कभी किसी लड़की के साथ स्नान का आनंद उठाया है आपने ? उठाया तो जरूर होगा . पहुंचे हुए फ़कीर दीखते हो .
शुजात- अच्छा ,तुम भी झंकार . कमेन्ट करने से बाज नहीं आती हो , कुछ न कुछ ऐसा कहते हो कि मैं लाजवाब हो जाता हूँ. वैसे इसका भी एक अलग ही मजा है . तुमने सही अंदाजा नहीं लगया . सच तो ये है कि मैंने आज तक किसी लड़की के साथ नहाने का सुख नहीं भोगा. मगर आज यह इच्छा भी पूरी हो जायेगी . देखते हैं इससे मन कितना रोमांटिक होता है . हांलाकि अभी तक दिल में कोई छवि तो तैयार की नहीं है . पता नहीं क्या होगा , कैसे होगा /
झंकार - फ़िक्र मत करो , सही समय आने पर सब कुछ सही हो जाएगा . इन चीजों के स्कूल नहीं होते मेरी जान. बेवजह चिंता करके इस कसे हुए मजबूत जिस्म को कमजोर न करो . आओ मुझे फोलो करो .
शुजात यंत्रवत उसके पीछे -पीछे चलने लगा. झंकार तो बिलकुल नगन थी. उसने अंडरवियर और बनियान पहन रखे थे. उस फाइव स्टार होटल का बाथरूम भी उसकी क्वालिटी के अनुरूप ही खूबसूरत था. हर चीज के इंतजाम थे . ऐसी कोई आधुनिक सुविधा नहीं थी , जों वहां पर मौजूद न हो . अचानक शुजात को शरारत सूझी. उसने झंकार को अपनी बांहों में भरा और बाथ टब में छलांग लगादी. इसके बाद प्रणय क्रीडा का कभी न खत्म होने वाला सिलसिला शुरू हो गया. झंकार भी उसके ऊपर पानी फेंकने लगी थी. दोनों खूब हंस रहे थे. शुजात तो पेट पकड़-पकड़कर हंस रहा था. आखिर उसने झंकार की आशा के अनुरूप कार्य को अंजाम जों दिया था. वह क्या जानती थी शुजात उसे इस तरह टब में गिरा देगा . वह तो उसे सचमुच मासूम समझ बैठी थी. जब हंसी थमी तो शुजात ने उसे पूछ लिया-
-कहो किसी रही मेरी जान . मजा आया न. कहीं लगी तो नहीं ? मुझे तो इतना आनंद आया है हंसी रुकने का नाम ही नहीं लेती. तुमने तो सोचा होगा किमैं अब तुमसे ही सीखूंगा मुझे तो कुछ ज्ञान है नहीं .अरे बाबा मैं कभी किसी लड़की के साथ भले ही नहीं नहाया मगर अकेला तो रोजाना नहाता ही हूना. मेरे लिए यह बाथ टब भी नया नहीं है.
झंकार- समझ गयी , छुपे रुस्तम हो , अब मुझे ज्यादा सताना मत . वरना मैं यहाँ से निकल जाउंगी .
यह बात झंकार ने इतनी अदा से कही थी कि शुजात का दिल फ़ौरन मचल गया. उसने झंकार के सीने से सटी हिमालय की चोटियों को सहलाना शुरू कर दिया. झंकार ने पहले तो थोडा सा विरोध किया मगर जल्द ही उससे चिपक गयी. अब दोनों के जिस्म आपस में चिपके हुए थे. वे एक दूजे से सटकर प्यार का इजहार कर रहे थे. धीरे-धीरे शुजात ने उसके होठों पर अपने होठ रख दिए . पानी में ही आग की लपटें उठने लगीं. दोनों के शरीर सुलगने को बेताब थे. ऐसा लगात था जैसे कुछ देर तक अगर यही हालत रही तो वे दोनों बहुत जल्द बम की तरह फट जायेंगे . बेचैनी का आलम ये था कि खुद झंकार उसके हाथ को पकड़कर अपनी दूसरी गोलाई पर रखने लगी ताकि शुजात भी उसका अनुसरण कर सके.शुजात ठहरा उस्तादो का उस्ताद . उसे तो ऐसे अवसरों की तलाश रहती थी. मौक़ा मिलते ही वह झंकार पर भूखे भेडीये की तरह टूट पड़ा. पानी के अंदर प्यार का नजारा बेहद खूबसूरत था. झंकार और शुजात युवा के साथ -साथ बेहद सुन्दर थे. उन दोनों के बदन काम वासना के आग में झुलसने लगे. शुजात ने कहा-
तुम्हें देखकर वो गीत याद आ रहा है - समुन्दर में नहाकर और भी नमकीन हो गयी हो . एक तो पहले से ही कयाम थी अब और भी महा क़यामत हो गयी हो. नजर न लगे किसीकी.
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