Tuesday, May 25, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१८

कम्मो- हाँ , समझने की कोशिश कर रही हूं, आपके साथ रहूंगी तो सब कुछ जान भी जाउंगी . थोड़ा -थोडा तो समझ ही रही हूँ, बड़े पते की बात कह रही हो , इस एंगल से भी तो सोचना जरूरी है . अच्छा किया आपने जो समझा दिया.
शिल्पा - चलो अच्छा हुआ , अब मुझे तसल्ली हुई कि मैन ऐसी विद्वान महिला की साथी बन्ने जा रही हूँ , जो निष्पक्ष भाव से सोचती है. लड़का हो या लड़की कोई भेदभाव नहीं रखती हो . दूसरों से भी सावधान रहने की अपील करती हो और अपनों से भी . यह अच्छा ही हुआ मेरी जान. देखा, अब मुझे जान कहने की आदत भी लगती जा रही है, बिलकुल तुम्हारी तरह.
कम्मो - ये क्या कह रही ही, यह तो मेरी वाली आदत है और आप इसे किसी और का नाम कह रही हैं.
शिल्पा- तुम्हारे और मेरे बीच में अब फर्क ही क्या रहा है ? तुम भी मेरी अपनी ही हो चुकी हो . हम दोनों के शरीर एक हो चुके हैं. हमारी आत्मा एक हो चुकी हैं. अब हमें फर्क क्या पड़ता है ? कौन कहेगा कि हम दोनों अलग- अलग हैं ? और अगर कहेगा भी तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला , क्योंकि जब आत्माओं का मिलन हो जाता है तो जिस्म बहुत पीछे छूट जाता है . सच कहती हूँ, मेरी जान. ये आध्यात्मिक बातें हैं. अब अगर तुम्हें कोई तकलीफ होगी तो मैन समझूंगी कि दर्द मुझे हो रहा है . और जब मै यह फील करूंगी तो ऐसा हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है .
कम्मो- वाह, तुम्हारे शब्दों में अथाह शक्ति है शिल्पा. इस शक्ति से भी मेरा साक्षात्कार कराओ न.
शिल्पा -आहिस्ता -आहिस्ता सब कुछ ठीक ठाक हो जाएगा , सब जान जाओगी . अब मेरे बिकुल करीब आ जाओ . इतने करीब कि फिर कोई दूरी ही न रह जाए , बदन में बड़ी अगन सी लगी है .
कम्मो - मै भी बेताब हूँ , बेकरारी ने मेरे जिस्म को अकड लिया है . अब समझ में नहीं आता कि इसे इस तरह कैसे मजा आएगा ? मै तुम्हे कैसे इतना आनंद दे पाउंगी जैसा कि तुम मुझे दिया करता करती थी ... क्योंकि तुमने जब शुरुआत की थी तो बड़ा मजा आया था . इतना मजा मै दे पाउंगी कि नहीं ?
शिल्पा - तुम शुरुआत तो करो मेरी जान, इसके बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा . ऐसा सुख मिलेगा कि सब रिकार्ड टूट जायेंगे , किसी तरह की कोई दिक्कत मत रखो . उलझन मत रखो, एक राज की बात ये भी है कि इस तरह जो लोग उलझन के शिकार होते हैं , उन्हें सफलता भी कुछ देरी से मिलती है . उलझा-उलझकर . समझी तुम ? इसलिए अभी से इस बात को गांठ बाँध लो और अपने काम में लग जाओ . अपना कर्तव्य पूरा करो .
कम्मो को जोश आ गया. शिल्पा के कहने का तरीका ही ऐसा होता था कि मुर्दे में भी जान आ जाती थी. कम्मो ने सेक्स के कुछ गुण उस फिल्म से भी सीख लिए थे , उसने अब वही तरीके इस्तेमाल करने शुरू कर दिए . वह कम्मो की जीभ का भी चुम्बन ले रही थी. शिल्प उसका भरपूर साथ दे रही थी. दोनों के जिस्म कुछ ही देर में अंगारे की तरह दहक रहे थे . कम्मो पहल करती जा रही थी और शिल्पा उकस समर्थन कर रही थी . और जब उनकी जवानी ज्वालामुखी के तरह दहकने लगी तो शिल्पा बावरी सी हो उठी वह कम्मो की गोलाइयों को जोर -जोर से चूमने लगी . उसकी उँगलियाँ कम्मो के यौवन द्वार पर दस्तक दे रही थीं. सेक्सी आह का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया , और तब तक चलता रहा जब तक उन दोनों सहेलियों के शरीर की गर्मी पूरी तरह शांत नहीं हो गयी, एसी कमरे में भी वे दोनों पसीने से लथपथ थीं. जैसे कोई बहुत बड़ी जंग लड़ रही हों, देखा जाए तो ये जंग थी भई. एक लड़की कुदरत के चुनौती देकर दुसरी लड़की की जिस्मानी भूख को शांत कर रही थी. और इस समय वे दोनों खुश भी दिखाई दे रही थीं. यह सफलता की मुस्कराहट थी. इस खुशी में उन दोनों की हालत ऐसी हो गयी , जैसे सचमुच किसी पति-पत्नी के जोड़े की होती है. शिल्पा ने बाकायदा कम्मो के गालों का चुम्बन लिया और फिर उसके मस्तिष्क को चूमते हुए बोली-
- बहुत मजा आया. तबियत खुश हो गयी यार . तुम अपनी कहो , तुम्हें सुख मिला कि नहीं ?
कम्मो- तुम खुश तो मै खुश , वैसे , जब तुम प्रणय क्रीडा की पहल करती हो तब मुझे सबसे ज्यादा खुशी होती है .
शिल्पा- कोई बात नहीं , अब जब कल मौज मस्ती करेंगे तो उसका नेतृत्व मै करूंगी अब तो खुश हो? काउंटर पर फोन करने दो गिलाश जूस का ऑर्डर दे दो.जितनी ऊर्जा खत्म हुई है, उसकी आधी तो कम से कम मिलनी ही चीहिए .











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