Wednesday, July 14, 2010

प्यार , भाग-६५

अब वह सरपट दौडना चाहता था , वह झंकार को यह दिखाने के लिए बेताब हो रहा था कि अगर वह चाहे तो उसको रात भर इसी तरह से संतुष्ट कर सकता है. शुजात जान चुका था कि झंकार उसके लिए आरीपीएल का हाई पावर मुसली आयल लेकर आई है , ताकि उसे खास अंग पर लगाकर उसकी मालिस की जा सके , और इससे वह फिट होकर झंकार को सम्पूर्ण संतुष्टि प्रदान कर सके. उसने झंकार से पूछा-
-क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है ? क्या तुम्हें नहीं लगता कि मैं तुमको बिस्तर पर असली सुख दे सकता हूँ ?अगर हाँ तो फिर यह दवा लेकर क्यों आयी हो ? इसलिए तो नहीं कि तुम्हारे दिमाग में यह बात हो कि शराब पीने के आबाद मैं तुम्हे सम्पूर्ण सुख संतुष्टि नहीं दे सकता . क्या यह सच है झंकार ? देखो झूठ मत बोलना . सही बताना
झंकार- मुझे तुम पर यकीन है मेरीजान . मुसली पावर आयल का मतलब ये नहीं है कि इसे तभी इस्तेमाल किया जाए जब आदमी बीमार हो, कुछ ज्यादा मजा लूटने के लिए भी तो इसको प्रयोग में लाया जा सकता है . आजकल बहुत से लोग इसका उपयोग कर रहे हैं. मैं भी इसी उद्देश्य से इसलो लेकर आयी थी. इसके फायदे एहे फायदे हैं तकलीफ कुछ नहीं है . समझे. अब बोलो , काम करून या इसे हटाऊँ .
शुजात क्या कहता , सिर्फ मुस्कराके रह गया. झंकार उसकी मालिस करने लगी, बेहद उत्तेजक द्रश्य था. बेंतिहान कामुक. दोनों प्यासे प्रेमी एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे. शुजात अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल कर रहा था . वह जानता था कि फर्स्ट इम्प्रेशन ही लास्ट इम्प्रेशन होता है. इसलिए वह पहली बार में ही उस पर हावी होना चाहता था.उसको अपने इस कार्य में सहयोग भी मिल रहा था, उसको सहयोग करने वाला कोई और नहीं बल्कि उसकी बेड पार्टनर झंकार ही थी, वह चाहती थी कि शुजात उसे प्रेम क्रीडा की जंग में बुरी तरह से हरा डाले, क्योंकि उसकी हार ही उसकी जीत थी , इसीलिए वह शुजात का उत्साह बढाने के लिए कहने लगी-
- तुम बहुत पावरफुल हो , तुम्हारे ज़रा से स्पर्श से ही तन-मन में आग लग जाती है. बड़ा दुःख होता है, लेकिन तुमाहरे मजे के लिए मैं अपना दर्द जब्त कर लेती हूँ. करना ही पडेगा, तुम्हीने तो सिखाया है कि जितना दुःख लगेगा , आगे चलकर वह उतने ही बड़े सुख में तब्दील हो जाएगा. मुझे भरोसा और नाज है तुम्हारी मर्दानगी पर .
शुजात- मुझे गर्व है तुम्हारे सहयोग पर , तुम जैसा बेड पार्टनर मिलना शायद इस दुनिया में भी मुश्किल है क्योंकि तुम अपना दर्द भूलकर दूसरों के सुख की परवाह करती हो . मैं आज जितना खुश हूँ , उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता , अगर जिंदगी रही और सब कुछ ठीक रहा तो हम लोग इसी तरह मुलाक़ात करते रहेंगे.
झंकार- तुमसे जुडकर, तुम्हारा स्पर्श पाकर मैं धन्य हो गयी हूँ, आप जैसे विद्वान, बड़े अधिकारी और मिलनसार साथी भी ढूँढने से नहीं मिलते. आजकल तो बस नत्लाबी लोग होते हैं. जब आप मेरा इतना ख्याल रख सकते हैं तो मेरा भी कुछ फर्ज बंटा है , मेरे पास है ही क्या , सिवाय इस जिस्म के , और इसे भी मैं अब आपके नाम कर चुकी हूँ. दिल पर भी आपका नाम लिख चुकी हूँ मेरे पास अब मेरा कुछ नहीं है .
शुजात -तुम मेरे बारे में ऐसा सोचती हो, इसके लिए मैं आभारी हूँ और इस भार को कुछ कम करने के लिए मैं सोचता हूँ कि अपनी कंपनी में तुम्हारी नौकरी लगवा दी जाए, मैं तुम्हारे लिए एक नए पद का सर्जन करवा सकता हूँ, यह मल्टीनेशनल कंपनी है, जिसका मैं इंडिया हैड हूँ, कंपनी का मालिक मुझ पर भरोसाकरता है. इस तरह से तुम्हें हमेशा के लिए एक परमानेंट नौकरी मिल सकती है. तुम कम से कम समय दोगी , तो भी चलेगा . इस तरह तुम्हें कंपनी की तरफ से एक घर भी मिल जाएगा और हम दोनों भी मिलते रहेंगे , नियमित रूप से मिलकर तुम्हें भी अच्छा लगेगा .
झंकार- यह मेरी खुशनसीबी है . मैं चाहूंगी कि हर क्षण आपके करीब बनी रहूँ .

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