्रस्ताव को ठुकरा नहीं सकती । यह मेरे दिल की गहराइयों की आवाज है। अगर यह गलत है तो क्यों है , बताओ ना। क्या कमी है मेरे अंदर । मैं शराब नहीं पीता, सिगरेट , तम्बाकू, को हाथ भी नहीं लगाता, मैं किसी नशे का भी आदी नहीं हूँ। कभी झूठ नहीं बोलता, किसीसे से लड़ता -झगडता नहीं, किसी की चोरी नहीं करता, किसीका दिल नहीं दुखाता , किसीके साथ छल नहीं करता । और फिर भी अगर तुम्हें मेरे अंदर कोई बुराई नजर आती है तो कहो ना , मैं उसे त्यागने के लिए तैयार हूँ।
Tuesday, February 23, 2010
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