लवगुरु-
अफ्रीकन- मंजूर है. रुपये देने में हमें कोई गुरेज नहीं है. वे रुपये अगले एकाउंट में हम रानी से काट लेंगे .
चम्पा- अच्छा ये बताओ अगर मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे देश चलती हूँ तो मुझे महीने की तनख्वाह कितनी मिलेगी ?
अफ्रीकन- भारत के एक लाख रुपये. क्योंकि जिस ठेकेदार के पास तुम्हें रखा जाएगा वह भी तो अपना मुनाफ़ा कमाएगा. ग्राहक आये न आये यह टेंशन भी उसीकी होगी .
चम्पा- मेरा जुगाड लगाओ , मैं चलने के लिए तैयार हूँ. मेरे साथ मेरा पति भी रहेगा तो कोई दिक्कत नहीं ?
अफ्रीकन- दिक्कत क्या होगी , उसकी भी नौकरी लग जायेगी. वहाँ पर कई वैश्यालय ऐसे हैं जिनमे मर्द भी वैश्या बनकर अपनी सेवायें देते हैं. अगर वे शारीरिक सम्बन्ध बना सकते हैं तो उनको भी पगार मिल सकती है.
वहाँ पर बहुत से टूरिस्ट ऐसे आते हैं जों मर्द होते हैं मगर मर्द वैश्या की तलाश में रहते हैं.
चम्पा- ये बातें मेरे लिए नई और विस्मयकारी हैं. मैं तो कभी सोच भी नहीं सकती थी कि ऐसा होता होगा. दुनिया में न अजाने क्या क्या होता रहता है. हम एक कोने में पड़े रहते हैं.
अफ्रीकन- क्या तुम्हें अब तक यह जानकारी नहीं थी कि रानी लड़कियां सप्लाई करने वाली बहुत बड़ी दलाल है और इसके समबन्ध कई देशों से हैं. यह ब्लू फिल्म बनाने वाली बहुत बड़ी प्रोडूसर भी है.
रानी-० इसका मतलब यह हमारी भी ब्लू फिल्म बनाती होगी क्या ?
अफ्रीकन- इसको अब यह एहसास मत होने देना कि हमने आपको सब कुछ बता दिया है. जितनी जल्दी हो सके इससे किनारा कर लों . ये न समझना कि मैं तुम्हें बहका रहा हूँ , बल्कि यह एक सत्य है .बताना इसलिए जरूरी था क्योंकि तुमने
हमें सत्य बता दिया है. जब तुम हमारे साथ सम्बन्ध बना लेतीं और तब यह मालूम पड़ता कि किसीने तुम्हारे जिस्म का सौदा किया था तो बड़ी ठेस लगती , तुम हमें बड दुआएं देतीं. रानी कितनी हरामी चीज है हम जानते हैं, तुम्हें इसका इल्म नहीं है .
मुंशीजी और डोली फिल्म को देखकर दांग थे. मुंशीजी ने अपने जीवन में एक ही काम किया था , यह था. बिजनेस. बिजनेस में उनके जैसा ज्ञानी उनके सर्कल में कोई और नहीं ठा. मगर उन्होंने दुनिया डारी नहीं देखी थी. फिल्म में यह सब देखकर
उसके रौंगटे खड़े हो रहे थे. रानी को जिस तरह दौलतमंद होते हुए भी वैश्यावृत्ति में लिप्त दिखाया गया था उससे वह चकित था जबकि डोली के होठों पर मुस्कान तैर रही थी. डोली ने गहरी सांस छोड़कर कहा-
- ओफ्फ्फ.... कुछ समझ में आया ? मैंने देखी है यह फिल्म . जानते हो आगे क्या दिखाया गया है ?
मुंशीजी- बिलकुल नहीं. मैं अनुमान नहीं लगाया सकता, यहाँ तक कि सोच भी नहीं सकता. शायद हकीकत में ऐओसा कुछ नहीं होता होगा ? जिसके पास दौलत हो, ऐशो आराम भरी जिंदगी हो उसे घिनौना काम करने के क्या जरूरत है ?
डोली- हाँ, मगर फ़िल्में भी समाज में हो रही घटनाओं से प्रेरित होकर ही बनती हैं , इसीलिए तो फिल्मों को समाज का आइना कहा जाता है. इस फिल्म में आगे चलकर यह रहस्योदघाटन होता है कि रानी जिस्म फरोशी के धंधे से हर माह
लाखों -करोड़ों रुपये कमाती थी. वह गाँव की सीधी -सादी लड़कियों को बहला-फुसलाकर इस धंधे में डाल डालती थी. दौलत की हवस में उसने हजारों लड़कियों को नर्क में धकेल दिया था.
मुंशीजी- ओह, दौलत की हवस इंसान को पतन की ओर ले जाती है. फिर क्या होता है फिल्म में , शोर्ट में बताओ , क्योंकि आगे इस फिल्म को देखने का मेरा कोई इरादा नहीं है.
डोली- आखिर में अंत बुरा ही होता है. उसकी बेटी आत्महत्या कर लेती है और रानी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है. मजे की बात तो ये है कि जिस रानी को अपनी दौलत पर बहुत ज्यादा घमंड था वही रानी जमानत तक के लिए
तरस जाती है. अदालत उसे जमानत पर रिहा करने आदेश देती है मगर एक माह तक उसे बिना जमानती के जेल में रहना पड़ता है. तब केशव जाकर उसकी बेल लेता है.
मुंशीजी- तो क्या वह बुरे कामों से तौबा कर लेती है ?
डोली इतना सब उसमे नहीं दिखाई जाता . फिल्म खत्म हो जाती है. मजेदार फिल्म है , पता नहीं आपको क्यों पसंद नहीं आई ?
मुंशीजी- अब हम लोग आराम करें तो बेहतर होगा. मुझे कल लवगुरु के पास जाना है. आज का सपना उन्हें बताना है. उसके लिए सपा देखना भी जरूरी है.
डडोली - जैसी आपकी इच्छा, वैसे भी अब तो जीवन भर का साथ निभाना है. गुड नाईट....
सुबह मुंशीजी देर से उठे मगर जल्दी तैयार होकर लवगुरु केकार्यालय जा पहुंचे . लवगुरु ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया. बोले-
-थके हुए लगते हैं मुंशीजी, प्यार का व्रत लेकर आये थे और वासना के भंवर जाल में उलझ गए. अगर तुम किसी तरुनी से प्रेम करके आते तो तुम्हारे चेहरे पर बड़ी चमक होती, मोहब्बत का नूर ऐसा ही होता है. मगर ?
मुंशीजी- आपको कैसे मालूम हुआ ?
लवगुरु- ,मैं यहाँ रोजाना सैकड़ों लोगों से मिलता हूँ, उनकी बात सुनता और समझता हूँ. तुम फेल हो गए हो मुंशीजी, अब मुझे नहीं लगता कि तुम्हें तुम्हारी छबीली मिल पायेगी . सच्चा प्यार हो तो जरूर कबूल होता है मगर ?
मुंशीजी- आखिर मैंने किया क्या है ? मुझे छबीली से भी सुन्दर एक युवती मिल गयी और ....
लवगुरु- जिसके साथ तुम रात बिताकर आ रहे हो वह यहाँ की एक नंबर की वैश्या थी. तुम प्रेम की परिक्षा में फेल हो चुके हो. लवगुरु कभी किसीको गलत राय नहीं देते. अमिन तुम्हारी कोई मदद नहीं कर पाउँगा.
(कल से पढ़ें एक और धारावाहिक कहानी )
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