तन्हाई -7
इससे अच्छा अवसर हमें और कभी नहीं मिल सकता.
शालिनी- शब्दों में समय मत बर्बाद करो, जितनी जल्दी हो सके यहाँ से निकल लों. अगर किसीने देख लिया तो मुश्किल हो जाएगा .
सलीम- अगर तुम मेरे साथ हो दुनिया की कोई भी ताकत हमारा बाल भी बांका नहीं कर सकती. दो प्यार करने वालों को आज तक मौत भीनहीं झुका पाई है .
शालिनी- शायद तुम भूल रहे हो, यह प्यार करने का वक्त है, भाषण देने का नहीं.
सलीम- प्यार जब सच्चा हो तो वक्त भी ठहर जाता है, हर पासा पलट जाता है. मोहब्बत अमर है और हमेशा रहेगी. डर -डर के प्यार करना कोई प्यार करना है . बेफिक्र होकर रहो .
शालिनी धैर्य से उसकी बात नहीं सुन सकी, और ज्यादा देर तक रुकना उसके वश में नहीं था, सच्चाई यह थी कि सलीम का भी अंदर से बुरा हाल था. डर के कारण उसके संवेदनशील अंग ठीक ढंग से सख्त नहीं हो प् रहा था .
इसी कारण वह भी थोड़ा समय लेना चाहता था ताकि तब तक उसका खास अंग सख्त हो जाए और वह शालिनी के साथ सुहागरात मना सके. मगर जब शालिनी ने महसूस किया कि वह कुछ ढीला पडा रहा है तो
वह खुद आगे बढ़कर सलीम के सीने से लिपट गयी . सलीम के गुप्त अंग में थोड़ी सी ताकत का संचार हुआ , वह उसके सीने को सहलाने लगा . आह-ऊह की ध्वनियाँ आने लगी. शालिनी तडपकर बोली-
-यह तुम क्या कर रहे हो ? कुछ गलत मत करना .
सलीम- प्यार करना गलत नहीं होता मेरी जान, तुम मेरी रग -रग में बस चुकी हो. देखो मेरा यह हथियार कैसा तड़प रहा है.
शालिनी- इससे तो मेरी जान ही निकल जायेगी , इसको दूर ही रखो. मैं चली ... प्ररोग्राम में मजा आ रहा होगा . सब लोग डांस कर रहे होंगे. ओके , बाय ... बाय ...
सलीम - अरे जाती कहाँ हो मेरी जान. आओ न करीब आओ. इसका आकार देखकर बेवजह डर रही हो. यह तो दोस्त है तुम्हारा. अगर तुम्हारी जगह पर कोई और लड़की होती तो खुशी से उछल पड़ती , क्योंकि इतना अच्छा दोस्त आसानी से
नहीं मिल पाता. तरसती हैं महिलायें इसके लिए .
शालिनी- अच्छा जी, आपको महिलाओं के बारे में बड़ी जानकारी है. कौन तरसती है बताइये , ज़रा मैं भी तो जानूं ?
सलीम - बहुत हैं मेरी जान, इसको सहलाकर तो देखो. प्यार से सहलाओ . आह....... हाँ , अब कुछ मजा आ रहा है. डांस -वांस सब भूल जाओगी , तुम्हें इतना मजा दूंगा . सुख की पराकाष्ठा तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मेरी है .
शालिनी- देखो, मैं थर -थर काँप रही हूँ, जब अभी से यह हाल है तो आगे चलकर क्या होगा , इसकी सहज कल्पना की जा सकती है. मुझे माफ करो बाबा... जाने दो.
सलीम ने देर करना उचित नहीं समझा. शालिनी को अपनी बांहों में भरकर उसकी [पेंट की जीप ढीली करदी और एक हाथ उसके तोप के अंदर डालकर गोलाइयों को दबाने लगा. उसने अंदाजा लगा लिया कि अगर वह इन्तजार करता
तो करता ही रहेगा, शालिनी कपडे उतारने के मूड में नहीं थी. वहाँ कपड़ा उतारना उचित भी नहीं था. क्योंकि कभी भी किसीके आने की आशंका थी. आखिरकार उसने झटपट काम करने का प्लान बनाया . उसकी बातों से शालीनी की भावनाएं
भी भड़क चुकी थीं, वह चाहती थी कि जों भी हो जल्दी से खत्म हो जाए. सलीम ने कामुकता भरी इतनी बातें की थीं कि उसके मन में भी सेक्स करने की इच्छा प्रबल हो चुकी थी. सलीम ने उसके होठों का रसपान किया तो शालिनी
और भी ज्यादा गर्म हो गयी . उसके जिस्म से गर्म लावा निकलने लगा . वह बोली-
-अब कब तक तडपाओगे , इस ज्वाला को जल्दी से शांत करदो और अपने घर जाओ.
सलीम- ये क्या बार- बार जाने की बातें करती हो . अब तो हमको जीवन भर साथ -साथ रहना होगा .
शालिनी- हाँ , यार तन की तब देखेंगे, फिलहाल जिसके लिए मुझे यहाँ पर रोक रखा है उस काम को तो पूरा करो वरना कोई आ जाएगा. किसीने देख लिया तो जीना हराम हो जाएगा हामारा .
वह कह ही रही थी कि सलीम ने अपने पाँव के पंजों को थोड़ा सा ऊपर करके शालिनी के यौवन द्वार पर अपना अंग रख दिया और उस जगह को रगड़ने लगा . शालिनी के बदन की आग अब और भी खतरनाक रूप धारण कर रही थी.
वह उत्तेजक आह भरते हुए उसका सहयोग कर रही थी. उसका शरीर ऐसे काँप रहा था जैसे उसको जूडी आ गयी हो, इसके बावजूद वह मैदान में डटी थी, कुछ देर बाद ही सलीन ने अपने खास अंग को उस सुरंग में प्रवेश कर दिया
जहां हमेशा चाहत का उजाला जगमगाता रहता है. शालिनी के मुख से चीख निकलते-निकलते बची . उसने सलीम को बहुत जोर से अपनी तरफ खींच लिया था. दोनों आनंद के सागर में गोते लगाने लगे. कामोत्तेजक
आहों के कारण सर्द माहौल भी गर्मी में तब्दील हो रहा था. वह उसका जोरदार साथ दे रही थी. सलीम ने पूछा-
-अब तो निकल गया न डर ? बेवजह खौफ खा रही थीं .
शालिनी- मेरी जान पर बनी है और तुम्हें न जाने क्या -क्या सूझ रहा है . ऐसा होता है क्या ?
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