शारीक - तुम्हारी किसी बात से मैं बोर कैसे हो सकता हूँ, मेरे जीवन में अब तुम्हारा एक ख़ास स्थान हो गया है... मैं दिल से तुमको अपना माँ चुका हूँ... अपने मन में तुम्हारी तस्बीर बसा चुका हूँ, अब तो मेरे मरने के बाद भी कोई इसको नहीं हटा सकता... दिल का मामला है यार.... और जब ये दिल ही तुम्हारा हो गया तो फ़िर बचता ही क्या है ? अगर कुछ बच्चा होगा तो वो भी तुम्हारा...अब रमेश के बारे में बताइये...
रंजना- कोई बात नहीं, मैं तुम्हारी यह इच्छा जरूर पूरी करुँगी.... उस रात मैंने जीशान के समक्ष समर्पण कर दिया... उसने अपने मन के मुताबिक मेरे जिस्म का इस्तेमाल किया... वह भी तुम्हारी तरह नया लड़का था, उत्साही और जोशीला था, अब यी बात अलग है की वह तुम्हारी तरह शक्ति नहीं रखता था... मुझ पर जब नशा चढ़ने लगा तो मैं अचेत हो गयी, मुझे बाद में पता चला की रमेश और जीशान ने बारी बारी से मेरे जिस्म के साथ खिलवाड़ की... जाब अगले दिन मेरी आँख खुली तो मैं बहुत परेशान थी, मेरा सर दर्द कर रहा था... आंखों में जलन हो रही थी.... पूरा शरीर टूट रहा था... रमेश उसके पास ही बैठा था... वह अभी अभी आया था... आते ही कहने लगा-
- लो , यह नीबू पानी है , इसे पीने से तुमको काफी राहत मिलेगी... मैं अक्सर ऐसा ही करता हूँ....
रंजना- अच्छा, ये मुझे न जाने क्या हो गया है ? पहले तो मुझे इतनी तकलीफ कभी नहीं हुआ था, मुझे लगता है जैसे की मेराजिस्म से खून निचोड़ लिया गया है.... ऐसा न जाने क्या हो गया है? शायद मैंने रात बहुत ज्यादा पी ली थी... ओफोह, मुझे रात की कोई बात याद नहीं आ रही है.... अब शराब से हाथ भी नहीं लगाउंगी... प्लीज , तुम भी कभी जिद मत करना... तुम मेरे पीछे ऐसे पड़ गए हो की मानते ही नही ?
रमेश- सोरी मेरी जान , अगर ऐसी बात है तो अब कभी नहीं कहूँगा... चलो जल्दी फ्रेश हो जाओ,जीशान हम लोग का इन्तजार कर रहा है.... वह बहुत खुश है तुमसे ,,, तुम्हारी हर अदा ने उसको दीवाना बना दिया है...
रंजना- हाँ, याद आया , वह रात भी तो यहाँ आया था, शायद उसने मुझे ऑफर भी किया था... बस कुछ -कुछ याद आ रही है... पता नहीं , उसने क्या कहा था ? शायद वह मेरे शरीर से स्पर्श भी कर रहा था... रमेश, कहीं उसने मेरी इज्जत तो नही लूटी न ? चलो, मैं भले ही मदहोश थी मगर तुम तो होश में थे....
रमेश- हाँ, डीयर , मैं बिल्कुल होश में था.... मुझे सब कुछ मालूम है... तुम किसी ग़लत फहमी की शिकार मत होना... तुम मेरी जान हो, भला कुछ ग़लत मैं कैसे होने दूंगा? वो तो तुमने ही जीशान को स्वीकृति दी थी, मैं उसकी दोस्त की प्यास को शांत कर रहा था, तुम और जीशान मौज मस्ती में मगन थे.... अब तुम्हारी खुशियों की खातिर मैं इनकार कैसे करता ? वैसे पार्टनर बदलना अब नोर्मल काम हो गया है....
रंजना- अच्छा, याद आया ... अब ध्यान आया ? मैं तुमसे बहुत नाराज हूँ रमेश, तुमने मुझे जीशान के साथ सोने के लिए विवश किया... तुम्ही ने ऐसा माहोल तैयार किया की मैं किसी भी हालत में इनकार नहीं कर पाऊँ, एक तरफ़ तुम मुझे शादी करने की बात करते हो, दूसरी तरफ़ अपनी होने वाली पत्नी को महज कुछ रुपयों की खातिर ही अपने किसी दोस्त के सामने परोस देते हो.....
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