Friday, July 30, 2010

pyaar , bhaag -79

झंकार - मैं क्यों नहीं होती मेरी जान. मैं तो सबसे पहले हूँ. अच्छा ये बताओ कि प्यार के बाद जों शब्द सबसे ज्यादा लिया जाता है वो है है रोमांस का नाम. बताओ न यह क्या है ?
शुजात- जों हम कर रहे हैं, यही रोमांस है. प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत ही क्या है ?
झंकार-हटो, झूठे, यह रोमांस नहीं डायरेक्ट सेक्स है. हम लोग सेक्स कर रहे हैं .
शुजात- ओके, रोमांस एक चुंबकीय आकर्षण है, इसलिए इसने इतनी जल्दी सबको अपने सम्मोहन में जकड़ लिया है। अकेलेपन की उदासियों में रोमांस ही है, जो जीवन में रंग भरने लगा है। एक तो रिश्तों की बढ़ती बराबरी व दोस्ती के तकाजे के चलते आए खुलेपन से रोमांस की संभावनाएँ बढ़ी हैं, दूसरी तरफ, जीवन की बढ़ती व्यस्तताओं से उपजी, निराशा, ऊब, तनाव व अवसाद के चलते मनोचिकित्सकों ने भी रोमांस के महत्व को पहचना है और उसे मानवीय जीन का अनिवार्य हिस्सा बताया है।
रोमांस एक अहसास है जिसकी गहराई को सिर्फ महसूस किया जा सकता है। किसी प्रिय से निगाहे मिलने पर दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं और तन-मन में स्पंदन सा महसूस होता है, इसे ही तो रोमांस कहते हैं।जैसे तुम्हें देखते ही मुझे हो गया था. रोमांस शब्दों का मोहताज नहीं है, यह आँखों और इशारों की भाषा खूब समझता है।
झंकार - मैं नहीं मानती . यह तो आप प्रेम की परिभाषा बता रहे हैं .
शुजात- रोमांस के बिना प्रेम का अस्तित्व नहीं होता।
प्रेम की डगरिया का नाम है रोमांस। प्रेम अगर मंजिल है तो रोमांस पगडंडी, जो प्रेम की परिपक्वता प्रदान करती है। यह कोई जरूरी नहीं कि जिससे आप प्रेम करते हों वह भी आपसे उतनी शिद्दत से प्रेम करता हो। रोमांस प्रेम में तभी परिवर्तित होता है जब एक-दूसरे के प्रति रोमांस के भाव दोनों के मन में जागे वरना कामनाएँ सिर्फ रोमांस बनकर रह जाती हैं। रोमांस दो चाहने वालों को एक-दूसरे के करीब लाने, उनमें प्रेम जगाने का एक माध्यम है।
रोमांस का अर्थ केवल प्यार-मोहब्बत और दैहिक संसर्ग नहीं, बल्कि रोमांस का अर्थ है अपने लक्ष्य को पाने के लिए निष्ठा व प्रेम। कोई भी व्यक्ति अपने मकसद को तब तक नहीं पा सकता जब तक उसके अंतर्मन में उस काम से प्यार और उसे कर पाने की इच्छा और लगन नही होगी। रोमांस एक तड़ित तरंगित गतिमयता है, दीवानगी है, एक पागलपन, एक सिरफिरापन है। इसके बाद ही कलाकार व दीवानों को अपने उद्देश्य की प्राप्ति होती है।
पुराने समय का रोमांस शायद कहीं अधिक रोमांटिक था, लुक-छिपकर एक-दूसरे को निहारना, लंबी सैर पर निकल जाना, कॉफी की चुस्कियाँ लेना और एक-दूसरे का हाथ पकड़ना आदि। स्पर्श के इस रोमांच को प्रेमी युगल कई दिनों तक नहीं, महीनों-सालों तक महसूस करते थे।
रोमांस के नाम पर मन में जोश और उत्साह होता था। रोमांस का जिक्र आते ही होठों पर खिली शर्मीली मुस्कुराहट तो दिखाई दे जाती थी, लेकिन मन में फूटते लड्डुओं का अंदाजा मात्र चेहरे को देखकर लगानमुश्किहोतथा
दूसरी तरफ आधुनिक रोमांस की गति इतनी तेज है कि प्रेमी युगल के पास उसे महसूस करने के लिए, उन क्षणों को जीने के लिए समय ही नहीं है। आज रोमांस को समय और दूरी का मुँह नहीं ताकना पड़ता। अब रोमांस का स्थान डिस्को, पार्टियों, डेटिंग आदि ने ले लिया है जहाँ शोरशराबे में इच्छाएँ-कामनाएँ पहले ही खत्म हो जाती हैं।यही एक कारण है कि मैं तुम्हें इस होटल में लेकर आया , ताकि एक रात जी भर तुम्हारे साथ रोमांस कर सकूं.
रोमांस का भाव स्थायी नहीं है, बल्कि संचारी है। जो किसी विषय, वस्तु या फिर व्यक्ति विशेष के बारे में सोचते हुए तन-मन में संचारित होता है और कुछ भी पलों में गायब भी हो जाता है। प्रेम और रोमांस दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

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