चन्दा- हम दोनों तहेदिल से उसका शुक्रिया अदा करते हैं , क्या वह जानती है की आप मुझे चाहते हैं, मेरे सतह जीवन बिताना चाहते हैं ?
अजय- हां, अच्छी तरह से , मैं बता चूका हूँ उसे. तभी तो उसने मेरी मदद की है , या यूं कहिये की उसे दया आ गयी मेरे ऊपर. वह बहुत सुलझी हई और बड़े दिल की लड़की है. वह मुझे ज़रा बी ही दुखी नहीं देख सकती.
वे दोनों बात;लाते रहे, जुदाई के समय की बातें करते रहे , और एक दुसरे से अपना हाल कहते रहे , और उधर गाँव में जब पूरी तरह से पता चल गया की अजय घर , गाँव या किसी रिश्तेदारी में वह मौजूद नहीं था, जब हर जगह की तलाशी ले ली गयी तो भी अजय के घरवालों को कोई कामयाबी नहीं मिली. अखबारों में विज्ञापन देने से भी कोई लाभ नहीं हुआ, दूरदर्शन पर भी गुमशुदगी की खबर दी गयी, आखिरकार उसे आस -पास के शहरों में ढूँढा गया ,स्वीटी के घरवालों ने उससे भी कड़ी पूछताछ की , अजय के घर छोसने के पहले वही उसके साथ मौजूद थी, इसलिए उससे बातचीत की गयी , बातचीत के आधार पर पता चला की स्वीटी ने ही उसे मुंबई जाने के लिए कहा था , इतना ही नहीं अपनी एक सहेली का रेफरेंस भी दिया था. बस इतनी सूचना ही काफी थी.
अजय के माता -पिता ने मुंबई जाने की तैयारी कर ली, स्वीटी और उसके पिता भी साथ हो लिए . साथ में और भी बहुत से लोग थे. सबने मुंबई का रास्ता पकड़ लिया. स्वीटी का दिल जोर -जोर से धड़क रहा था , उसने जिस अजय के सपने देखे थे , आज वही अजय उससे बहुत दूर चला गया था, उसे अजय के साथ बिताए पलों की यादें सताने लगीं , यही वो अजय था जब बचपन में उसके साथ गुडिया गुड्डों का खेल खेलता था, चोर सिपाही खेलता था और अगर कोई लड़का उसके साथ जोड़ी बनाकर खेलना चाहता तो वह साफ़ इनकार कर दिया करता था, झगडा कर लिया करता था, मारपीट पर उतारू हो जाता था, वह किसी दुसरे से उसे टच भी नहीं होने देता था. आज वही अजय कितना बदल गया है. सब लोग बचपन से ही उसकी और अजय की जोड़ी की तारीफ़ करते नहीं थकते था. वही अजय चन्दा के प्यार में दीवाना हो गया था, पता न्महीं उसने चन्दा में ऐसा क्या देखा था जो उसमे नहीं है, हो सकता है कुछ खास हो, होगा तभी तो वह उसके बिना एक पल भी नहीं जी सकता , काश, वह भी अपने दिल की भावनाएं बता सकती, अपने दिल चीरकर किसीको दिखा सटी, काश, कोई सुए भी भी उसके दिल का हाल कहने का अवसर देता , काश , अजय एकबार उसके दिल की धड़कने सूनी की कोशिश करता. वह कुछ भी देक्ल्ह सकती है मगर अजय को परेशान नहीं देख सकती.अजय की माँ ने भी तो उससे यही सवाल किया था-
- बेटी , क्या तुम मेरे अजय को पसंद नहीं करती ?
स्वीटी- ये आपने क्या पूछ लिया ? ये कैसा सवाल है माँ जी , मैं उसे पसंद नहीं करती ? मैं अजय पर अपनी जान न्यौछावर करती हूँ, वह मेरी धडकन में समाया है, रग-रग में समाया है माँ जी, ऐसा न कहिये प्लीज .
माँ- फिर तुमने उसे मुंबई क्यों जाने दिया ? चन्दा से उसे मिलाने में उसकी मदद क्यों कर रही हो ? सच कहो बेटी .
स्वीटी- क्योकी , मैं अजय से बहुत प्रेम करती हूँ माँ जी, उसका दुःख नहीं देख सकती, वह चन्दा से मिलने के लिए तड़प रहा था, जल बिन मछली की तरह छटपटा रहा था, अगर मैं उसकी हेल्प नहीं करती तो वह टूट जाता , जो मुझसे कैसे बर्दाश्त होता , मैं अजय को परेशान हाल नहीं देख सकती माँ जी, मैंने सोचा की अगर उसे चन्दा से मिलने में ही खुशी होती है तो उसे खुश कर देती हूँ, यही सोचकर मैंने उसकी मदद के, उसे बताया की चन्दा मुंबई गयी है, यह बात मुझे नौटंकी के मैनेजर रंजन नेबतायी थी, तब मैंने अपनी एक सहेली से बात की और अजय को उसका पता देकर मुंबई जाने को कहा, वहाँ वह कुशल है. कोई दिक्कत नहीं है .
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