महिलाओं का दिल बेहद कोमल होता है... रमेश भी रंजना की इन्हीं कोमल भावनाओं का ग़लत फायदा उठा रहा था... वह जानता था की असलियत क्या है ? उसने रंजना के बहुत सारे फोटो आपत्तिजनक अवस्था में खींच रखे थे... उनके सहारे वह उसको ब्लेकमेल करने की इच्छा रखता था... लेकिन यह बिल्कुल लास्ट की बात थी... जब मामला हद से गुजर जाता तब वह इस हथियार का इस्तेमाल करने की सोच रहा था... उसने योजना बना रखी थी की अगर रंजना किसी भी हद तक नहीं मणी तो उसके अन्तरंग फोटो का इस्तेमाल कर उसको धमकाया जायेगा... मगर वह तो बिना किसी धमकी के ही मान गयी थी और रमेश के साथ खंडाला, लोनावाला के लिए रवाना हो गयी थी... उस दिन मौसम बहुत सुहाना था... जीशान ने बेहद आकर्षक कपड़े पहन रखे थे... उसने अपने बाल भी अच्छे अंदाज में बना रखे थे... दिन में रंजना ने महसूस किया की वह बहुत सुंदर था... उसकी आंखों में भी गज़ब की चमक थी... रंजना भांप गयी की जीशान उसको लेकर गंभीर हो रहा था, वह उसको बार-बार देख रहा था... रंजना भी कनखियों से उसको घूर लिया करती थी... उन्होंने रास्ते में नाश्ता लिया और जब वे लोनावाला पहुंचे तो बादल घिर आए थे, हलकी बूंदा बांदी हो रही थी... रंजना का मन प्रसन्न हो गया... इस बीच जीशान ने गाडी में ही व्हिस्की की बोतल खोल ली... जीशान के साथ इस समय दूसरी लड़की थी... पहनावे और बातचीत से वह अच्छे खान दान की लग रही थी... रमेश पीने में माहिर था... बोतल खुलते ही वह उस पर टूट पड़ा... सब कुछ चोरी छिपके किया जा रहा था... रंजना को भी व्हिस्की ऑफर की गयी... ना ना करके आख़िर वह भी मचल ही गयी... दो पैग पीते ही वह मूड में आने लगी... जीशान उसको खूब उकसा रहा था... उसको बार-बार चुटकुले सुना रहा था... इसके बाद उन्होंने ऊँट की सवारी की... सवारी करते वक्त जीशान और रंजना साथ-साथ बैठे हुए थे... जब ऊँट कदम रखता
तोjईशान और रंजना के जिस्म आपस में टकरा जाते थे, इससे उन दोनों के जिस्म में बिजली सी कौंधने लगती... रंजना पीछे बैठी थी... उसकी सख्त गोलाईयां जब जीशान की पीठ से टकराती तो वह उत्तेजना से भर उठता था... उसने रंजना से बातचीत करने के उद्देश्य से कहा -
- देखो न, यहाँ का नजारा कितना खूसूरत है...ये घाटियाँ कितनी मन मोहक हैं ? और वहाँ दूर जो झोपडे दिख रहे हैं, वहाँ भी लोग रहते हैं... यह नजारा सिर्फ़ देखने में अच्छा है मगर जो लोग यहाँ पर रहते हैं, उनके लिए बड़ा कष्ट कर है... कभी सोचता हूँ की ये लोग मुंबई या फ़िर किसी दूसरे शहर में आकर क्यों नहीं रह लेते ? कभी कभी सोचता हूँ की अगर सभी मुंबई में आ गए तो कैसे चलेगा ?
रंजना- हाँ, ठीक ही तो है... ऐसे द्रश्य देखने में हियो सुंदर हैं... ये लोग इस झरने का पानी ही पीते होंगे... बारिस में इन लोगों को बड़ी परेशानी होती होगी... बचों को पढाने भी दिक्कतें आती होंगी....
जीशान -क्या तुम इससे पहले भी यहाँ आ चुकी हो ?
रंजना-हाँ , जब छोटी थी तब कई बार आई थी, मगर मम्मी पापा के साथ ही आती थी...
जीशान- तुम्हारे चेहरे पर गज़ब की चमक है... बहुत सुंदर हो तुम........
रंजना- मुझे पटाने की कोशिश कर रहे हो ?
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