Thursday, April 29, 2010

parinda , bhag-77

मैं आपको चुटकुला सुनाऊंगी, आप अगर कहेंगे तो आपको अच्छेअच्छे भाषण भी दूंगी. कहीं रहोगे तो थोडा बहुत खाना भी बना सकती हूँ, आप तो जानते ही हैं कि मुझे वेज पुलाव बनाना आता है. कितना अच्छा होगा जब हम दोनों मुसीबतों का सामना करेंगे , और फिर जब हम दोनों मिल जायेंगे तो दुःख भी सुख में तब्दील हो जायेंगे .. मिल जुलकर हम चंदाबाई को
आखिरकार ढूंढ ही निकालेंगे . मुझे कितनी खुशी होगी जब आपको वो मिल जायेंगी ... मैं तो पागल हो जाउंगी खुशी से . मुझे ले चलो न अपने साथ ...
अजय- ऐसा कैसे हो सकता है कि तुम मेरे साथ चलो , जानती हो तुम बदनाम हो जाओगी ,, तुम्हारे घरवाले बदनाम हो जायेंगे . . कोई उन्हें जीने भी नहीं देगा ...
स्वीटी- मगर जब लोगों को सच्चाई का पता चलेगा तब तो सबक्लो अपनी गलती का एहसास होगा . आखिर सत्य कभी हारता थोड़े ही है . सच को थोड़ी देर के लिए
भले ही छिपाया जा सकता है मगर उसे नष्ट नहीं किया जा सकता .
अजय- नहीं स्वीटी, तुमने इतना कह दिया यह भी मेरे लिए काफी है, मैं इसको हमेशा याद रखूंगा . तुम्हारा इतना ही साथ देना मेरे लिए बहुत है. मेरे लिए दुआ करना .
स्वीटी- एक बात पूछूं ? क्या आपको मेरी ज़रा भी याद नहीं आएगी ? क्या आपको यहाँ से जाने में, मेरा मतलब है मुझे छोड़कर जाने में ज़रा भी तकलीफ नहीं हो रहे ?
अजय- ओह... अब मैं जाना चाहूँगा . अपना ख़याल रखना . मैं तुम्हें बहुत मिस करूँगा .. अगर मेरे घरवाले मेरे बारे में पूछें तो मेरी मजबूरी बता देना . ऐसा करना कि
मेरी तरफ से तुम उन्हें कन्वेंस करने की कोशिश करना प्लीज. ठीक है न...
स्वीटी- जी. मैं भी आपको बहुत मिस करूंगी. मैं देवी में के मंदिर में आपकी कामयाबी की प्रार्थना करने जाउंगी , और सुनो व्रत भी रखूंगी. मुझसे संपर्क में रहना . फोन
जरूर करना , और आप भी अपना ख़याल रखना खाना समय से खा लिया करना , ये न भूलना कि गाँव में कोई आपकी वापसी का इन्तजार कर रही है .
और फिर अजय ने देखा कि स्वीटी अपनी आँखों से आंसू पौंछने की असफल कोशिश कर रही थी, वह इस द्रश्य को ज्यादा देर तक नहीं देख सकता था .उसे तो बस
अपने मिशन पर पहुचने की जल्दबाजी थी, घर से उसनेखर्चे के लिए रुपये निकाले और बिलकुल सबेरे ही उसने शहर की तरफ छलांग लगादी . उसकी निगरानी करने वाले लोग
शौच वगैरह के लिए गए हुए थे, जब वह मौक़ा पाकर दूध की गाड़ी में बैठकर शहर पहुच गया. इसके बाद गोल्डन टेम्पल एक्सप्रेस गाड़ी में बैठकर वह मुंबई आ गया.

और उसके पीछे स्वीटी बेचारी आह भर्ती रह गयी, वह जन चुकी थी कि अजय चंदाबाई से शादी करने के लिए बेताब है और करके ही दम लेगा , इसके बावजूद पता नहीं वह उसको इतना क्यों चाहती थी कि अजय के जाते ही बीमार जैसी हो गयी, उसने खाना-पीना सब त्याग दिया, सब लोग उसकी यह हालत देखकर हैरत में रह गए . कोई यकीं भी नहीं कर सकता था कि फूल जैसी दिखने वाली स्वीटी सूखकर इतनी जल्दी काँटा हो जायेगी. डॉक्टर भी परेशान हो गए. कोई परेशानी भी नहीं थी लेकिन वह ठीक भी नहीं नहीं हो पा रही थी. वह ज्यादातर शून्य में निहारती रहती थी . अजय के माता-पिटा को जैसे ही अजय के घर से भागने की खबर मिली, वे पागल जैसे हो गए. अजय की माँ तो इतनी परेशान हुई कि कई घंटों बाद उसे होश आया . अजय के पिता अजय को तलाश करने की कोई कसार नहीं छोड़ी, जो भी कुछ हो सकता था वह उपाय किया गए, अखबार , रेडियो में सूचना देने के अलावा पुलिस को सक्रीय कर दिया गया,. सूचना देने वाले को दस हजार का इनाम देने की घोषणा की गयी मगर कोई फायदा नहीं हुआ, अजय कहीं कोई पता नहीं चल पाया.










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