भाग-७४ , इस वक्त शुजात भी इसी पोजीशन में था , हुस्न की मलिका झंकार ने उस पर ऐसा जादू कर डाला कि वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हो गया.
झंकार को रति क्रीडा म चखा हो, अन का स्वादे माहिर थी . उसे यह अच्छी तरह से पता था कि किस तरह किसी मर्द को बिस्तर पर दीवाना बनाया जाता है और कैसे उसे अपना गुलाम
बनाया जा सकता है . शुजात पर भी उसने वही टोटके आजमाये थे. जैसे शुजात कहता गया वह ठीक उसू तरह करती गयी . यह काम एक पेशेवर औरत हे कर
सकती है , क्योंकि घरेलू औरत हमेशा एक मर्यादा में रहकर ही काम क्रीडा करती है , उसे हमेशा इस बात का ख़याल रहता है कि एक हद से आगे कभी नहीं बढ़ना
चाहिए क्योंकि अगले दिन उसे अपने पति से नजरें भी तो मिलानी होती हैं. जबकि पेशेवर महिला की आँखों की आंखों की शर्म मर चुकी होती है , तभी तो उसे किसी
बात की कोई फ़िक्र नहीं होती. मर्दों को ऐसी औरत इसीलिए पसंद आ जाती हैं क्योंकि वे खुशामद नहीं करवातीं, अपने आप अपने वस्त्रों को उतार फेकती हैं. जों चाहो
करने के लिए खुद ही उतावली हो जाती हैं. और कुछ काम तो ऐसे कर बैठती हैं, जैसा कि ब्लू फिल्मों में दिखाया जाता है. ब्लू फिल्म की हीरोइन जिस तरह से अपने हीरो
के खास अंगों को चूमती है, दीर्घ चुम्बन लेती है, पेशेवर महिला ही यह सब कर सकती है. झंकार ने शुजात के साथ यही सब किया था और उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया
था. उस अपार सुख को पाकर वह निहाल हो गया था. ऐसा नहीं है कि शुजात ने भी पहली बार महिला बदन का स्वाद चखा हो, इससे पहले भी व अक्सर आनंद लूटता रहता
था मगर झंकार के साथ काम क्रीडा का सुख लूटा तो वह इतना खुश हुआ कि झंकार के अरमानों को भी पर लगने लगे. वह तो हमेशा इसी तरह के शिकार की तलाश में
रहती थी.जुबैद को सब पता था. इसके बावजूद भी अगर उसने बार से आते समय कुछ नहीं बोला तो उसके पीछे राज यह था कि भले ही शुअजत के उस पर एहसान थे, वह
उसका मित्र भी था, लेकिन इस सबसे पहले वह व्यवसाई भी था. उसको व्यापार करना अच्च्ची तरह आता था. वह जानता था कि झंकार जों भी कमाकर लेकर आयेगी , उसमे
से वह तो सिर्फ थोड़ा सा ही हिस्सा लेगी , बाकी सब तो उसीके हिस्से में आना था . और जुबैद की नजर में पैसे बहुत अहमियत रखते थे . अगर ऐसा नहीं होता तो और भी
बहुत से काम थे, जिनेहं वह अंजाम दे सकता था. अगर उसने अप्रत्यक्ष रूप से जिस्म बेचने का काम शुरू किया था , तो उसके पीछे कम समय में ज्यादा दौलत कमाने का
ही ख़याल था. और जों आदमी दौलत का दीवाना हो जाता है , उसके लिए रिश्ते नाते बहुत ज्यादा मायने नहीं रखते . शुजात इस सबसे बेखबर होकर सो गया. झंकार ने उसके बदन
की प्यास को ठीक तरह से बुझा दिया था. तृप्त होकत वह अबोध बालक की तरह सो रहा था. झंकार आने वाले समय के बारे में सोच रही थी. वह सोचती थी कि अगर शुजात जैसे
दो ग्राहक भी उसे मिल जाएँ तो महीने भर रात काली करने की जरूरत न पड़े. बस उन कुछ को ही खुश करती रहे और उन्ही से कुछ महीनों में ही मालामाल हो जाए . उसे फिर
किसी दुसरे के होटल में काम करने की जरूरत ही न पड़े. शुअजत ने उसको कई तरह के रंगीन ख़्वाब दिखाए थे. वह उन्हीं ख्यालों में खोये हुए आगे के बारे में सोच रही थी ।
अगले दिन जब शुजात की आँख खुली तो दिन काफी चढ चुका था , उसकी गर्दन में दर्द सा महसूस हो रहा था । झंकार उसकी बगल में नग्न अवस्था में लेटी हुई थी। शुअजत ने उसके होठों पर एक दीर्घ चुम्बन ले लिया।
Saturday, July 24, 2010
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