Monday, May 3, 2010

parinda , bhag-82

परिंदा , भाग - ८२
अजय को पहले लगा था कि उसको कुछ भ्रम हुआ है , मगर जब चन्दा की आवाज को उसने गौर से सुना तो यह समझते देर नहीं
लगी कि गाने वाली कोई और नहीं बल्कि चन्दा ही थी , उसकी अपनी चन्दा , इस आवाज को वह कैसे भूल सकता था ? इसी आवाज
की जादू से तो वह जी रहा था. इस जादुई आवाज को भूलना उसके वश में नहीं था. वह बेचैन होने लगा . बेताबी के कारण उसकी आँखों
में लाल -लाल डोरे तैरने लगे थे. वह आवाज की दिशा में जल दी जल्द आगे बढ़ना चाहता था . वह उस आवाज की मालकिन से मिलने के लिए बेताब था
फिर अचानक उसके कदम रुक गए. उसने वेटर को इशारा किया , उससे एक हजार के नोटों की माला मंगवाई और उस गायिका को बुलाने का
इशारा किया जिसकी आवाज चन्दा जैसी थी. कुछ समय बाद एक महिला सादी पहने , हाथ में माइक लिए हाजिर हुई . अजय के हाथ में नोटों की
माला थी , वह उसे अपलक निहारता रहा, ऐसा लगा जैसे वक्त की रफ़्तार रुक गयी हो, सब कुछ थम सा गया. उसके सामने चन्दा खड़ी थी, दुबली, पतली
चन्दा. उसके चेहरे से रौनक गायब थी. ऐसा लगता तह जैसे कि वह बस अजय को देखने के लिए ही जीवित थी. उसके होठ थर -थर काँप रहे थे और
अजय के हाथ. उसने नोटों की माला चन्दा के गले में पह्नादी , और अपनी बाँहें फैलादी, इस बार चुकी नहीं चन्दा. उसकी बांहों में समा गयी, दोनों की आँखों में
आंसू थे. सब लोग इस नज़ारे को ऐसे दकेह रहे थे जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो. क्योंकि बार के लिए तो यह एक आम नजारा था. वहाँ पर लोग आते थे, अपनी
चाहने वालियों से मिलते थे , उन्हें पैसे देते थे, उनके साथ ठुमके भी लगाते थे और जो रंगीन किस्म के लोग होते थे वे अपनी पसंद की हसीनाओं को
मनमाफिक रकम चुकाकर लोज में ले जाया करते थे, ताकि बिना खौफ रातें रंगीन कर सकें. इसलिए किसीने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया . अजय ने चन्दा का हाथ
थाम लिया और उसे बार के बाहर ले आया. अब वह वक्त को बर्बाद करने के मूड में नहीं था. बार के बाहर उसके दोस्त की गाड़ी खड़ी थी . वह दोस्त को छोड़कर
अपने ह्पोतल चला आया. चन्दा भी उसकी हालत देखकर हैरान थी. दूध दही का सेवन करने वाला अजय शराब के नशे में धुत था. वह अंदर तक तडपकर रह गयी
यह समझते देर नहीं लगी कि अजय की ऐसी हालत के लिए कोई और नहीं बल्कि वह खुद जिम्मेदार है . उसने अजय को अपने सीने से लगा लिया और
अपने आँचल से उसके चेहरे को पौंछने लगी. अजय ने कहा-
- कहाँ खो गयी थीं तुम ? मैंने तुम्हें कहाँ नहीं ढूंढा ? कित्नमा परेशान था मैं तुम्हारे बिना ? क्या तुमने मेरा एक बार भी ख्याल नहीं किया ?
चन्दा- हर पल , हर घड़ी मैं बस तुम्हारे बारे में ही सोचती रही, रात को अगर नींद आ जाती तो तुम्हारे सपने घेर लिया करते थे. मैं चाहती थी कि मेरी वजह से
आपके माता -पिता को बहुत तकलीफ हो रही थीं, मैं उनकी बहुत इज्जत करती हूँ इसलिए अपने आपको दुःख देने यहाँ चली आयी , सोचा था कि यहाँ आकार
आपको भूलने की कोशिश करुगी,तब तक शायद आप भी मुझे भूल जायेंगे. मगर न आप मुझे भूल पाए और न ही मैं आपको .
अजय- अगर तुम मुझे नहीं मिलती तो मैं मर जाता चंदाबाई , मुझे दुनिया से तुम्हारे अलावा और कुछ नहीं चाहिए .
चंदाबाई- ऐसा न कहें अजय बाबू, आपको कुछ भी हुआ तो मैं एक पल भी ज़िंदा नहीं रह पाउंगी. अब मैं आपके साथ हूँ . हमारे प्यार को कोई हरा नहीं
सकता, अगर हम इस जन्म में नहीं मिल पाए तो कोई बात नैन अगले जन्म में हमें एक दुसरे से मिलने से कोई नहीं रोक पायेंगे. हम मरकर भी मिलेंगे .

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