- ये क्या कर रहे हो रमेश, आज बिल्कुल मजा नहीं आ रहा है... यह समय मुझे बेचैन किए दे रहा है... यूँ लगता है जैसे की मेरा बदन फट जायेगा... दिल जोर-जोर से धड़क रहा है...सुनो दिल की धड़कनें...देखों न...
रमेश ने पुनः उसकी गोलाइयों का मर्दन करना शुरू कर दिया... डौली की आँखें सुर्ख लाल हो रही थीं... उसका बदन अकड़ रहा था... रमेश उसके जिस्म से लिपटकर उसकी कामोत्तेजना को बढ़ाने का काम करने लगा... बाहर बरसात और भी तेज होने लगी... उधर जीशान और रंजना झाडियों में एक दूसरे से लिपटे हुए थे... वर्षा का पानी उनके जिस्म की गरमी को कम करने के बजाय और बढ़ा रहा था, दोनों बुरी तरह हांफ रहे थे... वे इस वक्त ऐसी झाडी में छिपे थे, जहाँ उन्हें बाहर से देखना मुश्किल था... ऊँट का मालिक बड़ा रसिक था... वह जानता था की जीशान और रंजना अकेले में क्याकर रहे होंगे... यही सोच-सोचकर उसकी भावनाएं भड़क रही थीं...उसने मन की बात रंजना से कहदी-
- आज पता नहीं मुझे क्या हो रहा है... तुमने मेरे समूचे वजूद पर जादू सा कर दिया है... मेरे दिल में जबरदस्त हलचल सी हो गयी है... मैं इतना उत्तेजक पहले कभी नहीं हुआ... तुम्हें स्पर्श करते ही मुझे नशा जैसा होने लगता है... मैं बेकाबू होने लगता हूँ... चाहकर भी अपने आपको संभाल नहीं पाटा ...
रंजना- तुमने तो मेरे दिल की बात छीन ली यार, मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल है, मैं कोई पहली बार तो शराब पी नहीं रही हूँ, इससे पहले भी मैंने खूब जमकर शराब पी है, लेकिन आज जैसा हाल हुआ है वैसा तो नहीं होता... हाँ, कल भी तुमसे मिलने के बाद मुझे इसी तरह की परेशानी महसूस हुई थी... अब सब कुछ याद आ रहा है... कल भी तुमने और हमने सहवास का सुख भोग था... मगर आज दोपहर को मुझे ये सब याद क्यों नहीं आ रहा था ? शायद इसलिए क्योंकि नशा उतारते ही भूल गयी होउंगी... मगर इतनी बड़ी बात भूल कैसे सकती हूँ...
जीशान- वो सब छोडो, ये कहो की ऐसा करके तुम्हें कैसा लगा ? क्या मैं तुम्हारे दोस्त रमेश की तरह तुम्हें बिस्तर पर सुख नहीं दे सकता ? कल तो तुमने मेरी मर्दानगी की बहुत तारीफ़ की थी... मैंने जब यही बात होश में दोहराए तो तुम मानने को तैयार ही ने अहं हुईं, हो सकता है कल भी यह नहीं मानो की हम दोनों ने इस जंगल में मंगल मनाया है... अगर कहो तो इन हसीं ओपलों की कुछ तस्बीरें खींच लूँ, मगर कैसे ? मोबाइल , कैमरा सब तो गाडी में ही रह गए हैं... अब वहाँ जाना पड़ेगा तो बेकार ही मूड ख़राब हो जायेगा... सब कुछ अपने समय पर ही अच्छा लगता है... मोहब्बत के समय पर मोहब्बत और खाने के समय पर खाना खा लिया जाना चाहिए, अगर भजन के समय कोई शराब पिए तो कितना बुरा लगता है , इसी प्रकार अगर कोई शराब के समय भजन सुनने की इच्छा व्यक्त करे तो अजीब लगता
ranjana - तुम मिसाइल बहुत अच्छी देते हो, कोई फेल ही नहीं कर सकता... एकदम जबरदस्त...
जीशान- इसको मिसाइल नहीं मिसाल कहते हैं...मिसाल मतलब उदाहरण... सन्दर्भ....
डौली- ठीक है, चाहे जो भी हो , मुझे तो बस तुम्हारा ही नाम याद है, तुम्हारे सिवाय मैं सब कुछ भूल गयी हूँ...अब मुझे और कुछ भी याद नहीं... मैं प्रेम दीवानी बन चुकी हूँ... अरे, ये बताओ की अपना रमेश कहाँ होगा इस वक्त ?
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