Wednesday, December 15, 2010

तन्हाई -१२
सलीम- वहाँ क्या है ? कुछ तकलीफ है क्या ?
शालिनी- हाँ, मैंने सूना है कि वहाँ पर बुरी आत्माएं रहती हैं. वे नुक्सान पहुंचा सकती हैं. मेरी हद जहां तक है, वहाँ कोई ताकत मेरे सलीम को टच भी नहीं कर सकती .
सलीम- ठीक है, मैं कभी उस दिशा में नहीं जाउंगा .
शालिनी- ऐसे नहीं मानूंगी, मेरे सिर पर रखकर हाथ , तब कसम खाओ कि कभी उस तरफ नहीं जाओगे .
सलीम- हाँ, बाबा नहीं जाउंगा. तुम तो बेवजह डर रही हो. मुझे कोई बुरी आत्मा से डर नहीं लगता है. तुम्हारे रहते मेरा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता.
शालिनी- मुझ पर इतना भरोसा करने लगे हो सलीम ?
सलीम- हाँ , और इससे भी ज्यादा प्रेम करने लगा हूँ.
शालिनी- ये गिलास खत्म करो, दूसरा पैग बनवाओ फिर हम दोनों प्यार के समुन्दर में गोते लगाएंगे . आज जी भरके पीने और जी भरके जीने की तमन्ना है. अगर तुम मेरे दिल में झाँक सको , मेरी भावनाओं को समझ सको
सलीम- मैं सपना सा देख रहा हूँ, मुझे विश्वाश ही नहीं होता है कि आप के जैसी स्वर्ग की हूर परी से भी सुन्दर हसीना मुझे इतना चाह सकती है. मेरा शक भी ऐसे ही नहीं है. मेरे मोहल्ले की सभी लड़कियां मुझसे बात तो करती
हैं लेकिन वे दोस्ती दूसरे लड़कों से करती हैं,. कभी किसी लड़की ने मेरे प्रेम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. कभी नहीं. इसलिए मेरे साथी अक्सर मेरा मजाक भी उड़ाते रहे हैं , मगर तुम ... मेरा मतलब है कि आप...
शालिनी- ये आप-आप तुम -तुम क्या लगा रखी है. मेरा नाम बोलो न, और सिर्फ तुम कहके पुकारो. आप से अजनबी जैसा महसूस होने लगता है. और ये सपने वाली बात भी दिमाग से निकाल दो. हम दोनों होश में हैं और जाग रहे हैं.
यहाँ तुम्हारे लिए नया माहौल है, इसलिए कुछ फील हो रहा होगा. अगर चाहो तो तुम थोड़ी देर सैर करके आ सकते हो. तुम्हारे साथ सुरक्षा गार्ड रहेंगे . जब तक तुम मेरे मेहमान हो तब तक तुम्हें बहुत अच्छा ट्रीटमेंट मिलेगा.
ठीक वैसा ही जैसे एक राजा के यहाँ दूसरे राजा को मिलता है. तुम भी तो आखिर राजकुमार ही हो ना. ध्यान करो वो तुम्हारा हमारा प्यार. जब हम बागों की सैर करने जाते थे , मैं थक गयी तो तुम मुझे अपने कंधों पर उठा लिया
करते थे. मैं चिल्लाती तो कभी-कभार तुम मुझे थप्पड़ भी जड़ दिया करते थे. कुछ याद आया ?
सलीम- बिलकुल नहीं, कोशिश तो कर रहा हूँ लेकिन याद नहीं आ रहा. दिमाग में कुछ हलचल सी हो रही है.
शालिनी- इस हलचल को तेज करो. चलो मेरे साथ , तुम्हें वो बगीचा दिखाती हूँ जहाँ पर हम प्यार भरी बात किया करते थे , वो पलंग भी दिखा न , इसी पर हमने पहली बार शारीरिक सम्बन्ध बनाये थे .
सलीम- पलंग , ये पलंग कहाँ था ? जब हम पार्क में थे तो वहाँ पर तो हम लोग खड़े हुए थे. खड़े होकर ही हमने सुहागरात मनाई थी.
शालिनी- ओह, तो तुम थोड़ी देर पहले की बात कर रहे हो .यह हमारी पहली सुहागरात नहीं है. इससे पहले तो हम कई बार जिस्मानी सुख वसूल चुके हैं. भूल गए ज्या ?
सलीम- मुझे कुछ याद नहीं आ रहा है. ऐसा लगता है जैसे दिमाग में कुछ टकरा रहा है. जैसे हम कहीं मिले हैं, जैसे कभी हम दोनों एक ही थे , जैसे कभी सतह-साथ हम लोगों ने समय बिताया है.
शालिनी- हाँ, याद करो, मैं न कहती थी कि कोशिश करोगे तो सब कुछ याद आ जाएगा , आ गया न याद ?
सलीम- हाँ , मगर कुछ स्पष्ट ध्यान नहीं आता ? हम लोग कहाँ मिलते थे ? वहां -पर चलकर देखते हैं, शायद वहाँ कुछ याद आ जाए .
शालिनी बहुत खुश थी, वह उसका हाथ थामे दौडती -दौडती बगीचे तक आ गयी. वहाँ पर तरह-तरह के फूलों की सुगंध थी, बहुत मीठा संगीत बज रहा था, कुछ ऐसा जैसे कि तितलियाँ गा रही हों. कोयल अलाप ले रही हो .
सलीम उस सबको हक्का बका होकर देखें लगा,. जेहन पर जोर डालकर याद करने लगा. कभी वह शालिनी के चेहरे को देखता था तो कभी अपने आपको . उसकी मुस्कान उसे जानी पहचानी लगती थी , लगता था जैसे वह उसकी
पुरानी करीबी है , मगर अगले ही पल उसकी चेतना को ऐसा महसूस होता जैसे कि वह जों कुछ सोच रहा है, शराब के नशे में ही सोच रहा है. और फिर इसी उधेड़बुन में वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाता था.
शालिनी उसको ध्यान दिलाने की कोशिश करती थी, उसे छूकर अपनापन का एहसास कराती थी और जब भी उसे ध्यान नहीं आया तो शालिनी ने उसके होठों से अपने दहकते हुए सुर्ख होठ सटा दिए. सलीम मर्द था और किसी भी
हालत में कोई भी मर्द महिलाओं के चेलेंज को स्वीकारने में समय बर्बाद नहीं करता . सलीम ने भी शालिनी को कसकर पकड़ लिया और नरम मुलायम घास पर उसे नीचे गिरा लिया. शालिनी खूब हंस रही थी और उसकी आवाज
सलीम की आत्मा तक को आंदोलित करने लगी. एक जानी पहचानी हंसी थी . उसने शालिनी के सीने के उभारों को आहिस्ता -आहिस्ता दबाना शुरू कर दिया , शालिनी ने पूछा-
-अब ध्यान आया कि इसी तारह तुम मुझसे प्यार किया करते थे , एकांत के क्षणों में तुम इन्हीं गोलाइयों से खेला करते थे .
सलीम- और शारीरिक सम्बन्ध कैसे बनाते थे, यह भी तो बताओ.
शालिनी- अभी तक भी तुम पुरानी वाली शरारत को नहीं भूल पाए हो

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