तन्हाई -10
शालिनी- तो ? मै इससे कब मुकर रही हूँ. ?
सलीम- त त तुमने मेरा हाथ पकड़ा है और अब इतने लोगों के बीच मुझे लिए चली जा रही हो ?
शालिनी- हाँ, यह हमारा महल है, यहाँ पर हमारा भाई नहीं आएगा . सिर्फ तुम और हम यहाँ रहेंगे . तुम्हारे स्वागत के लिए ही यह सब इंतजाम किया गया है. कैसा लगा ? यहाँ पर चाहो तो तुम अपनी पसंद का कोई गीत सुन
सकते हो. अपनी पसंद की किसी धुन पर थिरक सकते हो. किसी भी दरबारी से कोई भी हुक्म कर सकते हो, फ़ौरन तामील होगी. कुछ भी जरूरत हो तो इशारा भर करने की देर है.
सलीम- यहाँ इत्तना बड़ा शाही महल आपकाहै ? मेरा मतलब है कि बहुत मंहगा होगा. इसका खर्च तो राजा-महाराजा ही सहन कर सकते हैं. क्या आप भी महारानी हैं ?
शालिनी- अगर तुम सिर्फ रानी कहो वो भी अपने दिल की , तब भी चलेगा, यह सब अब आपका है सलीम...यह जिस्म, यह दिल , दिमाग घर या महल जों भी है, सब कुछ आपका ही है. इसे जिस तरह और जैसे चाहो भोग सकते हो .
सलीम- मुझे इस बात की हैरत है कि आज का जमाने में भी इस तरह के पुराने राजा -महाराजाओं के महल हैं. यह अजीब दुनिया नजर आती है. इस तरह का नजारा तो मैंने कभी पहले नहीं देखा है. ये हम कहाँ आ गए हैं ?
शालिनी- फ़िक्र न करो मेरी जान . यह मोहब्बत की ही दुनिया है. यह हमारा अपना महल है सलीम. मैं राजकुमारी हूँ और तुम राजकुमार . अंदर चलकर तुम्हारे कपडे बदलवाये जायेंगे . तुम्हारी वेश भूचा चेंज होते ही तुम भी राजा-महाराजा
बन जाओगे , ऐसा है कि तुम सबसे अलग हो, मेरे खोये हुए प्यार हो . मैं न जाने कबसे तालाश रही थी तुमको .
सलीम- लगता तो मुझे भी ऐसा ही है, मैं और तुम किसी जन्म में प्रेमी -प्रेमिका रहे होंगे , किसी तरह से हम उस जन्म में नहीं मिल पाए तो इस जन्म में हमारा मिलना हो गया . क्या अब हमें वापस नहीं लौटना चाहिए ?
शालिनी- अब अभिषेक और बरात को भूल जाइए , वहाँ कुछ नहीं रखा है. यह देखिये हमारा कमरा . इसको रंग महल कह सकते हैं. कुंवारी लड़कियों के लिए हमारे यहाँ यह महल नहीं बनाया जाता है मगर मैं जानती थी कि तुम जरूर
आओगे और बहुत जल्द आओगे तभी तो मैंने जिद करके यह रंग महल बनवाया था . इसमें आपको सभी सुविधाएँ मिलेंगी. यहाँ पीने के लिए सोमरस की व्यवस्था है यानि की शराब यहाँ पर अच्छी किस्म की मिल सकती है. खाने में भी
छत्तीस प्रकार के भोजन का आनंद उठाया जा सकता है.
