Friday, May 14, 2010

प्यार से प्यारा यार , भाग-६

फिल्म का नाम था -लेस्बियन ... दो प्यार करने वाली युवतियों के अन्तरंग दृश्यों को बेहद ख़ूबसूरती के साथ फिल्माया गया था. कम्मो तो उसे अपलक निहारने लगी . शिल्पा उसके उरोजों को आहिस्ता-अहिस्ता दबाने लगी, उसके मन में आग दहकने लगी थी . शिल्पा का का भी कम बुरा हाल नहीं था . वह थर-थर काँप रही थी , साथ ही पूछने लगी-
-कैसा लग रहा है मेरी जान को ? आनंद आ रहा है या नहीं ? फिल्म भी लाजवाब है न ?तुम्हारे मुह से पानी आने लगा ? मैंने कहा था न बहुत मजा दूंगी तुम्हें , ये तो अभी शुरुआत है , आगे -आगे देखो होता है क्या ? तेल देखो, तेल की धार देखो, मैन इन बेवफा मर्दों से तंग आ चुकी हूँ, बड़ा शोषण करते हैं. संगदिल होते हैं एक नंबर के. कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं. ये ऐसे लोग है जो अपने फायदे के लिए तो तलवे चाटेंगे और काम निकल गया तो पहचानना भी भूल जायेंगे ,हमको गुलाम समझेंगे , जीवन भर गुलामी से बेहतर है कि मैन एक मिनिट ही सही मगर आजाद जिंदगी जिउ , भई, गुलामी का जीवन भी कोई जीवन है. स्वर्ग का चपरासी बन्ने से नर्क का राजा बनना मुझे मंजूर है.
कम्मो- तुम ठीक कहती हो शिल्पा. मेरी आँखें खोल दी हैं तुमने बिलकुल सही कहा. मैन अब तुम्हारे विचारों को ठीक से जानने -समझने लगी हूँ.
शिल्पा - मुझे तुमसे यही उम्मीद थी. जानती थी , जल्द ही सब समझ जाओगी . वादा करो कि तुम कभी किसी मर्द से शादी नहीं करोगी , किसीके प्यार के चक्कर में भी नहीं पडोगी. आजाद पैदा हुई हो और आजाद ही इस दुनिया से जाओगी , वादा करो कि गुलामी की इन जंजीरों को तोड़ डालोगी , अब मर्दों की दादा गीरी हम लोग नहीं चलने देंगे
हां, रही बात सुख की, संतुष्टि की, यकीं मानो उसे मैन पूरा करूंगी , तुम्हें सिखाऊँगी भी . और इसके लिए तडपना भी नहीं पडेगा. अब हमारे ग्रुप में हम जैसी बहुत सी लड़कियां जुड चुकी हैं. जिस खूबसूरत लड़की के साथ रात गुजारना चाहो, गुजार सकती हो. यहाँ दोनों को सामान सुख मिलता है. किसीको हीन भावना का शिकार नहीं होना पड़ता . किसियो किसीके सामने झुकना नहीं पड़ता. सब लोग अपनी मर्जी के मुताबिक़ मजे लूटते हैं.
कम्मो- अच्छा , क्या आप लोगों ने ग्रुप बना रखे हैं ?
शिल्पा- हाँ, बहुत ग्रुप हैं. टेंशन मत लो. हमारे ग्रुप में हर शहर में लड़कियां हैं. जहां जाओगी , तुम्हें मिल जायेंगी. हमारा एक ही मिशन है, मर्दों की गुक्लामी से मुक्ति और मनचाही संतुष्टि. हम अपने हाथ जगन्नाथ बनाने में विश्वाश रखते हैं, ऐसा करना कानूनी गुनाह भी नहीं है. हम ना तो अश्लील हरकतें करते हैं और ना ही किसी की इच्छा के विरुद्ध कुछ किया जाता है. इससे हमें अपने कैरियर बनाने में , उसे ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद मिलती है. हम पूरी तरह से इंडीपेंडेंट हो जाते हैं, हमको किसी तरह का कोई तनाव नहीं होता अगर तुम मेरी पत्नी बननी स्वीकार करती हो तो घर पर हम दोनों मिलकर काम करेंगी, झाडू, चौका -बर्तन, कपडे धोना सब कुछ साथ
मिलकर करेंगे. तो हम दोनों को भी कभी ये एहसास नहीं होगा कि हम् में से कोई एक छोटा है और कोई बड़ा .
कम्मो- यहाँ मैन आपको ज़रा रोकना चाहूंगी , समलैंगिक रिश्तों को अभी तक हमारे समाज में तो जगह नहीं मिली है. सब लोग इसे घटिया और गिरी हुई नजरों से देखते हैं. उसका क्या ?
शिल्पा- उसका क्या कुछ नहीं ... जब कोई हमारी परवाह नहीं करता तो हम किसी की परवाह क्यों करें ?
कम्मो- हाँ, ये भी बात सच है. तब तो इसे कानूनी मान्यता मिली हुई होगी , कि वो भी नहीं ..
शिल्पा - कई बार माननीय अदालत ने सम्लैंग्की संबंधों के पक्ष में दलीलें दी हैं, वैसे भी जो लोग विरोध करते हैं उन्हें भी इस काम को करने में कोताही नहीं होती , सिर्फ लड़कियां ही नहीं, लड़के भी ऐसे कम नहीं जो आपस में ही सम्बन्ध बनाकर खुश है. वे लोग लड़कियों से शादी करना ही नहीं चाहते ..










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