Saturday, January 3, 2009

रंगीला रतन, भाग-66

उसका स्टाइल ऐसा था जैसे वह अनजान बन रहा हो... दिखने में वह खूबसूरत लग रहा था... रंजना ने रमेश की तरफ़ देखा, वह जीशान की गर्ल फ्रेंड को एक अश्लील के बारे में समझा रहा था... वह लड़की भी रमेश से सटतीजा रही थी... वह अपनी जांघ को पीछे जताने लगी, जीशान उसके और भी करीब आ गया... अब वह पीछे हटने वाली नहीं थी... जीशान ने टी शर्त पहन राखी थी... पेंट के स्थान पर बड़ा नेकर था, जबकि रंजना के जिस्म पर सिर्फ़ एक चादार थी... चादर के नीचे वह नग्न अवस्था में थी... आहिस्ता-आहिस्ता जीशान ने उसकी चादर में हाथ दाल दिया... रंजना को न जाने क्या हुआ की वह इनकार नहीं कर पाई... जीशान ने उंगलियाँ अब रंजना के यौवन द्वार पर दस्तक देने लगीं... उजाला बहुत कम था... अश्लील फ़िल्म ने पहले ही तन मन में आग लगा राखी थी... जीशान की उँगलियों ने रही सही कसार पूरी कर दी थी... उसके मन में विस्फोट हो रहे थे... तन में ज्वालामुखी फ़ुट रहा था... उसने महसूस किया की जो लड़की जीशान के साथ आयी थी, वह जोर-जोर से आहें भर रही थी... रमेश की आवाजें भी आ रही थीं... अब टीवी पर जो द्रश्य था वह बेहद प्रलयकारी था... फ़िल्म में दिखाया जा रहा था की आजकल लोग कैसे अपने पार्टनर बदलकर सेक्स का आनंद उठाते हैं, उसीके विस्तृत द्रश्य थे... रंजना को अब समझते देर नहीं लगी की उसका पार्टनर रमेश भी इसी खेल में मशगूल हो गया है... अब मैदान साफ़ था... जीशान ने उसको आमंत्रण देने के इरादे से अपना हाथ उसकी तरफ़ बाधा दिया, जब रंजना ने रमेश की तरफ़ निगाह दौडाई तो जीशान के होठों पर मुस्काने दौड़ गयी... वह धीरे से बोला-
-इसे कोई आपत्ति नहीं होगी... मुझे भी नहीं है... देखो मेरी प्रेमिका उसके साथ कितना इंजॉय कर रही है... रोजाना एक के साथ ही व्यवहार बनाने से जिन्दगी में मजा नहीं आता, एक समान आनंद से तुम दुखी नहीं हो , मैं तो ऐसा ज्यादा दिनों तक नहीं कर सकता... उसका कारण ये है की मुझे अपना जीवन नर्क ने अहं बनाना है ... मैं जिन्दगी को खुलकर जीना चाहता हूँ... अगर तुम मेरे विचारों से ज़रा भी सहमत हो तो मैं तुम्हारा साथ दे सकता हूँ... इतनी उत्तेजक फिल , शराब ,ड्रग्स और अपने सामने अपने दोस्त का यह मंजर देख कर तुम्हारे दिल में भी लड्डू फ़ुट रहे होंगे, हो सकता है की तुम भी मेरी तरह अब अपने आपको तैयार कर चुकी होंगी... मानसिक रूप से तैयार होने पर फ़िर ज्यादा समय नहीं लगता है... शारीरिक रूप से फ़िर बहुत जल्दी ही फिट हो सकते हैं....
रंजना सोच में पड़ गयी... जीशान बिल्कुल सच कह रहा था... रमेश ने उसको बेहद उत्तेजित कर दिया था... उसके तन में आग लग चुकी थी... उसने एक बार रमेशको पुकारा भी, मगर उसको वहाँ से जवाब नहीं मिला... जीशान की दोस्त और वह खिलखिला कर हंस रहे थे... टीवी की आवाज भी तेज थी... उसने अपने आपको असहाय महसूस किया ,, अभी वह कुछ कहना ही चाहती थी की जीशान ने उसके सुर्ख होठों पर अपने तपते हुए होठ रख दिए... ज़रा भी विरोध नहीं कर पाई रंजना... चुपचाप जीशान का साथ देने लगी... जब जीशान ने उसके जिस्म से चादर एक तरफ़ हटाकर फेंकी तो रंजना विरोध करने लगी... ठीक उसी समय रमेश ने उससे जीशान के साथ आनंद लेने की अपील की... रमेश अब जीशान की तारीफों के पुल बाँध रहा था और उसे ख़ुद से भी ज्यादा मजा देने की गारंटी दे रहा था...

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