Saturday, May 1, 2010

parinda , b haag-80

उसने यह सोचकर ठंडी आह भरी कि कम से कम उसने यह एक काम तो अच्छा किया, जब अजय उसके होठों से अपने होठ स्पर्श कर रहा था तो स्वीटी को सुख की अनुभूति हो रही थी, जी चाहता था कि वे पल हमेशा ऐसे ही अमर बने रहें, यूं ही वह भवरे की तरह उसका रस चूसता रहे. जब भंवरा फूल के चारों तरफ घूमकर मधुर ध्वनि निकालता है और फूल पर बैठकर उसका रसास्वादन करता है तो पेड़ खुशी से झूमने लगता है . वह खुद भी तो इसी तरह से झूम रही थी, अपने मौन रहने की वजह से उसने ऐसे सुख को खो दिया था, वह चाहती तो रोजाना अजय के साथ प्रणय क्रीडा करके आनंद लूट सकती थी, मगर सही समय पर चुप रही , इसीका फायदा तो जमाने ने उठाया था, जब अजय की मम्मी उसके पास आयी तो वह चन्दा पर ऐसे आरोप लगा रही थी मानो उसने कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया हो. जबकि उसने न तो कुछ कहा था और न ही कुछ किया ही था . अजय ने ही उसको प्रेम का प्रस्ताव दिया था. और उस बेचारी ने तो लोक लिहाज के कारण उसे मना ही किया था , उसे उंच -नीच भी समझाई थी, वह क्या करे अगर अजय उस पर फ़िदा था और जान छोदकने लगा था, उसकी गलती तो तब होती जब वह अजय को पहल करके प्यार के लिए बहलाती, फुसलाती . इसके विपरीत वह तो उसे कैरियर पर ध्यान देने के लिए प्रेरित कर रही थी. फिर भी उसी को दोष दिया गया, उस पर ताने कसे गयी, और वह खामोश होकर सुनती रही.लेकिन कैसे हो पाया ये सब ? वह शांत कैसे रही ? क्या वह भी अजय से प्रेम करने लगी थी ? क्या बिना प्यार के ही वह अजय की माँ द्वारा कही गयी खरी खोटी सुनती गयी ? अगर अजय की माँ के अलावा कोई दूसरी महिला उस पर गंभीर आरोप लगाती तो वह इस तरह सुन सकती थी ? उसके खामोश रहने की पीछे आखिर कौन सी भावना थी ? वह अपने आप से ही सवाल करने लगी , अगर उसे अजय से प्यार नहीं तो वह उसे रात दिन क्यों याद करती है ? ख़्वाबों -ख्यालों में क्यों उसे हर समय अजय याद आता रहता है ? फिर उसके दिल से आवाज आई -' तुम भी अजय से मोहब्बत करने लगी हो, उस पर जान देने लगी हो , अजय जितनी मोहब्बत तुमसे करता है, तुम भी उसे उतनी ही मोहब्बत करती हो " । फिर अगला सवाल उभरा-' अगर ये सच है तो फिर तुम इस सच को स्वीकार क्यों नहीं करतीं, क्यों अजय से दूर भागती फिर रही हो ? क्यों मोहब्बत का सिला मोहब्बत से नहीं देतीं ? तुम्हें भय किस बात का है ?तुम्हारे पास खोने के लिए ऐसा क्या है, जिसकी खातिर अपने जीवन के सबसे अहम् और सुखद पलों को निराशा में बदल रही हो ? ऐसी कौन सी बात है जिसे तुम स्वीकार नहीं कर सकती ? अगर अजय तुमसे मोहब्बत करता है तो यह अच्छी बात है और इसे स्वीकार करने में ज़रा भी हिचक नहीं होनी चाहिए '... चन्दा के दिल से जवाब आ गया, जवाब हाँ में था, हाँ उसे भी अजय से प्यार है और वे लोग बड़े खुशनसीब होते हैं जिनको कोई सच्चा चाहने वाला नसीब होता है । किस्मत से आये इस मौके को गंवाना उसने उचित नहीं समझा । मगर अब क्या किया जा सकता है ? मुंबई में कोर्ट के आदेश पर लेडीज बार बंद हो गए , जो डांस करने वाली लड़कियां थीं वे बेरोजगार होने लगीं। मुंबई शहर में जीवन यापन करना कितना कठिन और मांगा होता है इसका ओमान चन्दा को तब और ज्यादा हुआ जब उसका काम छूट गया .

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