सलीम का दिमाग तेजी के साथ घूम रहा था. शालिनी कामुक अदा से मुस्करा रही थी. उसका बदन पहले से भी ज्यादा उतीजक लग रहा था. वह उसका हाथ पकडे रंगमहल में प्रवेश कर गया . उसने फ्रेश होने की इच्छा प्रकट की तो
उसके साथ-साथ शालिनी भी बाथरूम में चली आई . सलीम ने अपने कपडे उतारे तो शालिनी ने भी उसका अनुसरण किया. दोनों जब बिलकुल नग्न हो गए तो हरकतों पर भी उअतर आये. सलीम उसके यौवन उभारों को आहिस्ता
-आहिस्ता सहला रहा था . शालिनी हंस रही थी. अपने आप फौवारा चलना शुरू हो गया. सलीम ने ध्यान दिया कि वहा पर सब कुछ अपने आप घटीत हो रहा था. अपने आप दरवाजे खुल जाते और फिर बंद भी हो जाया करते थे . इसी
तरह अपने आप लाईट भी जल या बुझ जाया करती थीं,. यह सब कुछ इतनी तेजी के साथ हो रहा था कि सलीम को सोचने विचारने का अवसर ही नहीं मिल रहा था. सलीन ने सवाल किया-
- यहाँ पर सब कुछ स्वचलित कैसे है ? ऐसा लगता है जैसे कि पहले से ही सब कुछ आदेशित कर दिया गया हो.
शालिनी- आप यहाँ के स्वामी जों ठहरी, इसी कारण यहाँ की हर वस्तु आपकी इच्छाओं का आदर करते हुए अपने आप सक्रीय हो जाती है , जों भी विचार तुम्हारे मन में उभरेगा यहाँ ठीक वैसा ही हो जाएगा , जैसे कि यदि तुम सोचते हो कि
ये लाइटें ऑफ हो जाएँ तो तुरंत आदेश का पालन होगा, इसी तारह से अगर आप सोचते हैं कि खाना होना चाहिए तो कुछ देर में ही मन पसंद का भोजन तैयार होकर टेबल पर सज जाएगा .
सलीम- यह जादू कैसे हो रहा है मेरी जान ? आ लिया ,
शालिनी- यह सब धीरे-धीरे जान जाओगे , फ़िलहाल यहाँ की मेहमान नवाजी का आनंद उठाइये , इतना ही समझ लीजिए कि हम लोग टेक्नीकली बड़े स्ट्रोंग हैं.
सलीम -कुछ देर पहले जब आप मिली थीं तब दिखने में बिलकुल साधारण थीं, आपके चेहरे पर हया के भाव थे, मगर अब बिलकुल इसके विरुद्ध लग रही हो. आपका स्वभाव भी बदला- बदला सा लग रहा है. इतना बड़ा परिवर्तन देखने
के बाद हैरत में भी हूँ और दहशत में भी. ऐसा इसलिए भी क्योंकि मैंने ये सब मंज़र देखा नहीं है. मैं भूत -प्रेतों की फ़िल्में भी बहुत देखता हूँ , मैंने रामसे ब्रदर्स और राम गोपाल वर्मा की कोई भी डरावनी फिल्म नहीं छोड़ी है.
जिसको थियेटर में नहीं देख पाता उसे सीडी लाकर घर पर देख लेता हूँ, जासूसी उपन्यास पढ़ने का भी शौक़ीन हूँ.
शालिनी- कुछ न कहिये , मैं समझ गयी. इसी कारण ऐसा हो रहा है. तुम्हारे दिमाग में भूत प्रेत बसे हुए हैं. मेरे करीब आओ , मेरे होठों पर अपने ये गर्म होठ रख दो . तब बताओ कि क्या भूत-प्रेतों से ऐसे प्यार किया जाता है .
जहाँ तक खुलने का सवाल अहि तो उसकी बात ये है कि जब पहली बार तुमसे मिली तो इतनी खुली हुई नहीं थी. मुझे बातचीत करने में झिझक हो रही थी , मगर जब यह जाना कि तुम मेरे बिछड़े हुए प्रेमी हो तो फ़ौरन मान
तुमसे प्रेम कर्न्मे लगी. तुम्हें अपने दिल में बसा यहाँ तक कि इस आत्मा में बसा लिया. मुझे तुम्हारी आत्मा में जगह मिलेगी न ?
सलीम- मेरे पास जों कुछ भी है, वह तुम्हारा ही है . दिल , दिमाग और आत्मा सब कुछ तुम्हारा ही है .
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