Friday, July 23, 2010

bhaag - aaj , friday , 23 july

अगर कोई चीज दिल को ज्यादा अच्छी लग जाए तो आदमी उछल पड़ता है . यही हाल तो शुजात और झंकार का था. हर एक द्रश्य को देखकर वे ऐसे उछल जाते थे जैसे
उन्होंने किसी काले नाग को देख लिया हो , और वह विषधर उन्हें डसने आने वाला हो . जों फिल्म इस समय उन्होंने चला रखी थी , वह पूरी तरह से तो एडल्ट नहीं थी
मगर उसकी प्रस्तुती इतने अच्छे ढंग से की गयी थी कि उसके सामने ब्लू फिल्म भी फेल थी. शुजात ने बीकह ने ही टोकते हुए कहा-
-कैसा रहा यह आइटम ? तुम्हारी तो तबियत ही फडक उठी होगी या फिर ऐसे ही है ? मुझे लगता है ऐसी सुन्दर फिल्मतुमने कभी नहीं देखी होगी . जों ब्लू फ़िल्में होती
हैं, वे देखते समय तो अच्छी लगती हैं मगर बाद में जी मचलने लगता है, उसका हीरो कई ऐसे काम कर्ता है कि बाद में उल्टी सी होने लगती हैं. हीरो ही क्यों, हीरोइन भी
तो ऐसे ही करती हैं, वे ऐसी -असी जगह पर चाटती रहती हैं कि बस पूछो मत , मगर इसमें ऐसा नहीं है . यह फिल्म टा ऐसी है कि बस देखते जाओ , देखते ही रहो . मन
प्रसन्न हो जाता है . शरीर का अंग -अंग खुश हो जाता है . मन में प्रेम की बांसुरी सी बजने लगती है . तुम कैसा महसूस करती हो ?
झंकार - आपसे सहमत हूँ. मैंने भी इंटरनेट पर कुछ फिल्मे देखी हैं , मगर वे सिर्फ क्षणिक फायदा ही देती हैं , थोड़ी देर में ही उनसे मन ऊब जाता है . एक ही तरह का लुत्फ़ होता
है . उसके बाद सब एक जैस अही लगने लगता है . बिलकुल अजीब सा. एक ही तरह के अंग . एक ही तरह के एक्शन . सिर्फ चेहरे बदल जाते हैं. उनमे वो बात नहीं जितनी
कि इस फिल्म में है. यह फिल्म हमें प्यार सिखाती है, प्यार करने के तरीके सिखाती है. शारीरिक संबंधों से कितना नुक्सान होता है और कैसे उस नुक्सान को ताला जा सकता है,
यह भी सिखाती है . रोमांस और सेक्स के बारे में सिखाती है . मैंने ऐसी शिक्षापरक फिल्म पहले कभी नहीं देखी .
शुजात- हाँ, यार . जों ऐसी सीडी बनाता है , मैं उससे परिचित हूँ. उसीने मुझे यह फिल्म गिफ्ट की थी . यह कहते हुए कि इससे बेहतर मुझे कहीं नहीं मिलेगी . देखो न यही एक फिल्म है जों
रिश्ता बनाना और फिर उन्हें कैसे निभाया जाए , यह बताती है . हीरो भी मस्त . हीरोइन भी ओरीजनल और यहाँ तक कि हम और तुम भी मस्त
झंकार - तभी तो आज मैंने ऐसा गोल्डन समय बिताया है , जिसे कभी नहीं भुला जा सकता. ना जी ते जी और न ही मरने के बाद .
शुजात- फ़िक्र न कर यार , अब तो हम इसी तरह से रोजाना हसीन वक्त बिताया करेंगे .
शुजात अपनी ही धुन मे जज्बाती वाक्य बोलता जा रहा था और झंकार मन ही मन मुस्करा रही थी, वह सोच रही थी कि बकरा अच्छा मिल गया है . वह उसका फायदा उठाकर अब अपना खुद का बार चालू करने
अब वह अपना खुद का बार चालू करने का सपना पूरा कर सकती थी. एक महीने ,में ही वह लाखों वसूल सकती थी. उसके हाथ में शुजात के रूप में
सोने के अंडे देने वालो मुर्गी जों लग चुकी थी . शुजात पैसे वाला तो था ही , साथ ही रसूख वाला भी था. वह कई सालों से जिस्म बेचने के धंधे
में अपने नाम का झंडा गाडे हुए थी. मगर उसने फिगर को ऐसे मेंटेन किया था कि कोई भी उसको १६ -१७ से ज्यादा की माने को तैयार नहीं होता
था. खुद शुजात भी सोच रहा था कि उसने झंकार के साथ सुहागरात बिताई है. शराब के नशे में और उसकी सुंदरता के नशे में वह सचमुच अपने होश
खो बैठा था. वह उसका दीवाना हो चूका था . औरत और मर्द के बीच एकांत के कुछ ऐसे क्षण भी आते हैं जब मर्द भावुक होकर किसी भी हद तक
तक गिर या उठ सकता है . यहाँ तक कि वह अपने पार्टनर के पैरों में गिर सकता , अपनी नाक तक रगद सकता है . उस पर अपने जान
न्यौछावर कर सकता है या फिर उसकी जान भी ले सकता है .

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