तन्हाई -5
सलीम- अगर तुम्हारे मन में मेरे लिए प्यार का अंकुर फूट चूका है तब तो दिमाग से दहशत कि निकाल फेंको और अपने आपको मालिक को समर्पित करदो . वे हमें अच्छी राह दिखाएँगे .
शालिनी- प्यार की राह में तकलीफें तो हैं ही साथ ही रुसवाइयां भी हैं. सबसे ज्यादा तकलीफ उस समय होती है जब हमसे अपने रूठ जाते हैं.
सलीम- उनको समझाने के हुनर चाहिए. अगर ठीक तरह से अपनी बात रखी जाए तो सामने वाला मान जाता है.
शालिनी- मुझमे इतनी कुव्वत नहीं है. मगर देख रही हूँ कि तुम इस काम को अंजाम दे सकते हो , मगर ऐसा न हो कि अभी यह जीभ चल रही हो और समय आने पर यह जीभ तालू से चिपक जाए .
सलीम -जरूरत पड़ने पर इसे काटकर तुम्हारे क़दमों में डाल सकता हूँ.
शालिनी- फिर क्या होगा ? तुम्हारी जीभ के काटने से तो मेरा ही नुक्सान होगा , न बाबा न ऐसा न करो. इसका सही इस्तेमाल करो.
शालिनी की तरफ से हरा सिग्नल मिलते ही सलीम ने उस हसीना को अपनी बांहों में उठा लिया और उस तरफ ले गया जहां कोई मौजूद नहीं था. अकेले में सलीम ने उसे नीचे उतारा और उसको अपनी बांहों में कैद कर
उसके सुर्ख होठों से अपने होठ सटा दिए. शालिनी को लगा जैसे उसके अंदर कुछ टूट रहा है .कुछ अजीब से परिवर्तन हो रहे हैं. क्या आपको भी ऐसा महसूस हो रहा है ?
सलीम- मेरी क्या पूछोगी, मेरा दिल ही जानता है, या मेरा मालिक. मैं इतना ज्यादा टेंशन में हूँ कि शब्दों में बयान नहीं कर सकता. मेरा दिल काबू में नहीं है. ऐसा लगता है जैसे कि यह आपका हो गया है. मेरे हाथों से
तो निकल गया. मैं कुछ बोलती हूँ और यह कुछ और बगावत कर देता है.
शालिनी- अच्छा , ऐसी बात है क्या ? तब तो दिल को अपना काम करने दो. कहते हैं कि जब आदमी कन्फ्यूज हो तो अपने आपको दिल के हवाले कर देना चाहिए , फिर जों हो सो हो.
सलीम-फिर कुछ न कहना , अगर शिकायत करोगी तो अच्छी बात नहीं होगी.
शालिनी- जरा दिल का हल सुनाओ तो सही, आखिर यह चाहता क्या है ?
सलीम- यह आपके आगोश में ख जाना चाहता है., इन झील सी आखों की गहराई में हमेशा के लिए डूब जाना चाहता है, तुम्हारे इस मदमस्त यौवन का रसपान करना चाहता है. इन सीने के उभारों को सहलाना और चूमना चाहता
है, तुम्हारे रसभरे होठों से होठ रगड़ना चाहता है. और जानती हो यह दिल क्या चाहता है ?
शालिनी- बस, बस समझ गयी . अच्छी तरह समझ गयी कि तुम्हारा दिल किस बदमाशी पर उतरा आया है. यहाँ पर न अजाने कितने लोग आये हुए हैं. कोई देख लेगा तो क्या होगा ?
सलीम- यहाँ तो अन्धेरा है , यहाँ कौन आएगा . सब लोग शादी की मस्ती में झूम रहे हैं. यहाँ पर कोई नहीं आएगा . जब तक आएगा तब तक हम प्यार कर चुके होंगे. वैसे भी यह ऐसी जगह है, जहां से हम तो
सबको अपनी तारफ आते हुए देख सकते हैं मगर हमें कोई नहीं देख पायेगा.
शालिनी. मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा है. ऐसा लगता है जैसे हम कोई गुनाह करने जा रहे हैं.
सलीम- यह तुम्हारा वहां है. इस वहां को अपने दिल से निकाल फेंको . मेरे होठों से अपने होठ तो मिलाओ , तब देखना किसी प्यार की चिंगारी उठती है. मस्ती का समुन्दर अठखेलियाँ करता मिलेगा /.
शालिनी- तुम बहुत अच्छी बातें करते हो. तुम पर भरोसा करती हूँ, जों करना है जल्दी कार्लो , अगर कोई आ गया तो गज़ब हो जाएगा .
सलीम- कुछ नहीं होगा मेरी जान, कुछ भी नहीं होगा. अपने पेंट को खोलकर ज़रा नीचे सरका दो. तोप को थोड़ा और तोप पर करो तो खड़े-खड़े ही मजा देने की कोशिश करता हूँ.
शालिनी- मैं कुछ नहीं करने वाली, सब जों करना खुद करो. मजा लोगे तुम और सजा भुगतूं मैं ?
सलीम- ये किसी बात करती हो मेरी जान. यह हम दोनों का सयुंक्त मजा होगा. अगर मुझे मजा आएगा तो उससे कई गुना ज्यादा मजा तुमको भी मिलने वाला है. सेक्स का सुख ऐसा सुख होता है कि इसके आगे
तुम सब कुछ भूल जओगेई, तुम्हारे मन से डर भी खत्म हो जाएगा. बस एक बार की बात है. इसके बाद तो तुम खुद मुझे ढूंढती फिरोगी .
शालिनी- इसका अर्थ तो ये हुआ कि तुम मुझसे पहले भी किसी और लडको को ऐसा सुख दे चुके हो, वरना तुम ये सब कैसे जानते हो ?
सलेम- अगर ब्याह नहीं किया तो बरात तो बहुत की हैं जानेमन, मैंने लोगों से इस बारे में सुन रखा है.
शालिनी- क्या तुम लोगों से इस समबन्ध में बातचीत कर लेते ही ? शर्म नहीं आती तुमको ?
सलीम- अरे इसमें शर्म की क्या बात है , जब तुम्हारी किसी सहेली की शादी होती होगी तो तुम उससे उसकी सुहागरात का अनुभव नहीं पूछती होंगी ?
शालिनी- नहीं , बिलकुल नहीं. मैंने तो कभी किसीसे इस बारे में कोई बात नहीं की.
सलीम- झूठ नहीं बोलूंगा , हम लोग तो आपस में सब शेयर करते हैं. तुम्हारी सहेली के साथ अभिषेक ने कैसे प्यार किया , कैसे उसे सुहागरात के लिए तैयार किया , अगर तुम चाहो तो उसे पूछकर
यह सब मैं तुमको बता सकता हूँ.
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