Sunday, January 25, 2009

रंगीला रतन, भाग-88

वह अपने स्वर्णिम दिनों को याद कर खुश हो रहा था, वह सोचने लगा की उसके पास भी थोड़ा पैसा होता तो वह भी अपनी मनपसंद की लड़की से शादी कर सकता था... उसे याद है जब पढाई में सबसे तेज होने के बावजूद भी कोई उसका रिश्ता करने के लिए तैयार नहीं था, जबकि उसके कुछ ऐसे दोस्त थे जो शक्ल -अक्ल में तो बेहद बेकार थे मगर उनके घर की माली हालत अच्छी थी... इसी कारण उनकी मनपसंद लड़की से शादी हो गयी और वह फिसड्डी रह गया... वह अच्छी तरह कल्पना कर सकता था की इस समय जीशान और रंजना क्या कर रहे होंगे ... एक बार तो उसकी किस्मत इसी चमकी थी की एक विदेशी टूरिस्ट ने नशे में धुत होकर उसके साथ सेक्स करने का ऑफर भी दे दिया था... पहले तो वह सकपका गया था, उस महिला टूरिस्ट की उम्र ४० के लगभग थी... उसने इतने उत्तेजक वस्त्र पहन रखे थे की जो कोई भी उसको देखता ,वह दीवाना होकर रह जाता था... उसने पहले इनकार कर दिया था, घर में बीवी मौजूद थी... उसको ज्यादा कोई परेशानी नहीं थी... लेकिन जब उस कामोत्तेजक महिला ने अपनी मादक अदाएं दिखानी शुरू किन तो वह पिघल गया...

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