बेवफा खंडहर वाली , भाग-२
सूरज- जी, सो तो ठीक है. दरअसल मैं पड़ोस के गाँव से आ रहा हूँ, अचानक मेरी बाइक खराब हो गयी और अब नजदीक कोई गैरेज भी दिखाई नहीं दे रहा है तो सोचा कि आज रात यहीं विश्राम करलूं . आप क्रेडिट कार्ड से पेमेंट
स्वीकार करते हैं क्या ? क्योंकि मैं कैश नहीं ला पाया. अगर आसपास कोई एटीएम हो तो भी काम चल सकता है,
लड़की - तुम पेमेंट की फ़िक्र क्यों करते हो ? वो तो हम ले ही लेंगे, हमारा ध्यान पेमेंट पर कम और सेवा पर ज्यादा होता है.
सूरज- शुक्रिया, ये तो अच्छी बात है मगर माफ कीजिये , इसके बावजूद आपके यहाँ उतने ग्राहक दिखाई नहीं देते. मैंने देखा कि यहाँ पर एक भी गाड़ी पार्क नहीं की गयी है .
लड़की - हाँ बात आपकी भी सही है . देखो, मौत और ग्राहक का कोई भरोसा नहीं होता. कौन कब आ जाए ?
सूरज - जी ... मौत ? ग्राहक ?
लड़की - हाँ, मेरा मतलब था कि कभी -कभी ऐसा हाल होता है कि ग्राहक शिकायत करते हैं कि उनकी गाड़ी पार्क करने के लिए जगह उपलब्ध नहीं है और कभीकभी ये हाल है कि आप शिकायत करते हैं कि गाडियां ही नहीं हैं.
खैर, ये गीले -शिकवे छोडिये और हुक्म करिये, बोलो क्या पसंद करोगे ? सर्दी जैसा माहौल हो गया है. कुछ स्पेशल पीना पसंद करेंगे. इसलिए पूछ रही हूँ कि होटल में शराब नआत हीं परोसी जाती, पड़ोस के गाँव से मंगाई जाती है .
अगर इच्छा हो तो ऑर्डर दिए देती हूँ, लड़का साइकिल लेकर जाएगा और कुछ ही देर में लेकर आ जाएगा , अगर और ज्यादा हुई तो लड़का जाने में आनाकानी करेगा . पैसों की फ़िक्र न करें, मैं दिए देती हूँ. हिसाब में लग जायेंगे
और वैसे भी ये तो कहानी-पीनी चीज है , खाइए -पीजिए , ऐश कीजिये. एश करो,
सूरज- रहने दीजिए , मुझे सुबह जल्दी निकलना होगा. अगर आँख नहीं खुली तो काम बिगड जाएगा. मुझे अर्जेंट काम से जाना है.
लड़की- सोचलो, जहां तक जगाने का सवाल है तो हम आपको जग्वा देंगे , अलार्म की व्यस्वस्था भी करा देंगे , मगर अपने गाँव जाकर हामारे होटल का नाम बदनाम मत करना. ये न कहना कि ठीक से खातिरदारी नहीं की,
सूरज - अगर ऐसी बात है तो एक क्वार्टर व्हिस्की मंगवा लीजिए . देखते हैं काम-धाम बाद में हो जाएगा.
लड़की- क्या एक क्वार्टर से ही काम चल जाएगा ? और जरूरत नहीं पड़ेगी ?
सूरज- बस मेरा इतना ही कोटा है, इससे ज्यादा तो मैं पी भी नहीं पाता हूँ. अरे पी खाके ड्रामा करना है कि आराम से सोना है.
लड़की- इस तन्हाई में , वीरान जंगल के होटल में पीने के बा अकेले सो पाओगे क्या ? क्या किसी साथी की जरूरत महसूस नहीं होगी ? मुझे नहीं लगता कि तुम इतने ज्यादा सीधे हो . खैर, जैसा चाहो. हम तो सिर्फ सेवा कर सकते हैं .
सूरज- तो क्या यहाँ पर ये सुविधा भी उपलब्ध है ? उसके लिए तो हार्ड किस ही देने होंगे न ?
लड़की - यहाँ न सही मगर दुनिया में हर चीज उपलब्ध है. आप सिर्फ आदेश करिये, उसे मुहैया कराने की जिम्मेदारी हमारी है. हम आसपास के इलाकों से खूबसूरत कन्या का बंदोबस्त करा देंगे. उसकी फीस आपके बिल में लगा लेंगे .
सूरज- वैसे कितनी फीस लेती होगी लड़की ? एक आइडिया रहेगा तो अच्छा होगा.
लड़की - तुम्हारे बजट में ही रहेगी बाबा. क्यों टेंशन लेते हो ? ५०० से लेकर ५ लाख तक का माल है. मगर ५ लाख वाली के भी तुम्हें ५०० ही देने होंगे. तुम आदमीज़रा अच्छे लगे , इसके लिए ये रियायत दे रही हूँ.
सूरज- ५ लाख ? सिर्फ एक रात के ? भला वे कौन सी लडकियां होती हैं ? क्या वे सोने से जड़ी होती हैं ?
लड़की- सोने से नहीं हीरों से कहो, उनकी देह के सामने सोना -चांदी तो क्या हीरों की चमक भी फीकी पद जाती है. ५ लाख एक रात के मांगने वाली लड़की आपके सामने बैठी है , और आप चाहें तो आपके लिए अवैलेवल है.
सूरज- कक्क्क क्या.......क्या कह रही हैं आप / आप भला ऐसा काम क्यों करेंगी ? आप तो ५ लाख ?????
लड़की- अरे रे .. . घबराते क्यों हो ? तुम ५०० ही दे देना . कोई बात नहीं , पहली ही नजर में तुम मुझे पसंद आ गए हो इसलिए यह छोट दे रही हूँ , बताया इसलिए क्योंकि तुम्हारे दिमाग में इससे सम्बंधित सवाल घूम रहे थे .
अब समझ में आया कि मैं क्वार्टर या अद्धा के बारे में क्यों पूछ रही थी ? क्योंकि तुम्हारी रूम पार्टनर को भी तो मदहोशी की जरूरत पड़ेगी ही न .
सूरज- समझ गया.तो ऐसा करो, एक बोतल पूरी मंगा लेते हैं , अगर बच गयी तो मेरी तरफ से आप रख लेना इमरजेंसी मी किसीके काम आ जायेगी .
लड़की- रात के दौरान और क्या -क्या पसंद करेंगे आप ? अगर डांस के शौक़ीन हैं तो फिर उस तरह की मफ्फिल सजाई जाए. और अगर कोई और शौक रखते हैं तो वो किया जाए.
सूरज- तुम इतनी खूबसूरत हो कि तुम्हारे रहते किसी और चीज की जरूरत ही नहीं है. सच कहता हूँ. तुम खुद ही परियों की रानी नजर आती हो.
लड़की- तारीफ़ के लिए शुक्रिया और अगर आपको यह नाचीज पसंद आ ही गयी है तो फिर आज आपको हम खुद नृत्य दिखाते हैं. आप आजके हमारे खास मेहमान हैं.
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