Thursday, December 9, 2010

तन्हाई -6
शालिनी- मैं कुछ नहीं करने वाली, सब जों करना खुद करो. मजा लोगे तुम और सजा भुगतूं मैं ?
सलीम- ये किसी बात करती हो मेरी जान. यह हम दोनों का सयुंक्त मजा होगा. अगर मुझे मजा आएगा तो उससे कई गुना ज्यादा मजा तुमको भी मिलने वाला है. सेक्स का सुख ऐसा सुख होता है कि इसके आगे
तुम सब कुछ भूल जओगेई, तुम्हारे मन से डर भी खत्म हो जाएगा. बस एक बार की बात है. इसके बाद तो तुम खुद मुझे ढूंढती फिरोगी .
शालिनी- इसका अर्थ तो ये हुआ कि तुम मुझसे पहले भी किसी और लडको को ऐसा सुख दे चुके हो, वरना तुम ये सब कैसे जानते हो ?
सलेम- अगर ब्याह नहीं किया तो बरात तो बहुत की हैं जानेमन, मैंने लोगों से इस बारे में सुन रखा है.
शालिनी- क्या तुम लोगों से इस समबन्ध में बातचीत कर लेते ही ? शर्म नहीं आती तुमको ?
सलीम- अरे इसमें शर्म की क्या बात है , जब तुम्हारी किसी सहेली की शादी होती होगी तो तुम उससे उसकी सुहागरात का अनुभव नहीं पूछती होंगी ?
शालिनी- नहीं , बिलकुल नहीं. मैंने तो कभी किसीसे इस बारे में कोई बात नहीं की.
सलीम- झूठ नहीं बोलूंगा , हम लोग तो आपस में सब शेयर करते हैं. तुम्हारी सहेली के साथ अभिषेक ने कैसे प्यार किया , कैसे उसे सुहागरात के लिए तैयार किया , अगर तुम चाहो तो उसे पूछकर
यह सब मैं तुमको बता सकता हूँ. हम लोग आपस में बातचीत करते हैं कि कैसे दुल्हन का घूंघट उठाया , कैसे उसके होठों को चूमा और फिर कैसे उसके साथ सुहागरात मनाई .
शालिनी- इसका मतलब यह हुआ कि मेरे होठों को तुमने जिस तरह से चूमा है, वह सब भी अपने दोस्तों को बता ही दोगे. शेखी जातने के लिए कि देहो तुम कितने होशियार हो और लड़कियों को बड़ी आसानी से अपने जाल में फांस
लेते हो. इसीलिए ये सबा करते हो न तुम लड़के लोग ? इस वजह से अगर कोई लड़की बदनाम होती है तो होती रहे , हैं न ?
सलीम- जी नहीं, मैं ज़रा अलग किस्म का हूँ, मैं अपना दुःख भी किसीके साथ शेयर नहीं करता, किसीके साथ भी. अपने गुबार को मैं तस्बीरों के जरिये से निकाल लेता हूँ. मुझे तस्बीर बनाने का बहुत शौक है. उन तस्बीरों में मैं अपने
दुःख-सुख सबको ढाल देता हूँ, मगर अपने किसी दोस्त को भी कुछ नहीं बताता , हाँ उनकी बातें मैं जरूर सुन लेता हूँ. तुम्हारे और हमारे बीच में क्या बातें होती हैं, यह बताने की चीज थोड़ी हैं. मैं भला किसीको क्यों बताने लगा.
जब तुम मेरी दोस्त हो तो दोस्त की इज्जत भी मेरी हो जाती है. मैं अपने दोस्त की इज्जत बचाने का काम करूँगा न कि बिगाड़ने का.
शालिनी- पक्का वादा करते हो न , मुझे बहुत डर लगता है. मैं जान नहीं पाती कि कौन गलत बोल रहा है और कौन सच ?
सलीम- जी चाहता है तुम्हें अपने सीने में बिथालूँ, इस सीने को चीर फाड़ दूं और इसमें तुम्हें बसा लूं, इतनी आकर्षक हो तुम. तुम्हारा व्यक्तित्व मन को मोहने वाला है.
शालिनी- जों भी करना है जल्दी करो, और सुनो सीना -वीना कुछ मत चीरों , मुझे खून -खराबे से बहुत डर लगता है.
सलीम- वो तो होकर रहेगा मेरी जान, इस चांदनी रात को साक्षी मानकर आज और अभी मैं दिलो -दिमाग , अपनी आत्मा से तुम्हें अपनी पत्नी स्वीकार करता हूँ. अनगिनत सितारे हमारे बाराती बने हैं. देखो. चाँद कैसे मुस्करा रहा
है. इससे अच्छा अवसर हमें और कभी नहीं मिल सकता.
शालिनी- शब्दों में समय मत बर्बाद करो, जितनी जल्दी हो सके यहाँ से निकल लों. अगर किसीने देख लिया तो मुश्किल हो जाएगा .
सलीम- अगर तुम मेरे साथ हो दुनिया की कोई भी ताकत हमारा बाल भी बांका नहीं कर सकती. दो प्यार करने वालों को आज तक मौत भीनहीं झुका पाई है .
शालिनी- शायद तुम भूल रहे हो, यह प्यार करने का वक्त है, भाषण देने का नहीं.
सलीम- प्यार जब सच्चा हो तो वक्त भी ठहर जाता है, हर पासा पलट जाता है. मोहब्बत अमर है और हमेशा रहेगी. डर -डर के प्यार करना कोई प्यार करना है . बेफिक्र होकर रहो .
शालिनी धैर्य से उसकी बात नहीं सुन सकी, और ज्यादा देर तक रुकना उसके वश में नहीं था, सच्चाई यह थी कि सलीम का भी अंदर से बुरा हाल था. डर के कारण उसके संवेदनशील अंग ठीक ढंग से सख्त नहीं हो प् रहा था .
इसी कारण वह भी थोड़ा समय लेना चाहता था ताकि तब तक उसका खास अंग सख्त हो जाए और वह शालिनी के साथ सुहागरात मना सके. मगर जब शालिनी ने महसूस किया कि वह कुछ ढीला पडा रहा है तो
वह खुद आगे बढ़कर सलीम के सीने से लिपट गयी . सलीम के गुप्त अंग में थोड़ी सी ताकत का संचार हुआ , वह उसके सीने को सहलाने लगा . आह-ऊह की ध्वनियाँ आने लगी. शालिनी तडपकर बोली-
-यह तुम क्या कर रहे हो ? कुछ गलत मत करना .
सलीम- प्यार करना गलत नहीं होता मेरी जान, तुम मेरी रग -रग में बस चुकी हो. देखो मेरा यह हथियार कैसा तड़प रहा है.
शालिनी- इससे तो मेरे जान ही निकल जायेगी , इसको दूर ही रखो.

No comments: