तन्हाई -4
शालिनी- जानती हूँ आप मेरी झूठी तारीफ़ कर रहे हैं. आप जैसे मर्दों की आदत होती है झूठी तारीफ़ करना. जबकि सच ये है कि सब लोग आपके दीवाने हुए जा रहे थे. लड़कियां आपकी तरफ फूल फेंक रही थीं, और आप उनकी तरफ मुस्कान
उछाल रहे थे. बड़े खुश थे न लड़कियों को देखकर ?
सलीम- अच्छा तो ये बात है . तभी तो कहूँ कि जलने की बू कहाँ से आरही है. तो आग सीधे दिल में लगी है ?
शालिनी- लगी है तो ? थोड़ी देर पहले कैसे वफ़ा करने की वायदे किये जा आरहे थे , और अभी से हसीनों को निशाना बनाना शुरू कर दिया . सब जानती हूँ मैं. दूध पीती बच्ची नहीं हूँ. जों मुझे बहका लोगे ?
सलीम- मेरा ध्यान तो आपकी तरह था , मुझे मालूम ही नहीं पड़ा कि कौन मेरी तरफ देख रही है और कौन मेरे पर फूल फेंक रही है.
शालिनी- अच्छा जी. बड़ी बात बनाते रहते हो ? बातूनी हो एक नंबर के. कहीं से फास्ट स्पीकिंग कोर्स किया है क्या ?
सलीम- जी नहीं, बिलकुल नहीं. ये कोर्स नहीं बल्कि मैंने प्यार कैसे किया जाए यह सीखने का कोर्स किया है. देखो न, कुछ ही देर में मैं तुम्हारे दिल में अपने दिल में इतनी जगह बाना चुकी हूँ कि किसी गैर लड़की की तरफ देखने भर
से ही तुम भडकने लगी हो , और ऐसा तभी होता है जब आदमी अपना हक समझता है . और हक तो तुम तभी न जताओगी , जब मुझसे प्रेम करने लगोगी .करने लगी हो न / देखो अब नाटक नहीं, सच कहना .
शालिनी-मैं क्यों कुछ कहूँ ? पहले तुम कहो न. तुम कुछ बोलते नहीं , और मुझसे मुंह खुलवाना चाहते हो . बड़े उस्ताद आदमी हो .
सलीम- अच्छा , ये बात है. तो चलो मैं कहे देता हूँ. आई लव यू शालिनी. मैं तुमसे प्यार करता हूँ. तुम्हारी यह मनमोहक सूरत मेरे दिल में समा गयी है. आज से और अभी से मैंने तुमको अपना बना लिया है. जब तक जान में जान
रहेगी तब तक तुम मेरे मन में , मेरे जेहन में , मेरे जीवन में रहोगी. मैं तुमको बहुत खुश रखूंगा . कभी तुम्हारी आँखों में आंसू नहीं आने दूंगा. अगर अपनी जान देकर भी तुम्हें सुख देना पड़ा तो यह काम भी मैं करूँगा .
शालिनी- बस करो सलीम. कोई ऎसी बात नकहो जिससे कि मेरा ईमान ही डगमगा जाए . मैं चैन से जी रही हूँ मुझे इस प्यार -मोहब्बत के चक्कर में मत डालो .
सलीम- प्यार कोई चक्कर नहीं होता, यह जीने की जरूरत होती है और तुम वो हो. मैं तुम्हें अपना सब कुछ मान चुका हूँ. क्योंकि मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ और मोहब्बत बहुत पाक होती है.
शालिनी- ऐसा तुम समझते हो. लोग तो इसे बड़ा गुनाह समजहते हैं. ज़िंदा जला देंगे मुझे और तुम्हें.
सलीम- कोई फर्क नहीं पड़ता . मैं उन लोगों से कहूँगा कि इसमें शालिनी का कोई कसूर नहीं है अगर कोई सजा देनी ही है तो इसको नहीं बल्कि मुझे दी जाए. क्योंकि यह प्यार के लिए तैयार ही नहीं नहीं थी. मेरे बहकाने पर इसने हाँ
की है, इसलिए अगर प्यार करना गुनाह है तो गुनाहगार सिर्फ और सिर्फ मैं हूँ.
शालिनी- तुम इसे मजाक समझ रहे हो . तुम नहीं जानते लोगों को. लोग मेरे और तुम्हारे रिश्ते के नाम पर सिर पर आसमां उठा लेंगे . धर्म के ठेकेदार यह कतई बर्दाश्त नैन करेंगे कि कोई शालिनी किसी सलीम के साथ जीवन संगिनी
बनकर जीवन बिताएं. उनके लिए किसीकी खुशी कोई मायने नहीं रखती .
सलीम- मैं सब कुछ संभाल लूंगा. उनकी हर शरत मान लूंगा, जहाँ नहीं झुकना चाहिए वहाँ भी झुक जाउंगा , बस एक बार एक बार मुझे अपना बनालो . एक बार मुझसे प्यार कार्लो , मेरी टूटी किस्मत संवर जायेगी .
शालिनी- बच्चों की तरह जिद न करो सलीम. सच्चाई को स्वीकार करना सीखो.
सलीम- मैं सिर्फ इतना जानता हूँ कि अगर ध्येय सच्चा हो, प्यार सच्चा हो और यार अच्छा हो तो अंगारे भी फूल बन जाते हैं. मालिक कोई न कोई रास्ता ब्निकाल ही देता है.
शालिनी- मेरे घरवाले इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करेंगे , मेरी माँ तो रों-रोकर मर जायेगी और भाई या तो ह्त्या कर देगा या फिर आत्महत्या कर लेगा . मुझे बड़ा डर लगता है.
सलीम- अगर तुम्हारे मन में मेरे लिए प्यार का अंकुर फूट चूका है तब तो दिमाग से दहशत कि निकाल फेंको और अपने आपको मालिक को समर्पित करदो . वे हमें अच्छी राह दिखाएँगे .
शालिनी- प्यार की राह में तकलीफें तो हैं ही साथ ही रुसवाइयां भी हैं. सबसे ज्यादा तकलीफ उस समय होती है जब हमसे अपने रूठ जाते हैं.
सलीम- उनको समझाने के हुनर चाहिए. अगर ठीक तरह से अपनी बात रखी जाए तो सामने वाला मान जाता है.
शालिनी- मुझमे इतनी कुव्वत नहीं है. मगर देख रही हूँ कि तुम इस काम को अंजाम दे सकते हो , मगर ऐसा न हो कि अभी यह जीभ चल रही हो और समय आने पर यह जीभ तालू से चिपक जाए .
सलीम -जरूरत पड़ने पर इसे काटकर तुम्हारे क़दमों में डाल सकता हूँ.
शालिनी- फिर क्या होगा ? तुम्हारी जीभ के काटने से तो मेरा ही नुक्सान होगा , न बाबा न ऐसा न करो. इसका सही इस्तेमाल करो.
शालिनी की तरफ से हरा सिग्नल मिलते ही सलीम ने उस हसीना को अपनी बांहों में उठा लिया और उस तरफ ले गया जहां कोई मौजूद नहीं था. अकेले में सलीम ने उसे नीचे उतारा और उसको अपनी बांहों में कैद कर
उसके सुर्ख होठों से अपने होठ सटा दिए. शालिनी को लगा जैसे उसके अंदर कुछ टूट रहा है .
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